स्वदेश
कश्मीर में आतंकवाद को फ़ैलाने में महिलाओं की खास भूमिका रही है। पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी आईएस आई ने दीर्घकालीन स्तर पर नीतियां बनाकर धार्मिक जिम्मेदारियों और जिहाद के नाम ऐसी महिलाओं की विंग तैयार की जो आतंकियों के पक्ष में मनोवैज्ञानिक युद्ध, प्रचार और फंडिंग जैसे कार्यों में शामिल रहे। आईएसआई की इस योजना में लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठनों को शामिल किया गया जिनका कश्मीर घाटी में गहरा प्रभाव रहा है।
फरीदाबाद की अल-फलाह विश्वविद्यालय से जुड़ी डॉक्टर शाहीन शाहिद सुरक्षा एजेंसियों के निशाने पर है,उसे लाल किले के पास हुए विस्फोट के बाद गिरफ्तार किया गया है। पुलिस को संदेह है कि वह उसी विश्वविद्यालय के एक अन्य संकाय सदस्य डॉ.मुज़म्मिल गनई से जुड़ी थीं,जिस पर प्रतिबंधित संगठनों जैश-ए-मोहम्मद और अंसार गजवत-उल-हिंद से जुड़े एक सफेदपोश आतंकी मॉड्यूल का हिस्सा होने का आरोप है। सुरक्षा एजेंसियों को संदेह है की शाहीन भारत में जैश-ए-मोहम्मद की महिला भर्ती शाखा,जमात-उल-मोमिनात का नेतृत्व कर रही थी। इस संगठन की अगुवाई पाकिस्तान में मसूद अजहर की बहन सादिया अजहर कर रही है। सादिया का पति यूसुफ अजहर कंधार हाईजैक मामले में एक प्रमुख मास्टरमाइंड था। जिसे ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना ने मार डाला था। डॉक्टर शाहीन के पहले भी कई महिलाओं ने पाकिस्तान की शह पर आतंक को पनाह दी थी और इसके केंद्र में महबूबा मुफ़्ती की बहन को माना जाता है। घाटी में अलगाव को 80 के दशक के शुरूआती दौर में महसूस किया जाने लगा था लेकिन इसे आतंक की शक्ल देने का काम किया रुबिया सैयद अपहरण कांड ने। भारत के तत्कालीन गृहमंत्री मुफ़्ती मोहम्मद सईद की बेटी रुबिया सईद आठ दिसंबर 1989 को श्रीनगर के मशहूर ललदेन अस्पताल से बाहर निकलकर एक मिनी बस में सवार हुई। इस दिन उसकी सुरक्षा में किसी को भी नहीं रखा गया था। एक सुनसान इलाके से रुबिया सईद का आतंकियों ने अपहरण कर लिया।इसके बाद अपनी बेटी को बचाने की एवज में तत्कालीन गृहमंत्री ने पांच दुर्दांत आतंकियों को छोड़ दिया। रुबिया की पांच दिनों बाद घर वापसी हो गई लेकिन कश्मीर जल उठा। इस घटना के बाद कश्मीरी आतंकियों के हौंसले इतने बुलंद हो गए कि उन्होंने कई हत्याएं और अपहरण किए। इसके बाद कश्मीरी पंडितों को बेखौफ निशाना बनाया और यहीं से घाटी से कश्मीरी पंडितों का पलायन भी शुरू हुआ।
2012 में एनएसजी के पूर्व अधिकारी रहे मेजर जनरल ओपी कौशिक ने रूबिया सईद अपहरण मामले में सनसनीखेज दावा किया था। कौशिक के अनुसार रूबिया के पिता और तत्कालीन गृहमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद नहीं चाहते थे कि उनकी बेटी जल्द रिहा हो। उन्होंने साफ किया था कि अपहरण की सूचना मिलने के पांच मिनट के भीतर ही एनएसजी की टीम ने पता लगा लिया था कि रूबिया को कहां रखा गया है। लेकिन इसके बाद भी आतंकियों पर कार्रवाई नहीं करने दी गई थी। इसकी पुष्टि कश्मीर के एक अलगाववादी नेता हिलाल वार ने अपनी किताब ‘ग्रेट डिस्क्लोजर-सीक्रेट अनमास्क्ड’ में भी की। हिलाल ने रूबिया सईद अपहरण को लेकर एक नया खुलासा करते हुए आरोप लगाया कि यह सिर्फ एक ड्रामा था जो तत्कालीन केन्द्रीय गृहमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद ने जेकेएलएफ के कमांडर यासीन मलिक के साथ मिलकर रचा था। इस समूचे घटनाक्रम की जब परते खुली तो इस बात की आशंका बलवती हो गई कि इस अपहरण कांड में रुबिया मददगार थी और राजनीतिक साजिश के तहत् इस घटना को अंजाम दिया गया था। कश्मीर में तीन दशकों से आतंकवाद पसरा रहा जिसमें हजारों लोग और सैनिक मारे गए। अब भारतीय सेना और पुलिस जवान जान पर खेल कर ड्यूटी कर रहे है,जबकि रुबिया स्वयं चेन्नई के एक अस्पताल में डाक्टर है और उसकी जिंदगी आराम से कट रही है।
1987 में इस्लामी नारीवादी के आधार पर कश्मीर में स्थापित अलगाववादी संगठन दुख़्तरान-ए-मिल्लत आतंकी संगठनों का सबसे मददगार माना जाता है। अपने को राष्ट्र की बेटियां बताने वाले इस संगठन की मुखिया आसिया अंद्राबी फिलहाल जेल में है,लेकिन उसने कश्मीर में जो आतंक का ताना बाना बुना है,उससे यह राज्य गृहयुद्द की कगार पर पहुंच गया था। यह संगठन खुले तौर पर जम्मू-कश्मीर को पाकिस्तान में मिलाने की बात करता था। अंद्राबी के खिलाफ पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस और पाकिस्तान के राष्ट्रीय दिवस क्रमश: 14 अगस्त और 23 मार्च को पाकिस्तानी झंडा फहराने सहित अन्य मामले दर्ज हैं। दुख़्तरान-ए-मिल्लत को कश्मीर में इस्लामी कानून लागू करने और भारत से अलग राष्ट्र बनाने के लिए काम करने वाला संगठन बताया जाता है। भारत सरकार इस संगठन को आतंकवादी घोषित कर चुका है। अंद्राबी मुख्य तौर पर नौजवानों को उकसाने का काम रही,वह बुरहान वानी और अफ़ज़ल गुरु को ब्वॉयज ऑफ शहादत यानी शहादत के लड़के’ क़रार देती रही। जेल जाने से पहले अंद्राबी ने घाटी की महिलाओं को आतंकवाद से जोड़ने में बड़ी भूमिका निभाई थी।
अंद्राबी के सम्पर्क में देश विदेश की कई लड़कियां थी जिनका माईंड वाश करके उन्हें आतंकी दलदल में धकेल दिया गया था। 2018 में पुलिस ने 28 साल की आयशा जान को 20 ग्रेनेड के साथ श्रीनगर के बाहरी इलाके लावापोरा से पकड़ा था। आयशा आतंकियों को हथियार व गोला-बारूद सप्लाई करती थी और उसके पास से खतरनाक हथियार बरामद भी हुए थे ।2018 में ही गणतंत्र दिवस को निशाना बनाने की साजिश रचने वाली सादिया को दक्षिण कश्मीर के बिजबेहरा गाँव के एक पेईंग गेस्ट से पकड़ा गया था। पुणे के यरवदा के प्रतिष्ठित घरोंदा सोसाइटी में अपने परिवार के साथ रहने वाली सादिया पर सुरक्षा एजेंसियां नजर रखे हुए थी। 2015 में महज 15 साल की सादिया महाराष्ट्र एटीएस के राडार पर आई जब उसने लगातार सोशल साईट पर आईएस से नजदीकियां बढ़ाना प्रारम्भ किया था। फेसबुक,ट्विटर,व्हाटसप्प और टेली ग्राम जैसी सोशल साईटों से जुड़कर सादिया आईएसआईएस में शामिल होना चाहती थी। उसके फेसबुक मित्रों में फिलीपींस,सऊदी अरब,केन्या,श्रीलंका और भारत के कई राज्यों के लोग शामिल थे। यहीं नहीं वह पश्चिम बंगाल के मेहंदी मंसूर बिश्वास के सम्पर्क में थी जिसें 2015 में बंगलौर पुलिस ने आईएस का ट्विटर अकाउंट चलाने के आरोप में गिरफ्तार किया था। सुरक्षा एजेंसियों का दावा है कि जुलाई 2017 में वह जम्मू कश्मीर के एक शख्स के सम्पर्क में आई जिससे वह शादी करके विदेश भागना चाहती थी। उसका इरादा सीरिया जाकर आईएसआईएस में शामिल होना था। सादिया को आईएस ने उससे सीरिया में मेडिकल कोर्स करवाने का भरोसा दिलाया था और इसके बाद भारत में इस्लामिक स्टेट के लिए काम करने को कहा था। माना यह भी जाता है कि वह दुख़्तरान-ए-मिल्लत की सहयोगी बनकर कश्मीर में आतंक का ताना बुन रही थी।
कश्मीर में चरमपंथ को सामाजिक कश्मीर घाटी की की सबसे मजबूत समझी जानी वाली राजनीतिक पार्टी पीडीपी की मुखिया महबूबा मुफ़्ती चरमपंथियों का समर्थन करती रही है। वह राजनीतिक सभाओं में राजनीतिक कैदियों को रिहा करने,सभी उग्रवादियों से वार्ता करने और आतंकवादियों के लिए कहर बने स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप को बंद करने की वकालत करती है। वे अनुच्छेद 370 के पक्ष में बेहद मुखर रही है। अपने स्वायत्तता प्रेम के कारण घाटी के अलगाववादियों एकमात्र पसंद महबूबा ही है। आतंक के खास केंद्र दक्षिणी कश्मीर में अब भी पीडीपी का सिक्का चलता है। राज्य की मुख्यमंत्री रहते महबूबा ने 2017 में उनके कार्यकाल में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के प्रचार में कुख्यात आतंकी संगठन दुख्तरान-ए-मिल्लत की अलगाववादी नेता आसिया अंद्राबी को जम्मू-कश्मीर का महिला रोल मॉडल के तौर पर पोस्टर पर जगह दी गई थी। पोस्टर में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी,मदर टेरेसा,किरण बेदी,लता मंगेशकर,सानिया मिर्जा,महबूबा मुफ्ती,कल्पना चावला आदि की भी तस्वीरें लगाई गई थी। सामाजिक कल्याण मंत्रालय के इस कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री महबूबा के भाई तसादुक मुफ्ती समेत दर्जनों अधिकारी और मंत्री उपस्थित थे।
इस खूबसूरत वादी को टूरिज्म से टेरेरिज्म की ओर धकेलने की गहरी साजिशों को परवान चढ़ाने में यहां की महिलाएं खूब मददगार रही है। पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी यह बखूबी जानती है की लोकतांत्रिक भारत में महिलाओं पर नजर रखना और उनकी जांच पड़ताल करना आसान नहीं है। 2019 में अनुच्छेद 370 के खात्मे के बाद कश्मीर शांति की और तेजी से बढ़ रहा है। इससे हतोत्साहित होकर पाकिस्तान परस्त आतंकी संगठन डॉ. शाहीन जैसी महिलाओं के बूते फिर से आतंकी साजिशों को अंजाम देने की कोशिशों में है।
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भारत मे आतंकवाद
महिलाओं की आतंकी चालों से अभिशिप्त कश्मीर
- by brahmadeep alune
- November 15, 2025
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