भारत के लिए जी-7 महत्वपूर्ण है या ब्रिक्स
दैनिक नवसंदेश,पटना जी-7 में अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली और जापान शामिल है। यूरोपीय संघ भी इसकी बैठकों में पूर्ण भागीदार के रूप में शामिल होता है। भारत जी-7 […]
दैनिक नवसंदेश,पटना जी-7 में अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली और जापान शामिल है। यूरोपीय संघ भी इसकी बैठकों में पूर्ण भागीदार के रूप में शामिल होता है। भारत जी-7 […]
जनसत्ता अठारहवां ब्रिक्स सम्मेलन, लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के निर्माण के संदेश के साथ सम्पन्न हुआ। वैश्विक व्यवस्था में लचीलापन बदलती परिस्थितियों के अनुरूप नीतियों और रणनीतियों में आवश्यक परिवर्तन की क्षमता है। नवाचार नई सोच, तकनीक और नीतियों के माध्यम से वैश्विक चुनौतियों के समाधान का मार्ग है। सहयोग और स्थिरता का निर्माण […]
प्रजातंत्र अंतरराष्ट्रीय राजनीति में शक्ति का स्वरूप बदल रहा है और उसके साथ कूटनीति के औजार भी बदल रहे हैं। आज किसी राष्ट्र का प्रभाव उसकी सीमाओं पर तैनात सैनिकों और हथियारों से आगे बढ़कर उसकी आर्थिक क्षमता, बाजार, तकनीक, निवेश, ऊर्जा संसाधनों, वैश्विक आपूर्ति तंत्र और रणनीतिक साझेदारियों से तय होता है। भारत ने […]
आरक्षण से बचने का पूंजीवादी रास्ता देश में आरक्षण समाप्त करने या उसे आर्थिक आधार पर लागू करने की मांग को लेकर एक बार फिर प्रदर्शन तेज हो रहे हैं। युवाओं का एक वर्ग मानता है कि सरकारी नौकरियों में आरक्षण की व्यवस्था खत्म होनी चाहिए और चयन का आधार आर्थिक स्थिति या योग्यता होना […]
वेबदुनिया ख़ुफ़िया एजेंसियां अपने राष्ट्र के दूरगामी हितों के लिए दोस्तों का भी बलिदान कर सकती है। ट्रम्प और पुतिन के दोस्ताना रिश्तों के बारे में दुनिया जानती है। ट्रम्प ईरान युद्द को जीतकर चुनाव जितना चाहते है वहीं पुतिन भी यूक्रेन को लेकर कुछ ऐसे ही मंसूबे पाले हुए है। यदि ईरान में […]
जनसत्ता अविश्वास की कूटनीति के बूते पड़ोसियों से अच्छे संबंध कायम नहीं किए जा सकते। तारिक रहमान की भारत नीति को लेकर सबसे बड़ी चिंता यही है कि वे नई दिल्ली को एक संभावित साझेदार से अधिक एक संशय की दृष्टि से देख रहे हैं। बांग्लादेश से सकारात्मक संबंधों की राजनयिक कोशिशों की दिशा में […]
नवभारत विदेश नीति का सबसे अहम गुण राष्ट्रीय हितों की रक्षा करते हुए बदलती अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के अनुसार स्वयं को ढालने की क्षमता होना चाहिए। इसे रणनीतिक लचीलापन कहा जा सकता है। बांग्लादेश के संदर्भ में आज भारत की विदेश नीति इसी कसौटी पर खड़ी है। ढाका में राजनीतिक सत्ता के बदलते समीकरणों ने […]
वेबदुनिया अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में अवसरों को पहचानना भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना। विकासशील देशों के लिए बड़े बहुपक्षीय मंच केवल औपचारिक सम्मेलन नहीं होते, बल्कि वे निवेश,व्यापार, तकनीक,ऊर्जा और वैश्विक राजनीतिक स्वीकार्यता के नए रास्ते खोलते हैं। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना […]
जनसत्ता बहुस्तरीय गठबंधन अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को प्रभावित करने की क्षमता तो रखते है,लेकिन उनका प्रभाव तभी दीर्घकालीन होता है,जब उनके पीछे साझा रणनीतिक दृष्टि,पारदर्शिता,प्रतिबद्धता और स्थायी हित हो। केवल तात्कालिक स्वार्थों पर आधारित गठबंधन अक्सर बदलती परिस्थितियों के साथ कमजोर पड़ जाते है। मक्का में तुर्की, पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हुआ संयुक्त […]
सुबह सवेरे संविधान सभा के भीतर पूंजीवाद, निजी संपत्ति और आर्थिक असमानता को लेकर गहरी आशंकाएं थी। 1947 में स्वतंत्र हुआ भारत अत्यंत गरीब, असमान और कृषि-प्रधान समाज था। औपनिवेशिक शासन ने व्यापक गरीबी, बेरोजगारी, सामंती भूमि संबंध और आर्थिक विषमता छोड़ी थी। संविधान निर्माताओं के सामने सवाल था कि राजनीतिक स्वतंत्रता को सामाजिक […]