#कूटनीति
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अविश्वास की कूटनीति,कमजोर मध्यस्थ और वार्ता  नाकाम

सत्ता मेल अविश्वास की कूटनीति देशों को यह याद दिलाती है कि वे केवल अपने हितों पर निर्भर रहें। जब देशों को एक-दूसरे पर भरोसा नहीं होता,तो वे समझौते बहुत सोच-समझकर और स्पष्ट शर्तों के साथ करते है,जिससे भविष्य में धोखा मिलने की संभावना नहीं हो। 50 साल की कट्टर दुश्मनी को भूल कर किसी […]

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रूस पर निर्भरता

          दैनिक जागरण,राष्ट्रीय                    कम्युनिस्ट रूस और दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश भारत के आपसी मजबूत सम्बन्ध पश्चिम को हैरान और परेशान करते रहे है,यह समस्या दशकों पुरानी है। रूस के साथ सामरिक और आर्थिक संबंध मजबूत रहने से भारत पूंजीवादी दुनिया की महत्वाकांक्षी नीतियों के शिकंजे […]

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खुद की कूटनीति को नकारने का जोखिम….

राष्ट्रीय सहारा,हस्तक्षेप अंतरराष्ट्रीय राजनीति में दो धारी कूटनीति एक अत्यंत व्यावहारिक और प्रभावी उपकरण माना जाता है। विशेषकर तब जब कोई देश अपने हितों को बहुपक्षीय रूप से सुरक्षित करना चाहता है। यह नीति न केवल रणनीतिक लाभ दे सकती है,बल्कि विश्व मंच पर एक देश की स्थिति को भी मजबूत भी कर सकती है। […]

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सांस्कृतिक कूटनीति से मजबूत रणनीतिक और आर्थिक संबंधों के संदेश

राष्ट्रीय सहारा,हस्तक्षेप  लिथुआनिया यूरोप महाद्वीप के उत्तरी भाग में बाल्टिक सागर के किनारे स्थित एक देश है। यह तीन बाल्टिक देशों में से सबसे बड़ा है। भारत पूर्वी यूरोप में महत्त्वपूर्ण औद्योगिक क्षेत्रों के प्रवेश द्वार के रूप में लिथुआनिया की रणनीतिक स्थिति का लाभ उठाने की कूटनीतिक कोशिशें लगातार कर रहा है। भक्ति और […]

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धोखे की कूटनीति

राष्ट्रीय सहारा अमेरिका द्वारा प्रेरित युद्ध में यूक्रेन को एक मोहरे के तौर पर इस्तेमाल करने के बाद अब ट्रम्प ने पुतिन  पर भरोसा दिखाकर यूक्रेन को गहरी निराशा में धकेल दिया है। अमेरिका के भरोसे भू-राजनैतिक संघर्ष में बूरी तरह फंसा हुआ यूक्रेन बर्बाद हो चूका है और इसके गंभीर और विनाशकारी परिणाम उत्पन्न […]

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बांग्लादेशी अल्पसंख्यकों पर भारत की कूटनीति

राष्ट्रीय सहारा भारत की कूटनीति ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा करने के लिए कई प्रयास किए हैं,लेकिन इन प्रयासों में सफलता सीमित रही है। कई बार भारतीय दबाव ने असर नहीं दिखाया है क्योंकि बांग्लादेश के आंतरिक और कूटनीतिक समीकरण इसे प्रभावी तरीके से रोकने में अवरोध डालते हैं। भारत की ओर […]

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युद्दग्रस्त देश और भारतीय कूटनीति

जनसत्ता किसी भी राष्ट्र के राष्ट्रीय हित परिवर्तनशील हो सकते है,स्वाभाविक रूप से इसका प्रभाव वैदेशिक संबंधों पर भी दिखाई पड़ता है। भारत और रूस के बीच कूटनीतिक और सामरिक संबंधों की प्रतिबद्धता का सुनहरा इतिहास रहा है। रूस के धुर विरोधी देश यूक्रेन में भारत के प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी की यात्रा को संतुलन की […]

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