यह किन्नरों की सपनों की दुनिया के साकार होने जैसा है,जहां उनका नाम,उनकी पहचान और उनके अधिकारों को निर्वाचन आयोग ने वैधानिक मान्यता दी है। उन्हें अब पहचान पत्र के लिए दर दर भटकने की जरूरत नहीं पड़ेगी,उन्हें अब पहचान छुपाने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी। अब वे गर्व से कह सकते है कि हम भी इंसान है,जी हां,हम किन्नर है।

किन्नरों को तीसरी दुनिया के नहीं,तीसरे लिंग वाले लोग अवश्य कहा जाता है। राजस्थान की सरकार ने ट्रांसजेंडर को मतदान से जोड़ने के लिए नया अभियान शुरू किया है जिसमें किन्नर महामंडलेश्वर पुष्पा माई के नाम से विख्यात जयपुर की पुष्पा गिडवानी को राजस्थान सरकार की ट्रांसजेंडर स्टेट इलेक्शन आइकॉन गया है। ट्रांसजेंडर को जो मतदाता परिचय पत्र दिए जा रहे है उसमें माता पिता की जगह गुरु का नाम लिखा गया है। इस साल राजस्थान में विधानसभा चुनाव होने वाले है और इसमें ट्रांसजेंडर समुदाय की शत प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए राजस्थान के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने राज्य के समस्त जिला कलेक्टर को पत्र लिखकर यह कहा है कि तृतीय लिंग मतदाताओं की संख्या 70 हजार के लगभग या इससे अधिक हो सकती है। अत: उनकी पहचान कर मतदाता सूची में उनका नाम जोड़ा जाएं। निर्वाचन आयोग ने ट्रांसजेंडर समुदाय की पहचान की कठिनाई को ध्यान में रखते हुए नवीन फॉर्म-6 जारी किया है जिसमें संरक्षक के रूप में गुरु का नाम लिखने पर सहमति प्रदान की गई है। राजस्थान के सभी जिलों में कैम्प लगाकर ट्रांसजेंडर का पंजीयन कराया जा रहा है और इसमें स्वयंसेवी संस्था नई भौर की मदद ली जा रही है।
पुष्पा माई की किन्नर सम्मान की लड़ाई
देखो देखो हिजड़ा जा रहा है …! तोहमते ,लानते और अपमान का घूंट पीते पीते भी पुष्पा माई किन्नर समुदाय की बेहतरी के लिए काम करने को दृढ़ प्रतिज्ञ है। पुष्पा कहती है कि मैं दोहरी जिंदगी से परेशान हो गई थी,क्योंकि अपनी पहचान छिपा कर मैंने एजूकेशन तो पूरी की। लेकिन साल 2005 में मैंने तय कर लिया की अब और नहीं,मैं जैसी हूं वैसी ही दुनिया के सामने रहूंगी। पहली बार दुनिया के सामने खुलकर एक किन्नर के रुप में आई। कई एनजीओ के साथ काम किया उन्होंने स्वयं की संस्था नई भोर की 2007 में शुरुआत की। पुष्पा माई ने किन्नर समुदाय के स्वास्थ्य पर भी काम किया। 2011 में सरकार के पहचान प्रोजेक्ट से जुड़ी औऱ खुलकर काम किया। नई भोर ने राजस्थान में लगातार बेहतर काम किये है।
नई भौर ने एलजीबीटी प्राइड वॉक से बदल दी दुनिया
संस्थान नई भौर साल 2007 से राजस्थान में समलैंगिक और किन्नर समाज के अधिकारों की रक्षा के लिए निरंतर काम कर रहा है। नेशनल एड्स कंट्रोल सोसायटी से मिलकर नई भौर निरंतर स्वास्थ्य जागरूकता के लिए काम कर रहा है। इसके सकारात्मक परिणाम आए है और कुछ लोग अपनी झिझक छोडकर इस संस्था से जुड़ रहे है। जयपुर में साल 2015 से हर साल एलजीबीटी प्राइड वॉक आयोजित की जाती है जिसमें लेस्बियन, गे,बाईसेक्सुअल और ट्रांसजेंडर लोग अपनी एकता दिखाते हुए प्राइड वॉक करते है। यह आत्मविश्वास और जागरूकता का प्रतीक है।
किन्नर समाज के साथ ही समूचे ट्रांसजेंडर कल्याण के लिए प्रतिबद्द पुष्पा माई ने अपने समुदाय के अधिकारों के लिए लगातार प्रयास करते हुए 4 मई 2015 को राजस्थान सरकार से ट्रांसजेंडर के मानव अधिकारों की रक्षा और उनके कल्याण के लिए एक बोर्ड बनाने की मांग रखी थी। उनका प्रयास रंग लाया और 18 महीने के लगातार प्रयास के बाद अंततः सरकार ने इसे हरी झंडी दे दी। राजस्थान में गठित बोर्ड ट्रांसजेंडर्स के स्वास्थ्य,शिक्षा और रोजगार के लिए काम करता है। राजस्थान सरकार ने उच्च शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश आवेदन पत्रों में ट्रांसजेडर्स के लिए अलग कॉलम का प्रावधान किया है और उनके लिए सीटें भी आरक्षित की गई है।
वोटिंग बेमिसाल है,मैं अवश्य वोट देता हूँ
2023 के राष्ट्रीय मतदाता दिवस की थीम है,वोटिंग बेमिसाल है,मैं अवश्य वोट देता हूँ। यह गर्व अब किन्नर भी महसूस कर रहे है। रघुनाथपूरी जयपुर की रहने वाली शालू किन्नर का मतदाता परिचय पत्र उनकी गुरु मनीषा किन्नर के नाम से बाकायदा जारी किया गया है। शालू को अब अपनी पहचान बताने में कोई शर्म महसूस नहीं होती। सिमरन और मुस्कान भी उन लोगों में शुमार है जो खुद को किन्नर बताते हुए कभी संकोच नहीं करते।
भारतीय लोकतंत्र में सभी लोगों की भागीदारी सुनिश्चित होनी चाहिए। किन्नरों ने इस भागीदारी के अधिकारों को पाने का आधा सफर तय कर लिया है लेकिन रोजगार का उनका संघर्ष बदस्तूर जारी है। पुष्पा माई किन्नर समुदाय का आत्मविश्वास बनकर उनकी बेहतरी के लिए लगातार प्रयत्नशील है।