#पूंजीवाद
article गांधी है तो भारत है

पूंजीवाद और समाजवाद के अंतर्द्वंद की आज़ादी

         सुबह सवेरे संविधान सभा के भीतर पूंजीवाद, निजी संपत्ति और आर्थिक असमानता को लेकर गहरी आशंकाएं थी। 1947 में स्वतंत्र हुआ भारत अत्यंत गरीब, असमान और कृषि-प्रधान समाज था। औपनिवेशिक शासन ने व्यापक गरीबी, बेरोजगारी, सामंती भूमि संबंध और आर्थिक विषमता छोड़ी थी। संविधान निर्माताओं के सामने सवाल था कि राजनीतिक स्वतंत्रता को सामाजिक […]

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 पूंजीवाद की चकाचौंध में धुंधले पड़ते मानवाधिकार,नवभारत टाइम्स

नवभारत टाइम्स यह दुनिया को चमत्कृत करने और गहरे बदलाव लाने वाली घटना थी जब 2017 में विश्व आर्थिक मंच पर चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पूंजीवाद और व्यापार की जरूरतों पर बल  दिया था। इस दौरान उन्होंने दावा किया था की आर्थिक वैश्वीकरण ने वैश्विक विकास को गति दी है और वस्तुओं और पूंजी की […]

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