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आदिवासी अभिवादन में क्यों कहते है राम राम…..

लोकदेश   भारतीय सभ्यता और संस्कृति में वन तप,त्याग,ध्यान,साधना और आध्यात्मिक यात्रा का प्रतीक है। भारत के धार्मिक ग्रंथों में वन का अत्यधिक महत्व है। रामायण में भगवान श्री राम का वनवास एक महत्वपूर्ण घटना है जो हमें जीवन के सिद्धांतों,आदर्शों,मूल्यों,समर्पण,त्याग और धर्म की महत्ता को सिखाती है। इसी तरह वेदों और उपनिषदों में भी वनों […]

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मैक मोहन रेखा तय करेगी चीन से संबंधों का भविष्य

      राष्ट्रीय सहारा,हस्तक्षेप   अक्टूबर 1913 से जुलाई 1914 के बीच शिमला में आयोजित एक सम्मेलन ने ब्रिटिश जनरल सर हेनरी मैकमोहन के नेतृत्व में तिब्बत और ब्रिटिश भारत के बीच एक सीमा तैयार की। सीमा में असम शामिल है जो पूर्वी भूटान का एक पार्श्व भाग है जो हिमालय की चोटियों के साथ लगभग 890 […]

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भारत मे आतंकवाद

आतंक की स्लीपर सेल

राष्ट्रीय सहारा,हस्तक्षेप आतंकवादी हमलों की धमकी और अफवाह से निपटने के लिए एक समग्र और  बहुआयामी दृष्टिकोण से युक्त सुरक्षा तंत्र को विकसित करने की कोशिशों के बीच आंतरिक सुरक्षा को लेकर अंदेशों का बढ़ना नये खतरों के संकेत दे रहा है। पिछले कुछ महीनों में देश के अलग अलग क्षेत्रों,हवाई जहाज़ और ट्रेनों पर […]

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भारत चीन संबंधों का भविष्य

जनसत्ता  भारत और चीन के बीच सैन्य गतिरोध एक संवेदनशील मुद्दा है।  दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक,आर्थिक और राजनीतिक संबंध हैं,वहीं सीमा विवाद और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा ने इन संबंधों को प्रभावित किया है। दोनों देशों में वार्ता के माध्यम से सीमा मुद्दों को सुलझाने की कोशिशें कई बार हुई है लेकिन ऐतिहासिक कारण और अलग […]

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  ब्रिक्स में अब पुतिनवाद

राष्ट्रीय सहारा अधिनायकवादी नेताओं की वैश्विक नीतियां उनके शासन के लक्ष्यों से प्रभावित होती हैं। वे अपने लिए रणनीतिक साझेदार ढूँढते हैं और  अक्सर उन देशों के साथ संबंध स्थापित करते हैं जो उनके विरोधियों के खिलाफ खड़े होते हैं। यह स्थिति उन्हें वैश्विक मंच पर अपनी स्थिति को मजबूत करने में मदद करती है। […]

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युद्ध भर नहीं,मानवता के लिए गहरा संकट

राष्ट्रीय सहारा,हस्तक्षेप   युद्ध के उद्देश्य स्पष्ट होना चाहिए लेकिन पश्चिम एशिया में ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। यहां क्षेत्रीय प्रभुत्व,सामरिक प्रतिद्वंदिता,राजनीतिक और आर्थिक हितों की अनुकूलता या प्रतिकूलता अलग अलग तरीके से प्रतिद्वंदिता के कई मोर्चों का निर्माण करती है। यही कारण है की पिछले कई दशकों से पश्चिम एशिया अस्थिरता और संघर्षों से […]

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कहीं बेहतर है गुटनिरपेक्षता

राष्ट्रीय सहारा,हस्तक्षेप                                                       सुरक्षा परिषद में स्थाई सदस्यता को लेकर भारत का मानना है कि उसे दुनिया के सबसे बड़े लोकतान्त्रिक देश होने के नाते वैश्विक मंच पर अपनी आवाज […]

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बापू के देशी विकास पर आधारित मॉडल गांव

हमारे जीवन में संवाद का बड़ा महत्व है। यह व्यक्तिगत,सामाजिक और सामुदायिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बापू पूरे भारत को पैदल ही नाप लिए थे। वे भाषण से ज्यादा संवाद पर भरोसा करते थे। वे मानते थे कि संवाद अच्छे संबंधों के निर्माण में मदद करता है,लोगों के बीच विश्वास और समझ को […]

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विकसित देशों में भी एक साथ चुनाव किसी चुनौती से कम नहीं..

राष्ट्रीय सहारा,हस्तक्षेप चुनावी खर्च को नियंत्रित करने के लिए कई देशों में नियम और कानून होते हैं, जिससे चुनावी प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी बनी रहे। एक देश एक चुनाव की प्रक्रिया को समय,लागत, राजनीतिक स्थिरता,भागीदारी और प्रभावी प्रबंधन की दृष्टि से बेहतर माना जाता है। हालांकि इसे लागू करना आसान नहीं है और विकसित देश […]

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हिज़्बुल्लाह से जंग आसान नहीं

राष्ट्रीय सहारा पश्चिमी एशिया का संकट एक जटिल और दीर्घकालिक समस्या है,जो युद्द भी भयवाहता की आशंका को निरंतर बनाएं रखती है। इसके केंद्र में इज़राइल और फिलिस्तीनियों के बीच भूमि के अधिकार और स्वायत्तता का विवाद की खास भूमिका है और इस्लामिक दुनिया के नेतृत्व की लड़ाई ने इसे बेहद खतरनाक बना दिया है। […]

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