इस मन्दिर में मन्नत के बाद जब किन्नर को गर्भ ठहर गया …!

धर्म,आध्यात्म और विज्ञान प्रकृति के रहस्यों पर कभी साथ साथ तो कभी आमने सामने होते है। दुनिया में बहुत सारे ऐसे रहस्य अनायास सामने आ जाते है जो अविश्वसनीय लेकिन सच के बहुत करीब होते है। जीवन में सबसे खुबसूरत एहसास होता है माँ बनना। यह सौभाग्य सिर्फ महिलाओं को ही प्राप्त है क्योकि उनमें ही गर्भनाल होता है और इसीलिए वह माँ बन सकती है। लेकिन जब किन्नर ही माँ बन जाए तो यह विज्ञान के लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है।
मध्यप्रदेश के बडवानी जिले में आगरा मुम्बई रोड़ से कुछ ही दूरी पर सतपुड़ा की पहाड़ियां है और यहां पर एक गाँव है नागलवाडी। इस गाँव में एक प्राचीन भीलट देव का मंदिर है जहां पर संतान प्राप्ति की इच्छा पूर्ण हो जाती है।
नि: संतान लोग संतान की चाह पूरी करने के लिए दूर दराज के इलाकों से यहाँ आते है और प्रतिवर्ष यहाँ भीलट देव का मेला भी लगता है। तकरीबन दो सौ साल पहले यहां की एक घटना बेहद दिलचस्प है जिसके अवशेष अब भी यहां देखे जा सकते है।
दरअसल एक किन्नर ने भीलट देव के यहां संतान की मन्नत पूरी होने की सच्चाई आजमाने के लिए स्वयं के लिए संतान प्राप्ति की मन्नत मांग ली। महीने गुजरने के साथ वाकई उसे गर्भ ठहर गया। किन्नर के लिए यह बेहद अप्रत्याशित था और वह हतप्रभ भी थी की अब क्या होगा। हालांकि बच्चा होने के ठीक समय नौवे महीने में किन्नर की मृत्यु हो गई।
संतान प्राप्ति के लिए आस्था के सबसे बड़े केंद्र माने जाने वाले भगवान भीलट को किन्नर के द्वारा इस तरह आजमाना किसी को रास नहीं आया और इसके बाद किन्नरों के लिए यहां रात्रि विश्राम करना शापित मान लिया गया। मरने के बाद किन्नर को वहीं दफना दिया गया और उसकी समाधि भी बना दी गई जहां जाना अपशकुन मान लिया गया ।
किन्नर का माँ बनना विज्ञान की दृष्टि से असम्भव है लेकिन उस समय परिस्थितियां भी भिन्न थी। वास्तव में महिलाओं के शरीर पर सामान्य से ज़्यादा बाल,हिरसूटिज़्म या एंड्रोजन नाम के पुरुष हार्मोन की मात्रा अधिक होने के कारण होते हैं। कुछ बीमारियों में यह समस्या उभर सकती हैं।शरीर पर सामान्य से ज़्यादा बाल (हिरसूटिज़्म) होने के बीमारी में महिलाओं के चेहरे,छाती और पीठ सहित शरीर के उन हिस्सों में कड़े बाल उग आते हैं जहां अक्सर पुरुषों के बाल उगते हैं।पॉली सिस्टिक ओवरी डिसऑर्डर भी एक ऐसी बीमारी है जिसमें महिलाओं के शरीर में अप्रत्याशित बदलाव आ जाते है यह शारीरिक बदलाव पुरुषों जैसे होते है।पुराने दौर में शिक्षा की कमी होने से पुरुषों जैसे शारीरिक बदलाव आने पर महिलाओं को समाज किन्नर मान लेता था और समाज से उन्हें अलग कर दिया जाता था। डॉक्टर कहते है कि ऐसी बीमारी से ग्रस्त किसी महिला को संतान हुई होगी वहीं बाबा के भक्त इस दलील को ख़ारिज करते है।
किन्नर को बाबा भीलट देव के आशीर्वाद से संतान प्राप्ति का चमत्कार इस इलाके में कई बरसों से मशहूर है। यहीं नहीं इस गाँव को किन्नरों के लिए अभिशिप्त माना जाता है। घटना के बाद इतने बरस बीत गए है लेकिन किन्नर इस गाँव में रात न रुकने की परम्परा पर कायम है।
#ब्रह्मदीप अलूने

