#गांधी है तो भारत है
गांधी है तो भारत है

 विभाजित भारत की बुनियाद में बापू कहां है…!

स्वतंत्र समय             गवर्नर जनरल काउन्सिल के सदस्य सर जॉन स्ट्रेची ने भारत में कई वर्ष बिताएं थे,इस दौरान उन्होंने एक किताब लिखी थी इण्डिया। स्ट्रेची ने कहा कि अतीत में भारतीय राष्ट्र नाम की कोई चीज़ नहीं थी,न ही भविष्य में उसके ऐसा होने की संभावना है। स्ट्रेची ने इस संभावना को […]

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गांधी है तो भारत है

बापू संकीर्ण हिन्दू तो नहीं थे…!

पॉलिटिक्स बापू को दक्षिण अफ्रीका में ईसाई बनाने की खूब कोशिशें की  गई,उन्हें ईसाई धर्म से सम्बन्धित किताबें पढने को भी वहां बहुत दी गई,लेकिन बापू का मन प्रिटोरिया में जिस किताब को पढ़ने में खूब लगा,वह थी,मैक्समूलर की किताब,हिंदुस्तान हमें क्या सिखाता है। मैक्समूलर लिखते है,अगर मुझे पूरे विश्व में किसी ऐसे देश का […]

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गांधी है तो भारत है

गांधी मरते क्यों नहीं है…!

   सुबह सवेरे                     यह गांधी का अंतिम आमरण अनशन था। जो 13 जनवरी 1948 को प्रारम्भ हुआ था।  हमेशा की तरह उनका शरीर इस बार भूख और प्यास का संकट झेलने को तैयार नहीं था। इस कारण महज 48 घंटे में ही उनके शरीर ने जवाब दे […]

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गांधी है तो भारत है

संसद को बांझ औरत कहने वाला महात्मा…!

सुबह सवेरे                                                                   बापू बिहार में थे और माउन्टबेटन को उनसे बहुत जरुरी वार्ता करनी थी। माउन्टबेटन ने बापू को बुलावा पहुंचाया और […]

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गांधी है तो भारत है

बंटवारे के बाद की शिक्षा

सुबह सवेरे-बंटवारे के बाद की #शिक्षा से भारत बना और पाक हुआ तबाह                                                                                      […]

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book गांधी है तो भारत है

महात्मा गांधी की बहनें

                   बापू की तीन बहनें थी मूली बेन,पानकुंवर और रलियत बेन।  लेकिन बापू के सामाजिक और राजनीतिक सफर में सहभागी बनी मीरा बेन,राजकुमारी अमृत कौर,आभा और मनु का स्थान किसी से कम नहीं था। ये सभी बापू की बहनें भी थी और बेटियां भी। मीरा बेन का […]

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article book गांधी है तो भारत है

जब राजद्रोह राष्ट्रभक्ति की जरूरत बन जाएं … !

सुबह सवेरे    सरकार के प्रति अच्छी राय रखने वाले विचारों को ही केवल अस्तित्व में या सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होना चाहिये,क्योंकि गलत राय सरकार और राजशाही दोनों के लिये नकारात्मक प्रभाव उत्पन्न कर सकती थी। यह विचार सत्रहवीं सदी मे ब्रिटेन मे राजशाही को मजबूत बनाएं रखने के लिए कानून के रूप मे […]

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