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मध्य पूर्व में यूएई का भू-रणनीतिक दांव

जनसत्ता  अंतरराष्ट्रीय संबंधों की वास्तविकता यह है की यहां न तो कोई स्थाई दोस्त होता है,न स्थाई दुश्मन होता है और न ही कोई स्थाई गठबंधन होता है। राष्ट्रीय हितों  के संवर्धन के लिए समय,परिस्थिति और रणनीतिक लाभ के अनुसार दोस्त और दुश्मन बदलते रहते हैं। तेल की दुनिया के दो मजबूत साथी माने जाने वाले सऊदी […]

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दुनिया को क्यों चाहिए भारत के मजदूर

वेबदुनिया  लीबिया के कर्नल मुअम्मर गद्दाफी को एक कठोर तानाशाह के रूप में देखा जाता है,किन्तु उनके शासनकाल में कुछ ऐसे लोक कल्याणकारी काम भी हुए जिसकी मिसाल और कहीं नहीं मिलती। लीबिया का रेगिस्तान विश्व के सबसे विशाल और शुष्क रेगिस्तानों में से एक है,जो उत्तरी अफ्रीका में स्थित लीबिया के अधिकांश भू-भाग को […]

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 भारत के बिना पाकिस्तान-ईरान कॉरिडोर का भविष्य खतरें में

नवभारत टाइम्स ईरान अमेरिका युद्द में पाकिस्तान और चीन उन अवसरों की तलाश में है,जिससे परिस्थितियों का फायदा उठाया जा सके। अब पाकिस्तान ने ईरान के लिए ट्रेड रूट खोलने का ऐलान किया है,इसमें तफ्तान नामक स्थान खूब चर्चा में है।  तफ्तान,ईरान और पाकिस्तान की सीमा पर,पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के चगाई जिले में स्थित […]

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भारत की गुप्त कूटनीति

नवभारत कूटनीतिक रूप से  यह माना जाता है की जब दो देशों के बीच गहरा अविश्वास हो तो किसी तीसरे देश द्वारा मध्यस्थता करना एक कूटनीतिक  गलतियां  जोखिम भरा कदम हो सकता है। ऐसे मामलों में तीसरा पक्ष अक्सर खुद फंस जाता है और तीसरे पक्ष की विश्वसनीयता पर सवाल  उठने लग जाते है। तीसरा […]

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कमतर क्यों है दलित आदिवासी नेतृत्व

सुबह सवेरे बिहार,यूपी,ओडिशा,झारखंड और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में दलित और आदिवासी वोट बैंक निर्णायक है। इन राज्यों की विधानसभाओं और लोकसभा से आरक्षित सीटों के माध्यम से कई नेता सामने आते है। डॉ.भीमराव आंबेडकर ने दलितों और आदिवासियों को संसद तथा विधानसभाओं में आरक्षण इसलिए प्रदान किया क्योंकि ये समुदाय सदियों से सामाजिक,आर्थिक और राजनीतिक […]

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मध्यपूर्व को चाहिए मजबूत मध्यस्थ

    जनसत्ता                                               किसी भी जटिल अंतर्राष्ट्रीय विवाद के समाधान के लिए पहले विश्वास निर्माण आवश्यक है,तभी सार्थक और स्थायी समाधान संभव हो सकता है। इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच हुई बातचीत की असफलता का एक प्रमुख कारण यह था कि दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद गहरे अविश्वास को दूर […]

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अविश्वास की कूटनीति,कमजोर मध्यस्थ और वार्ता  नाकाम

सत्ता मेल अविश्वास की कूटनीति देशों को यह याद दिलाती है कि वे केवल अपने हितों पर निर्भर रहें। जब देशों को एक-दूसरे पर भरोसा नहीं होता,तो वे समझौते बहुत सोच-समझकर और स्पष्ट शर्तों के साथ करते है,जिससे भविष्य में धोखा मिलने की संभावना नहीं हो। 50 साल की कट्टर दुश्मनी को भूल कर किसी […]

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आधुनिकता,अनुसंधान,शिक्षा और प्रगति से भरपूर है ईरान

नवभारत अमेरिका और इज़राइल के साथ जारी तनावपूर्ण हालात में ईरान की सामरिक क्षमता केवल उसकी सैन्य शक्ति का परिणाम नहीं है,बल्कि यह उसके मजबूत शैक्षिक ढांचे और वैज्ञानिक प्रगति का प्रतिफल भी है। दरअसल वैश्विक परिदृश्य में ईरान एक ऐसा इस्लामिक राष्ट्र है,जिसने  जटिल अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों,आर्थिक प्रतिबंधों और कूटनीतिक,रणनीतिक तथा राजनीतिक दबावों के बावजूद […]

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ईरानी राष्ट्रवाद से हार गई दुनिया

नवभारत                  ईरान की मजबूती का एक प्रमुख आधार उसका गहरा और ऐतिहासिक राष्ट्रवाद रहा है। ईरान में राष्ट्रवाद राजनीतिक तौर पर बहुत मजबूत है तथा इसमें सांस्कृतिक,धार्मिक और ऐतिहासिक पहचान का सम्मिलित प्रभाव है। दुनिया की सबसे प्राचीन सभ्यताओं में शामिल फारसी सभ्यता की प्राचीन विरासत लोगों […]

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मध्यपूर्व से उभरता नया शक्ति संतुलन

जनसत्ता                   किसी क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति,प्राकृतिक संसाधन,समुद्री मार्ग,पर्वत,रेगिस्तान और सीमाएं यह तय करती है कि वहां की राजनीति,सुरक्षा नीति और कूटनीति किस दिशा में विकसित होगी। दक्षिण-पश्चिम एशिया,दक्षिण-पूर्वी यूरोप और उत्तर-पूर्वी अफ्रीका तक विस्तारित मध्यपूर्व की कोई स्पष्ट और सर्वमान्य भौगोलिक सीमा नहीं है। यही कारण […]

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