#आंबेडकर
article गांधी है तो भारत है

कमतर क्यों है दलित आदिवासी नेतृत्व

सुबह सवेरे बिहार,यूपी,ओडिशा,झारखंड और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में दलित और आदिवासी वोट बैंक निर्णायक है। इन राज्यों की विधानसभाओं और लोकसभा से आरक्षित सीटों के माध्यम से कई नेता सामने आते है। डॉ.भीमराव आंबेडकर ने दलितों और आदिवासियों को संसद तथा विधानसभाओं में आरक्षण इसलिए प्रदान किया क्योंकि ये समुदाय सदियों से सामाजिक,आर्थिक और राजनीतिक […]

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 दलित,आदिवासी सांसदों का रिपोर्ट कार्ड

प्रजातन्त्र -6 दिसम्वर-डॉ.आंबेडकर पुण्यतिथि रक्त,जाति,समुदाय और वर्ग की श्रेष्ठता से अभिशिप्त समाज में वंचितों की अस्मिता की रक्षा करने की चुनौती से जूझते बाबा साहब अंबेडकर राजनीतिक और संविधानिक अधिकारों से करोड़ों लोगों का आत्मविश्वास बढ़ाना चाहते थे। बाबा साहब का यह मानना था की  देश की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक संस्थाओं में विशेष अधिकार प्राप्त […]

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दिशाहीन दलित राजनीति

पॉलिटिक्स  लोकतांत्रिक भारत में समानता के मौलिक अधिकार के जरिए सामाजिक न्याय हासिल करने की कोशिशों में जुटे वंचित वर्गों की चुनौतियां कभी भी खत्म होती नहीं दिखाई पड़ती। भारत के राजनीतिक दलों पर हावी सामंती तंत्र बेहद खूबसूरती से इन वंचितों के मतदान के अधिकार का सम्मान करते हुए और उनकी सांविधानिक शक्तियों के […]

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