पूंजीवाद और समाजवाद के अंतर्द्वंद की आज़ादी
सुबह सवेरे संविधान सभा के भीतर पूंजीवाद, निजी संपत्ति और आर्थिक असमानता को लेकर गहरी आशंकाएं थी। 1947 में स्वतंत्र हुआ भारत अत्यंत गरीब, असमान और कृषि-प्रधान समाज था। औपनिवेशिक शासन ने व्यापक गरीबी, बेरोजगारी, सामंती भूमि संबंध और आर्थिक विषमता छोड़ी थी। संविधान निर्माताओं के सामने सवाल था कि राजनीतिक स्वतंत्रता को सामाजिक […]
