नवभारत टाइम्स
एमआई 5 ब्रिटेन की आंतरिक सुरक्षा और खुफिया एजेंसी है। इसका मुख्य काम ब्रिटेन की राष्ट्रीय सुरक्षा को आतंकवाद और अन्य खतरों से बचाना है,जिसमें जासूसी और गंभीर अपराधों से निपटना भी शामिल है। उसके एक अध्ययन में चौंकाने वाले खुलासे सामने आएं। दरअसल एमआई 5 ने बताया की पश्चिमी ख़ुफ़िया एजेंसियों द्वारा नाकाम की गईं अस्सी फीसदी साज़िशों में हिंसक जिहादी विचारधारा से प्रेरित लोग शामिल थे जिनका मध्य पूर्व में इसके नेतृत्व से कोई संपर्क नहीं था। यूरोप और अमेरिका में ख़ुफ़िया एजेंसियां मध्यपूर्व या पाकिस्तान से आने वाले लोगों पर नजर रखती है और उनकी प्रोफाइल खंगालती रहती है। लेकिन ये ख़ुफ़िया एजेंसियां आम लोगों के मनोविज्ञान का पता लगाने में बुरी तरह नाकामयाब रही है।
मसलन हमास,फिलिस्तीनी आतंकी संगठन है। अमेरिका में मार्च फॉर फिलिस्तीन का समर्थन करने लाखों लोग जुटे जिसमें फ़िलिस्तीनी युवा आंदोलन,द पीपल्स फ़ोरम,एएनएसडब्ल्यूईआर गठबंधन,अमेरिकन मुस्लिम्स फ़ॉर फ़िलिस्तीन,यूएस काउंसिल ऑफ़ मुस्लिम ऑर्गनाइज़ेशन्स,यूएस फ़िलिस्तीनी कम्युनिटी नेटवर्क,यूएस कैंपेन फ़ॉर फ़िलिस्तीनी राइट्स,फ़िलिस्तीनी फ़ेमिनिस्ट कलेक्टिव, एआरओसी एक्शन, डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट्स ऑफ़ अमेरिका और अल-अवदा जैसे संगठन शामिल रहे। इसमें कहीं भी हमास का विरोध नहीं दिखाई दिया। ऐसे प्रदर्शन लन्दन,मेड्रिड,पेरिस और म्यूनिख तक देखे गए।इस्लामिक स्टेट की मगरमच्छ स्लीपर सेल को लेकर अमेरिका और यूरोप बहुत आशंकित रहा है। श्रीलंका में 2019 में हुए सीरियल बम ब्लास्ट में शामिल आत्मघाती हमलावरों में से एक अब्दुल लतीफ जमील मोहम्मद ने ब्रिटेन में पढाई की थी। उसके ब्रिटेन स्थित कई चरमपंथी संगठनों से सम्बन्ध थे और यह तथ्य सामने आये की वह ब्रिटेन में ही प्रशिक्षित हुआ था। ब्रिटिश ख़ुफ़िया एजेंसी एमआई 5 स्लीपर सेल से जुड़े संभावित समूहों का पता लगाने और उन्हें नष्ट करने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही हैं। इस्लामिक स्टेट ने ग्रेट ब्रिटेन में ऐसे नेटवर्क स्थापित किए हैं जिनसे ब्रिटेन में युवा मन में कट्टरपंथ और कट्टरपंथ का प्रसार हो सकता है। दाएश जिसे आईएसआईएस के नाम से भी जाना जाता है एक वैश्विक आतंकवादी समूह है जो अपनी हिंसक विचारधारा और आतंकवादी लड़ाकों के नेटवर्क के ज़रिए दुनिया के लिए ख़तरा पैदा करता है। ब्रिटेन,दाएश के ख़िलाफ़ वैश्विक गठबंधन में सबसे आगे है।
जर्मनी के मैड्रिड के एक विश्वविद्यालय के अध्ययन में यह सामने आया है की यूरोपीय देशों में आईएसआईएस की भर्ती तीन मुख्य स्तंभों पर आधारित उन्नत प्रचार और प्रचार पर निर्भर है। पहला, अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने वाले नए लोगों को ढूंढना। दूसरा, नए लोगों की निगरानी करना और उनसे संवाद करने का प्रयास करना। तथा तीसरा,उनका ब्रेनवॉश करना और उन्हें आईएसआईएस की विचारधाराओं और सिद्धांतों के बारे में समझाना। इसके बाद फिर उन्हें ऐसे चरमपंथियों में बदल देना जो आदेश पर बेझिझक काम करने के लिए तैयार हों। हाल के वर्षों में एक भयावह,खतरनाक नया युग सामने आया है जिसमें बच्चों को नफरत करना सिखाया जा रहा है। वे बच्चों,किशोरों और युवाओं की भर्ती कर रहे हैं और आतंकवादी हमलों की साजिश रच रहे हैं। आतंकवादी समूह आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफार्मों और सुरक्षित ऐप्स का उपयोग कर रहे है तथा निर्दोष युवाओं को आतंकवादी गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु बैठकें भी आयोजित कर रहे है। ऑनलाइन कट्टरपंथ को बढ़ावा देना आतंकी संगठनों के लिए आसान हो गया है। जब कट्टरपंथ पूजा स्थलों में नहीं,बल्कि बैठक कक्ष में होता है और जब आतंकवादी गतिविधियों के लिए जटिल योजना की आवश्यकता नहीं रह जाती और इसमें युवाओं को भी सक्रिय रूप से भाग लेने का अवसर मिलता है।मध्य पूर्व,मध्य एशिया और उप-सहारा अफ्रीका के विभिन्न क्षेत्रों में आतंकवादी समूहों के प्रसार और नियंत्रण ने उन्हें कुछ पश्चिमी देशों में स्लीपर सेल और अंतर्संबंधों का एक नेटवर्क बनाने में मदद की है। ये समूह कुछ प्रमुख यूरोपीय देशों में फैल गए और वहाँ संगठित अपराध समूहों से जुड़ी संस्थाओं और व्यक्तियों के साथ सहयोग करने में कामयाब रहे है। आतंकवादियों की भर्ती के मुख्य प्लेटफार्मों में से एक ट्विटर,फेसबुक,यूट्यूब, टेलीग्राम और कई अन्य हैं। ये सोशल नेटवर्क आतंकवादियों के लिए हथियार के रूप में काम करते रहे हैं। मुसलमानों पर अत्याचारों की कपोल कल्पित कथाओं को सुनाकर दुष्प्रचार करना और फिर गुमराह नौजवानों की ऑनलाइन भर्ती कर लेना,आतंकी संगठनों के लिए बेहद आसान है,जबकि सुरक्षा एजेंसियों द्वारा इन्हें पूरी तरह रोक देना संभव नहीं है। दिल्ली में हुए बम विस्फोट में पढ़े लिखे नौजवानों का शामिल होना संयोग नहीं बल्कि आतंक के बढ़ते वैश्विक खतरें का ही एक रूप है।
दुनिया भर में बढ़ते आतंकी हमलों में पाकिस्तान के मदरसों की भी भूमिका सामने आती रही है। पाकिस्तान के मदरसे आतंकी हाफिज सईद,मुल्ला उमर और मौलाना मसूद अजहर की तकरीरों पर भरोसा करते है,जिससें वहां शिक्षा प्राप्त करने वाले धर्मान्ध होकर अपनी जान पर खेलने को आमादा रहते है हाफिज सईद जैसे धर्मगुरु समाज पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर मदरसों को आधुनिक शिक्षा से महरूम कर रहे है। आतंकी विचारधारा के प्रसार के लिए मस्जिद नेटवर्क,पैसे के लिए हवाला नेटवर्क,इस्लामी धर्मार्थ संस्थान और आधुनिकतम हथियारों से लैस आतंकी प्रशिक्षण केन्द्रों का जाल पाकिस्तान में है और इससे आतंकी हमलों का खतरा पूरी दुनिया में बढ़ा है। पिछले दो तीन दशकों में आतंकी हमलों के तार पाकिस्तान से जुड़ते रहे है और हमलावरों ने पाक के मदरसों में ही शिक्षा पाई है। मुंबई हमलों के आतंकी पाक मदरसों से ही निकले थे। इस्ताम्बुल के यहूदी उपासना गृह में हमले के बाद वहां पर पाकिस्तान का पासपोर्ट मिला था। कनाडा ने दर्जनों संदिग्ध बताएं है जिन्हें पाक में ट्रेनिंग मिली है। चीन साफ कर चूका है की झिनजियांग प्रान्त में मुस्लिम चरमपंथियों के उभरने का कारण पाक के मदरसे है। मलेशिया और इंडोनेशिया इस बात से डरे हुए है की पाक मदरसों से निकलने वाले उनके नागरिक खतरनाक आतंकी वारदातों को अंजाम दे सकते है। उगांडा सरकार ने पाक के मदरसों में पढ़ने आने वाले अपने नागरिकों के प्रति गहरी चिंता जताई है। यहीं नहीं ब्रिटेन,अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे अनेक देश पाकिस्तानी नागरिकों को वीजा देने में खास एहतियात बरतते रहे है।
दिल्ली आतंकी मॉड्यूल में शामिल महिला डॉ. शाहीन शाहिद का संबंध भी पाकिस्तान और मौलाना मसूद अजहर से सामने आ रहा है। लखनऊ की डॉ.शाहीन शाहिद जैश-ए-मोहम्मद की महिला विंग चला रही थी। भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जैश-ए-मोहम्मद के मुख्यालय को निशाना बनाया था,जिसमें मसूद अज़हर के कुछ नज़दीकी रिश्तेदारों की मौत हुई थी। इसके बाद मसूद अज़हर ने भारत से बदला लेने की कसम खाई थी। जैश-ए-मोहम्मद की स्लीपर सेल भारत के विभिन्न क्षेत्रों में कट्टरपंथी तत्वों पर नजर रखती है,पढ़े लिखे नौजवानों को भ्रमित करके आतंकी हमलों के लिए तैयार करती है। दिल्ली में हुए हमलें के तार उच्च शिक्षित युवाओं और जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ना संयोग नहीं,बल्कि गहरी साजिश का परिणाम है।
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भारत मे आतंकवाद
दुनिया के लिए चुनौती है आतंक की स्लीपर सेल की रोकना
- by brahmadeep alune
- November 15, 2025
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