#ब्रह्मदीप अलूने
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भारत की आर्थिक कूटनीति बनाम पाकिस्तान की रक्षा कूटनीति

प्रजातंत्र अंतरराष्ट्रीय राजनीति में शक्ति का स्वरूप बदल रहा है और उसके साथ कूटनीति के औजार भी बदल रहे हैं। आज किसी राष्ट्र का प्रभाव उसकी सीमाओं पर तैनात सैनिकों और हथियारों से आगे बढ़कर उसकी आर्थिक क्षमता, बाजार, तकनीक, निवेश, ऊर्जा संसाधनों, वैश्विक आपूर्ति तंत्र और रणनीतिक साझेदारियों से तय होता है। भारत ने […]

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आरक्षण से बचने का पूंजीवादी रास्ता

आरक्षण से बचने का पूंजीवादी रास्ता देश में आरक्षण समाप्त करने या उसे आर्थिक आधार पर लागू करने की मांग को लेकर एक बार फिर प्रदर्शन तेज हो रहे हैं। युवाओं का एक वर्ग मानता है कि सरकारी नौकरियों में आरक्षण की व्यवस्था खत्म होनी चाहिए और चयन का आधार आर्थिक स्थिति या योग्यता होना […]

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सीआईए और रूसी एजेंसी के दो देशों में तख्तापलट के ‘सीक्रेट मिशन’ से खलबली.

    वेबदुनिया  ख़ुफ़िया एजेंसियां अपने राष्ट्र के दूरगामी हितों के लिए दोस्तों का भी बलिदान कर सकती है। ट्रम्प और पुतिन के दोस्ताना रिश्तों के बारे में दुनिया जानती है। ट्रम्प ईरान युद्द को जीतकर चुनाव जितना चाहते है वहीं पुतिन भी यूक्रेन को लेकर कुछ ऐसे ही मंसूबे पाले हुए है। यदि ईरान में […]

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दिल्ली का निमंत्रण और ढाका का संशय         

जनसत्ता अविश्वास की कूटनीति के बूते पड़ोसियों से अच्छे संबंध कायम नहीं किए जा सकते। तारिक रहमान की भारत नीति को लेकर सबसे बड़ी चिंता यही है कि वे नई दिल्ली को एक संभावित साझेदार से अधिक एक संशय की दृष्टि से देख रहे हैं। बांग्लादेश से सकारात्मक संबंधों की राजनयिक कोशिशों की दिशा में […]

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बांग्लादेश को लेकर कैसी हो भारत की कूटनीति

     नवभारत विदेश नीति का सबसे अहम गुण राष्ट्रीय हितों की रक्षा करते हुए बदलती अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के अनुसार स्वयं को ढालने की क्षमता होना चाहिए। इसे रणनीतिक लचीलापन कहा जा सकता है। बांग्लादेश के संदर्भ में आज भारत की विदेश नीति इसी कसौटी पर खड़ी है। ढाका में राजनीतिक सत्ता के बदलते समीकरणों ने […]

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ब्रिक्स से दूरी बांग्लादेश को पड़ेगी भारी

 वेबदुनिया             अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में अवसरों को पहचानना भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना। विकासशील देशों के लिए बड़े बहुपक्षीय मंच केवल औपचारिक सम्मेलन नहीं होते, बल्कि वे निवेश,व्यापार, तकनीक,ऊर्जा और वैश्विक राजनीतिक स्वीकार्यता के नए रास्ते खोलते हैं। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना […]

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तुर्की,पाकिस्तान,सऊदी अरब-तीन देश, तीन स्वार्थ, एक गठबंधन  

   जनसत्ता  बहुस्तरीय गठबंधन अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को प्रभावित करने की क्षमता तो रखते है,लेकिन उनका प्रभाव तभी दीर्घकालीन होता है,जब उनके पीछे साझा रणनीतिक दृष्टि,पारदर्शिता,प्रतिबद्धता और स्थायी हित हो। केवल तात्कालिक स्वार्थों पर आधारित गठबंधन अक्सर बदलती परिस्थितियों के साथ कमजोर पड़ जाते है। मक्का में तुर्की, पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हुआ  संयुक्त […]

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article गांधी है तो भारत है

पूंजीवाद और समाजवाद के अंतर्द्वंद की आज़ादी

         सुबह सवेरे संविधान सभा के भीतर पूंजीवाद, निजी संपत्ति और आर्थिक असमानता को लेकर गहरी आशंकाएं थी। 1947 में स्वतंत्र हुआ भारत अत्यंत गरीब, असमान और कृषि-प्रधान समाज था। औपनिवेशिक शासन ने व्यापक गरीबी, बेरोजगारी, सामंती भूमि संबंध और आर्थिक विषमता छोड़ी थी। संविधान निर्माताओं के सामने सवाल था कि राजनीतिक स्वतंत्रता को सामाजिक […]

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इस्लामिक देश बनने की राह पर है स्पेन

 नवभारत टाइम्स                   लगभग आठ शताब्दियों तक मुस्लिम शासन के अधीन रहे यूरोप के एकमात्र देश रहे स्पेन की भौगोलिक स्थिति, सरकार की उदार अप्रवासन नीतियां और मुस्लिम शरणार्थियों की इस देश में बस जाने की बैचेनी अब यूरोप को आतंकित कर रही है। स्पेन के एक सीमावर्ती शहर सेउटा से भागती हुई शरणार्थियों की भीड़ […]

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उत्तर कोरिया,चीन और रूस ने बदल दिया ईरान का सैन्य भूगोल

नवभारत जॉर्डन में अल-अज़राक एयरबेस, प्रिंस हसन एयरबेस, किंग फैसल एयरबेस और अल-सफावी बेस जैसे अमेरिकी और अन्य रणनीतिक सैन्य ठिकानों पर ईरान के हमलों ने स्पष्ट कर दिया है कि ईरान अब केवल मिसाइलों या ड्रोन के सीमित उपयोग तक ही नहीं रुका है, बल्कि वह अपने सैन्य अभियानों में बहुस्तरीय और समन्वित रणनीतियों […]

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