#आज़ादी
article गांधी है तो भारत है

पूंजीवाद और समाजवाद के अंतर्द्वंद की आज़ादी

         सुबह सवेरे संविधान सभा के भीतर पूंजीवाद, निजी संपत्ति और आर्थिक असमानता को लेकर गहरी आशंकाएं थी। 1947 में स्वतंत्र हुआ भारत अत्यंत गरीब, असमान और कृषि-प्रधान समाज था। औपनिवेशिक शासन ने व्यापक गरीबी, बेरोजगारी, सामंती भूमि संबंध और आर्थिक विषमता छोड़ी थी। संविधान निर्माताओं के सामने सवाल था कि राजनीतिक स्वतंत्रता को सामाजिक […]

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article भारत मे आतंकवाद

माओवादियों के मजदूरों की आज़ादी अब दूर नहीं…..

मजदूर दिवस,वेबदुनिया  ऊंचे नीचे पहाड़,घने जंगल,घाटियां और संकरी पगडंडियां। माओवादियों के लिए ऐसे दुर्गम क्षेत्र ही सुरक्षित माने जाते है। ऐसे क्षेत्रों में माओवादियों के खाने पीने का सामान पहुंचाना किसी कठिन चुनौती से कम नहीं होता। कई कई किलोमीटर पूरी पूरी रात पैदल चलते हुए रसद का सामान पहूंचाने की जिम्मेदारी भोले भाले और […]

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