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अशांत पाकिस्तान में भारत के लिए अवसर 

   जनसत्ता पाकिस्तान की राजनीति में सैन्य वर्चस्व ने लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर किया है, आर्थिक सुधारों को बाधित किया है तथा कट्टरपंथी संगठनों के प्रति दोहरी नीति को जन्म दिया है। इसके कारण पाकिस्तान आज राजनीतिक अस्थिरता, आर्थिक संकट और आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहा है। यह स्थिति भारत के लिए अनेक […]

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इसरो, निजी क्षेत्र और अंतरिक्ष में भारत का भविष्य

नवभारत इसरो भारत की वह प्रमुख अंतरिक्ष एजेंसी है जिसने सीमित संसाधनों में अभूतपूर्व उपलब्धियां  हासिल करके भारत को अंतरिक्ष क्षेत्र की अग्रणी शक्तियों में स्थान दिलाया है। इसरो का भारत के वैज्ञानिक, तकनीकी और सामरिक विकास में अभूतपूर्व योगदान रहा है। दुनिया में भारत को पहचान दिलाने वाला इसरो इस समय बड़े संकट में […]

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तसलीमा नसरीन की वापसी से बंगलादेश को कूटनीतिक संकेत

प्रजातंत्र तसलीमा नसरीन का लगभग दो दशक बाद कोलकाता के रवींद्र सदन में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने जा रही है,यह केवल एक साहित्यिक  घटनाक्रम नहीं है। तसलीमा नसरीन, दक्षिण एशिया की कट्टरपंथी राजनीति के विरोध में डटकर लिखने वाली ऐसी लेखिका है,जिनका जीवन का संघर्ष अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, धार्मिक कट्टरता, महिला अधिकारों और निर्वासन […]

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बांग्लादेश की सियासत में फिर शेख हसीना की दस्तक

नवभारत बांग्लादेश एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने यह संकेत दिया है कि वे अपने विरुद्ध चल रहे मामलों का सामना करने के लिए बांग्लादेश लौटना चाहती है। बांग्लादेश की राजनीति का सबसे जटिल पक्ष उसकी प्रतिशोध की संस्कृति रही है। आज यदि शेख हसीना स्वदेश लौटने की […]

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ख़ामेनेई युग के बाद ईरान में विरासत,नेतृत्व और नई चुनौतियां

    नवभारत  इतिहास किसी भी राजनेता का मूल्यांकन उसके जीवनकाल में लिए गए निर्णयों, किए गए कार्यों और उनके दीर्घकालिक परिणामों के आधार पर करता है। किसी नेता की वास्तविक विरासत उसके पद, व्यक्तित्व या लोकप्रियता से नहीं, बल्कि इस बात से निर्धारित होती है कि उसने अपने देश, समाज और अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था पर कितना […]

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इस्लामी दुनिया में नई धुरी गढ़ने की पाकिस्तान की कवायद

     सत्ता मेल                                                        इस्लामी सहयोग संगठन यानि ओआईसी की स्थापना  उन्नीस सौ उनहत्तर में विश्व के मुस्लिम देशों के बीच राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई थी। यह चार महाद्वीपों में फैले सत्तावन सदस्य देशों का एक प्रमुख अंतर-सरकारी संगठन है, जिनमें अधिकांश मुस्लिम-बहुल राष्ट्र हैं। […]

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भारत को बदलनी होगी अपनी समुद्री सुरक्षा रणनीति

नवभारत टाइम्स भारत को बदलनी होगी अपनी समुद्री सुरक्षा रणनीति हिन्द महासागर में आर-4 की दस्तक उन्नीसवीं और बीसवीं शताब्दी की शुरुआत में दुनिया में समुद्री रणनीति के लिए ख्याति अर्जित करने वाले अमेरिकी नौसैनिक रणनीतिकार अल्फ्रेड थायर महान ने कहा था की जो हिन्द महासागर पर नियंत्रण रखेगा,वही एशिया पर प्रभाव स्थापित करेगा और […]

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हिन्द-प्रशांत में भारत के लिए नए अवसर

जनसत्ता  रणनीतिक अवधारणाएं दीर्घकालीन राष्ट्रीय हितों और व्यापक भू-राजनीतिक दृष्टि पर आधारित होती हैं। हिन्द-प्रशांत की अवधारणा भी ऐसी ही एक रणनीतिक पहल थी,जिसने चीन के बढ़ते समुद्री प्रभाव को नियंत्रित और संतुलन  कायम करने के लिए अमेरिका,भारत,जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे समान हितों वाले देशों को लामबंद किया था। अब राष्ट्रपति ट्रम्प की नीतियों ने […]

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युद्द विराम या रणनीतिक विराम

        राष्ट्रवार्ता               युद्द विराम या रणनीतिक विराम  युद्द विराम की कूटनीति का मार्ग लंबा होता है और अविश्वनीय नेताओं के बूते तो इसे तय नहीं किया जा सकता। ट्रम्प भरोसे काबिल नहीं है,नेतान्याहू बेलगाम है और ईरान में सत्ता की चाभी अब राजनीति और आईआरजीसी के बीच उछाली जा रही है। राजनीतिक इच्छाशक्ति, सैन्य […]

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अमेरिका पर भारत कितना भरोसा करें….

सत्तामेल भारत में क्वाड के विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री मार्क रुबियो ने  कहा था की पाकिस्तान या अन्य देशों के साथ अमेरिका के संबंध भारत के साथ उसकी रणनीतिक साझेदारी की कीमत पर नहीं होंगे। क्या वास्तव में अमेरिका के लिए भारत बहुत महत्वपूर्ण है और भारत को भी अमेरिका […]

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