#विदेश नीति
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विदेश नीति को विवेकानन्द की पब्लिक डिप्लोमेसी से सीखने की जरूरत

सुबह सवेरे स्वामी विवेकानन्द ने बहुत पहले यह समझ लिया था कि देशों के बीच संबंध केवल सरकारों से नहीं बल्कि जनता से जनता के बीच बनते हैं। यही पब्लिक टू पब्लिक डिप्लोमेसी का मूल भाव है। 1893 में शिकागो के विश्व धर्म संसद में उनका ऐतिहासिक संबोधन किसी राजनयिक मिशन का हिस्सा नहीं था,फिर […]

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भारत की विदेश नीति की नई चुनौती

जनसत्ता                                                                                            कूटनीति का एक प्रमुख दायित्व यह होता है कि […]

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रूस पर निर्भरता

          दैनिक जागरण,राष्ट्रीय                    कम्युनिस्ट रूस और दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश भारत के आपसी मजबूत सम्बन्ध पश्चिम को हैरान और परेशान करते रहे है,यह समस्या दशकों पुरानी है। रूस के साथ सामरिक और आर्थिक संबंध मजबूत रहने से भारत पूंजीवादी दुनिया की महत्वाकांक्षी नीतियों के शिकंजे […]

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बांग्लादेश को लेकर भारत की विदेश नीति कैसी हो….

नवभारत टाइम्स  हम पीछे मुड़कर देखे तो पिछले साल तक भारत और बांग्लादेश के सम्बन्ध बेहद मजबूत थे और दोनों देशों के बीच आर्थिक,सामाजिक,सांस्कृतिक और रणनीतिक समन्वय उम्मीदों के बढ़ा रहा था।  5 अगस्त 2024 को शेख हसीना के सत्ता से बेदखल होते ही दोनों देशों के सम्बन्ध अब निम्नतर स्थिति में पहुंच गए है। इसका […]

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