राष्ट्रीय सहारा,हस्तक्षेप
चुनिंदा लोगों को चुनने की प्रक्रिया एक असमानता-जनक मॉडल बन जाती है, जो सामाजिक और राजनीतिक एकता को बाधित करती है तथा संकीर्णता और हिंसा को बढ़ावा देती है। इसलिए कई बहुराष्ट्रीय कंपनियां अपने कर्मचारियों की नस्लीय और जातीय विविधता के आंकड़े सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करती हैं। यूरोप एक ऐसा महाद्वीप है जहां सामाजिक न्याय,मानवाधिकार और समावेशन को लेकर निरंतर बहस होती रही है। खासकर विविधता,नस्लीय असमानता और प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दों पर यूरोप ने एक सतर्क और जागरूक रवैया अपनाया है। यह बहस केवल राजनीतिक गलियारों तक सीमित नहीं रही,बल्कि कॉर्पोरेट, शैक्षणिक और सामाजिक स्तर पर भी सक्रिय रूप से सामने आई है।\






Leave feedback about this