जब असहमति अपराध बने, गांधी फिर याद आते है
सुबह सवेरे सत्ताएं बदलती है, शासन बदलते है, कानून बदलते है,लेकिन जब कोई निहत्था नागरिक अन्याय के सामने खड़ा होकर कहता है की मैं नहीं डरता, तब गांधी फिर जीवित हो उठते है। दुनिया बदल गई है, सत्ता के तरीके बदल गए है, लेकिन सत्ता के सामने निर्भीक असहमति की ताकत आज भी वही है। […]
