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article भारत मे आतंकवाद

लाल आतंक ऐसे होती है नक्सलियों की #भर्ती… nkasli bhrti politics

बस्तर में नक्सलियों को आमतौर पर दादा लोग कहा जाता है,लेकिन इनके दादा बनने की शुरुआत बालपन से ही हो जाती है। #नक्सल गांवों में बाल संघ काम करता है। इसमें छह साल से करीब 13 साल के बच्चें होते है। नक्सली यह मानते है कि बच्चों पर सुरक्षा बल या पुलिस की पैनी निगाहें नहीं होती। अत: यह […]

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डॉ.आंबेडकर को टी.एन.शेषन चाहिए,सांध्य प्रकाश Ambedkar sheshan sandhaya praksh

डॉ.आम्बेडकर से जब यह पूछा गया की क्या भारत में लोकतंत्र सफल होगा,तो उनका जवाब था की यह नाम मात्र का होगा। #डॉ.आंबेडकर ने देश के पहले आम चुनावों के बाद ही यह सवाल उठा दिया था कि क्या आपने लोगों को मनपसन्द उम्मीदवार चुनने की आज़ादी दी है। राजनीतिक पार्टी के उम्मीदवार पर क्या […]

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चीन में बदलाव की उम्मीद

साम्यवाद के कड़े नियमों की आढ़ में जनता पर नियन्त्रण स्थापित करने की शी जिनपिंग की कोशिशें अब धराशायी होने लगी है।  चीन की कम्युनिस्ट सरकार ने ज़ीरो कोविड नीति को जनता पर सामाजिक नियन्त्रण स्थापित करने का एक अवसर माना था लेकिन लगता है कि सरकार का यह दांव उलटा पड़ गया है। कोविड के दौरान जिस […]

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16 दिसम्बर 1971,जब बंगालियों ने धर्म को पीछे छोड़ा…

  16 दिसम्बर 1971 को यह खबर सब दूर फ़ैल चूकी थी कि पाकिस्तान की सेना भारतीय सेना के सामने हथियार डालने वाली है। ढाका के रेसकोर्स मैदान में इसके लिए आत्मसमर्पण समारोह का आयोजन किया गया। सुबह से ही लाखों लोग इस मैदान पर जमा होने लगे। पाकिस्तानी सैनिकों के अत्याचारों से बंगला जनता […]

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