आधुनिकता,अनुसंधान,शिक्षा और प्रगति से भरपूर है ईरान
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आधुनिकता,अनुसंधान,शिक्षा और प्रगति से भरपूर है ईरान

नवभारत

अमेरिका और इज़राइल के साथ जारी तनावपूर्ण हालात में ईरान की सामरिक क्षमता केवल उसकी सैन्य शक्ति का परिणाम नहीं है,बल्कि यह उसके मजबूत शैक्षिक ढांचे और वैज्ञानिक प्रगति का प्रतिफल भी है। दरअसल वैश्विक परिदृश्य में ईरान एक ऐसा इस्लामिक राष्ट्र है,जिसने  जटिल अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों,आर्थिक प्रतिबंधों और कूटनीतिक,रणनीतिक तथा राजनीतिक दबावों के बावजूद शिक्षा,स्वास्थ्य,विज्ञान और तकनीकी विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। खाड़ी के कई इस्लामिक देश अभी भी तेल आधारित अर्थव्यवस्था और सीमित सामाजिक विकास के दायरे में संघर्ष कर रहे है,वहीं ईरान ने आत्मनिर्भरता,शिक्षा,तकनीक और वैज्ञानिक अनुसंधान के माध्यम से एक अलग पहचान बनाई है।

ईरान की प्रगति का सबसे मजबूत आधार उसकी शिक्षा प्रणाली है। देश की साक्षरता दर करीब 85 फीसदी से अधिक है,जो कई इस्लामिक देशों की तुलना में काफी अधिक है। दुनिया में ईरान की छवि जो प्रस्तुत की जाती हो लेकिन ईरान की महिलाएं शिक्षा से लेकर हर क्षेत्र में बहुत आगे है। विश्वविद्यालयों में साठ फीसदी से अधिक छात्राएं होना इस बात का संकेत है कि शिक्षा के क्षेत्र में लैंगिक भागीदारी मजबूत हुई है। पश्चिमी दुनिया,1979 की इस्लामिक क्रांति के पहले के ईरान को आधुनिक और प्रगतिवादी बताता है,जबकि 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद अपनाई गई नीतियों से भी शिक्षा में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल हुई है,जिसमें सार्वभौमिक प्राथमिक शिक्षा और तकनीकी आत्मनिर्भरता को प्राथमिकता दी गई। प्राथमिक शिक्षा को अनिवार्य और मुफ्त बनाकर सरकार ने शिक्षा को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाने का प्रयास किया। उच्च शिक्षा में विज्ञान और इंजीनियरिंग विषयों पर विशेष जोर दिया गया है। विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों में निवेश बढ़ाया गया है,जिससे देश में वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की एक मजबूत पीढ़ी तैयार हुई है। इस्लामिक देशों में साक्षरता और उच्च शिक्षा के स्तर के मामले में ईरान अग्रणी देशों में गिना जाता है।

सरकारी निवेश ने भी इस विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ईरान अपने सकल घरेलू उत्पाद का लगभग पांच फीसदी शिक्षा पर खर्च करता है,जिससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में शिक्षा के विस्तार को बल मिला है। शिक्षा की गुणवत्ता की व्यापक पहुंच ने एक मजबूत मानव संसाधन तैयार किया है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में ईरान की उपलब्धियां उल्लेखनीय हैं। अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बावजूद,ईरान ने परमाणु ऊर्जा,मिसाइल तकनीक,नैनो टेक्नोलॉजी,बायोटेक्नोलॉजी और चिकित्सा विज्ञान में महत्वपूर्ण प्रगति की है। पिछले ढाई दशकों में ईरानी वैज्ञानिकों द्वारा लगभग पांच लाख शोधपत्र प्रकाशित किए गए हैं,जिससे ईरान वैश्विक वैज्ञानिक उत्पादन में लगभग पौने तीन फीसदी योगदान देने वाला देश बन गया है। यह वृद्धि दर वैश्विक औसत से कहीं अधिक तेज रही है,जो ईरान की वैज्ञानिक क्षमता और अनुसंधान संस्कृति को दर्शाती है। यह भी दिलचस्प है की ईरान के शोध कार्यों में अमेरिका,कनाडा और यूनाइटेड किंगडम जैसे देशों के वैज्ञानिक सहभागी रहे है जो यह दर्शाता है की राजनीतिक तनाव के बावजूद शैक्षणिक और वैज्ञानिक स्तर पर ईरान की प्रतिभाओं को व्यापक स्वीकार्यता हासिल है और उनसे सहयोग जारी है। इसी प्रकार इंजीनियरिंग,चिकित्सा और विज्ञान  के कई क्षेत्रों क्षेत्रों में ईरान ने विशेष उपलब्धियां हासिल की है।

इस समय ईरान में आधुनिकता और परंपरा का एक अनूठा मिश्रण देखने को मिलता है। 20वीं सदी के प्रारंभ में रजा शाह पहलवी के शासनकाल में आधुनिकीकरण की शुरुआत हुई थी,जिसका उद्देश्य पश्चिमीकरण और औद्योगीकरण था। हालांकि 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद यह प्रक्रिया पूरी तरह बदली और देश ने पश्चिमी मॉडल से हटकर स्वदेशी विकास और इस्लामी मूल्यों के साथ आधुनिकता को अपनाने का प्रयास किया। आज ईरान एक ऐसा समाज है,जहां अत्याधुनिक तकनीक और पारंपरिक धार्मिक मान्यताएं साथ-साथ चलती हैं। ईरान के आधुनिकीकरण की जड़ें उन्नसवीं सदी में अब्बास मिर्ज़ा,ग़ैम मघम फ़राहानी और अमीर कबीर जैसे सुधारकों के प्रयासों में देखी जा सकती हैं। इन नेताओं ने सैन्य,प्रशासनिक और शैक्षिक सुधारों के माध्यम से देश को आधुनिक बनाने की दिशा में कदम उठाएं थे। पहलवी काल में इस प्रक्रिया को गति मिली,लेकिन इस्लामी क्रांति के बाद इसे एक नई वैचारिक दिशा मिली। ईरान की प्रगति के साथ कई अंतर्विरोध भी जुड़े हुए हैं। एक ओर जहां शिक्षा, तकनीक और शहरी जीवन में आधुनिकता दिखाई देती है,वहीं दूसरी ओर सामाजिक और सांस्कृतिक स्तर पर पारंपरिक और धार्मिक मूल्यों का गहरा प्रभाव बना हुआ है। महिला अधिकारों,हिजाब और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसे मुद्दों पर समाज में निरंतर बहस और संघर्ष देखने को मिलता है। ईरान में लोकतांत्रिक संस्थाओं और नागरिक स्वतंत्रताओं को लेकर भी प्रश्न उठते रहे हैं। संवैधानिक लोकतंत्र और जनता की आकांक्षाओं के बीच संतुलन स्थापित करना अब भी एक चुनौती बना हुआ है। एक सदी से अधिक समय से चल रहे सुधार प्रयासों के बावजूद,कानून के शासन,स्वतंत्रता और लोकतंत्र की पूर्ण स्थापना अभी भी अधूरी मानी जाती है। लेकिन  कुछ राजनीतिक विरोधाभासों के बाद भी ईरान के लोगों ने अभूतपूर्व प्रगति की है।   जनसांख्यिकीय परिवर्तन भी ईरान की प्रगति का एक महत्वपूर्ण पहलू है। पिछले कुछ दशकों में देश ने जनसंख्या वृद्धि दर को नियंत्रित करने में सफलता हासिल की है। महिलाओं की शिक्षा और जागरूकता के कारण प्रजनन दर में तेजी से गिरावट आई है। यह परिवर्तन सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

खामनेई की धार्मिक सत्ता ने ईरान की अर्थव्यवस्था में भी विविधता लाने के निरंतर प्रयास किए। तेल और गैस पर निर्भरता को कम करने के लिए विनिर्माण,कृषि और सेवा क्षेत्रों को विकसित किया गया है। हालांकि प्रतिबंधों के कारण आर्थिक चुनौतियां बनी हुई है लेकिन आत्मनिर्भरता की नीति ने देश को स्थिर बनाए रखने में मदद की है। ईरान की प्रगति का सबसे महत्वपूर्ण आधार उसकी प्रतिरोध अर्थव्यवस्था की नीति है। वर्षों से अमेरिका और पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों ने ईरान की अर्थव्यवस्था को झकझोरने की कोशिश की,लेकिन ईरान ने इसे अवसर में बदलने का प्रयास किया। उसने आयात पर निर्भरता कम करते हुए घरेलू उत्पादन को बढ़ावा दिया। कृषि,लघु उद्योग और विनिर्माण क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए। इसका परिणाम यह हुआ कि प्रतिबंधों के बावजूद ईरान की अर्थव्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त नहीं हुई बल्कि उसने एक वैकल्पिक मार्ग खोज लिया। बाहरी दबावों के बावजूद,देश ने घरेलू उत्पादन,नवाचार और स्थानीय संसाधनों के उपयोग पर जोर दिया है। इससे आर्थिक स्थिरता बनी रही  तथा एक मजबूत वैज्ञानिक और औद्योगिक आधार भी तैयार  हो गया। परमाणु ऊर्जा,अंतरिक्ष अनुसंधान और चिकित्सा विज्ञान में ईरान ने उल्लेखनीय प्रगति की है। ईरान का परमाणु कार्यक्रम,चाहे वह विवादों में रहा हो,लेकिन इसने देश की वैज्ञानिक क्षमता और तकनीकी आत्मनिर्भरता को साबित किया है। कोविड-19 महामारी के दौरान ईरान ने स्वदेशी वैक्सीन विकसित कर अपनी वैज्ञानिक क्षमता का प्रदर्शन किया था।

ईरान की प्रगति एक जटिल लेकिन प्रेरणादायक कहानी प्रस्तुत करती है। यह एक ऐसा मॉडल है,जिसमें शिक्षा,विज्ञान,आत्मनिर्भरता और सांस्कृतिक पहचान का संतुलन देखने को मिलता है। दुनिया और इस्लामिक देशों के लिए यह एक महत्वपूर्ण उदाहरण है कि यदि नीतियों में स्पष्टता और समाज में शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता हो तो सीमित संसाधनों और विपरीत परिस्थितियों में भी विकास संभव है। ईरान के बारे में वैश्विक स्तर पर जो छवि प्रस्तुत की जाती है,वह अक्सर राजनीतिक तनाव,प्रतिबंधों और विवादों तक सीमित रह जाती है।  इस कारण इस देश की सकारात्मक उपलब्धियां और सामाजिक-वैज्ञानिक प्रगति व्यापक चर्चा से बाहर रह जाती है। लेकिन यदि हम तथ्यों और जमीनी हकीकत पर नजर डालें,तो साफ दिखता है कि ईरान एक ऐसा राष्ट्र है,जो प्रतिभा,ज्ञान और आत्मनिर्भरता के आधार पर निरंतर आगे बढ़ रहा है। उच्च शिक्षा में व्यापक भागीदारी,युवाओं और महिलाओं की सक्रिय भूमिका ईरान के ज्ञान-आधारित विकास को मजबूती देती है।  जाहिर है ईरान की सामरिक क्षमता केवल हथियारों तक सीमित नहीं है, बल्कि उसके पीछे एक व्यापक वैज्ञानिक दृष्टिकोण और दीर्घकालिक शैक्षिक निवेश कार्य कर रहा है,जिसने उसे वैश्विक मंच पर एक सक्षम और आत्मनिर्भर राष्ट्र के रूप में स्थापित किया है।

पिछले कुछ दशकों में ईरान ने शिक्षा,अनुसंधान और तकनीकी विकास पर निरंतर निवेश किया है,जिससे एक सक्षम और प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार हुआ है। यही मानव पूंजी आज रक्षा,अंतरिक्ष,साइबर तकनीक और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में देश को आत्मनिर्भर बना रही है। इन सबके बीच ईरान  को राजनीतिक  व्यवस्था में बदलाव,सामाजिक स्वतंत्रताओं के विस्तार और आर्थिक स्थिरता के लिए निरंतर प्रयास करने होंगे। यदि ईरान इन चुनौतियों का समाधान कर लेता है,तो वह न केवल इस्लामिक दुनिया में,बल्कि वैश्विक स्तर पर भी एक सशक्त और संतुलित विकास मॉडल के रूप में उभर सकता है। ईरान को अपनी कूटनीति में संतुलित और व्यावहारिक सुधार करने की आवश्यकता है जिससे वह अपने पड़ोसी देशों के साथ भरोसेमंद और स्थायी संबंध स्थापित कर सके। क्षेत्रीय सहयोग,व्यापार और सुरक्षा संवाद को बढ़ावा देकर वह अपनी छवि को सकारात्मक बना सकता है। इसके साथ ही यदि ईरान विवादास्पद समूहों या आतंकी संगठनों से दूरी बनाकर पारदर्शी नीति अपनाता है,तो अंतरराष्ट्रीय समुदाय का विश्वास भी मजबूत होगा। इस दिशा में  उठाएं गए कदम न केवल उसे कूटनीतिक अलगाव से बाहर ला सकते है,बल्कि आर्थिक निवेश,सहयोग और वैश्विक स्वीकार्यता के नए अवसर भी प्रदान कर सकते है।

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