#चीन
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हिन्द-प्रशांत में भारत के लिए नए अवसर

जनसत्ता  रणनीतिक अवधारणाएं दीर्घकालीन राष्ट्रीय हितों और व्यापक भू-राजनीतिक दृष्टि पर आधारित होती हैं। हिन्द-प्रशांत की अवधारणा भी ऐसी ही एक रणनीतिक पहल थी,जिसने चीन के बढ़ते समुद्री प्रभाव को नियंत्रित और संतुलन  कायम करने के लिए अमेरिका,भारत,जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे समान हितों वाले देशों को लामबंद किया था। अब राष्ट्रपति ट्रम्प की नीतियों ने […]

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अमेरिका पर भारत कितना भरोसा करें….

सत्तामेल भारत में क्वाड के विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री मार्क रुबियो ने  कहा था की पाकिस्तान या अन्य देशों के साथ अमेरिका के संबंध भारत के साथ उसकी रणनीतिक साझेदारी की कीमत पर नहीं होंगे। क्या वास्तव में अमेरिका के लिए भारत बहुत महत्वपूर्ण है और भारत को भी अमेरिका […]

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कूड़ेदान की कूटनीति

   पीपुल्स समाचार  विश्व के शीर्ष नेताओं की सुरक्षा से जुड़े हैरतअंगेज़ किस्से दुनिया के सामने आते रहे है। व्लादिमीर पुतिन,अपनी सुरक्षा को लेकर हमेशा बेहद सतर्क रहते है। जासूसी और स्वास्थ्य की गोपनीयता बनाए रखने के लिए उनके अंगरक्षक उनका मल-मूत्र तक एक विशेष सूटकेस में भरकर रूस वापस ले जाते है। इसके  साथ […]

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ट्रंप-शी वार्ता-कूटनीति की चमक में छिपी प्रतिस्पर्धा

नवभारत चीन की राजधानी बीजिंग के केंद्र में स्थित ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल में जब अमेरिकी राष्ट्रगान बजा और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तथा चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग एक साथ मंच पर दिखाई दिए,तो यह दृश्य केवल एक राजनयिक औपचारिकता नहीं था। यह उस वैश्विक शक्ति-संतुलन का प्रतीक था जिसमें दुनिया की दो सबसे […]

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लैटिन अमेरिका का भविष्य

जनसत्ता  मेक्सिको,मध्य अमेरिका,कैरिबियन और दक्षिण अमेरिका के कई देशों तक फैला हुआ लैटिन अमेरिका संयुक्त राष्ट्र अमेरिका से भौगोलिक रूप से जुड़ा हुआ है, इसकी स्थिरता और सुरक्षा अमेरिका के राष्ट्रीय हितों से जुड़ी है। यह अमेरिकी कंपनियों के लिए एक बड़ा बाजार है और विदेशी निवेश का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है। लैटिन अमेरिका के […]

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चीन से सहयोग की कूटनीतिक चुनौती

जनसत्ता द्विपक्षीय सम्बन्धों में सहयोग और प्रतिस्पर्धा के गुण कूटनीतिक जटिलताओं को दिखाते है,भारत और चीन इसके पर्याय है। एशिया की दो महान शक्तियां एक दूसरे की पड़ोसी है,सांस्कृतिक और ऐतिहासिक रूप से दोनों देश एक दूसरे से जुड़े हुए है लेकिन सीमा विवाद ऐसी लक्ष्मण रेखा है जो राजनीतिक सम्बन्धों को सामान्य होने नहीं […]

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ईरान के अवैध तेल का वैश्विक बाज़ार

नवभारत टाइम्स ट्रम्प अगर यह सोच रहे है की वे छह भारतीय कंपनियों पर प्रतिबन्ध लगाकर ईरान के ऊर्जा व्यापार और शिपिंग नेटवर्क को ध्वस्त कर देंगे,तो उनका अंदाजा बिल्कुल गलत है। क्योंकि ईरान के अवैध तेल साम्राज्य को आगे बढ़ाने में दुनिया के 27 देश शामिल है। इसमें अमेरिका के मध्यपूर्व में रणनीतिक भागीदार […]

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ईरान की मिसाइलों ने हिला दी महाशक्तियों की नींव

जनसत्ता  सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्य और परमाणु शक्ति संपन्न देश अमेरिका,रूस,चीन,ब्रिटेन और फ़्रांस भी विश्वासपूर्वक यह दावा नहीं कर सकते की उनकी वायु सुरक्षा प्रणाली अभेद्य है। दरअसल ईरान इजराइल युद्द भले ही फ़िलहाल रुक गया हो लेकिन ईरान की मिसाइलों ने इजराइल के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले मिसाइल डिफेन्स सिस्टम में […]

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article गांधी है तो भारत है

बापू का खुशहाल भूटान चाहिए या शक्तिशाली चीन    

प्रजातन्त्र   राजनीति में शक्ति का प्रयोग बहुत विस्तृत रहा है और यही इसकी नकारात्मकता का कारण भी बनता रहा। शक्ति के नृशंसतंत्र के रूप में कार्य करने के उदाहरण अतीत और वर्तमान का आईना रहे है। दुनिया के विभिन्न भागों में  इसे अभिशाप की तरह झेला  गया और आज भी लोग मजबूर है। सम्पूर्ण […]

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मैक मोहन रेखा तय करेगी चीन से संबंधों का भविष्य

      राष्ट्रीय सहारा,हस्तक्षेप   अक्टूबर 1913 से जुलाई 1914 के बीच शिमला में आयोजित एक सम्मेलन ने ब्रिटिश जनरल सर हेनरी मैकमोहन के नेतृत्व में तिब्बत और ब्रिटिश भारत के बीच एक सीमा तैयार की। सीमा में असम शामिल है जो पूर्वी भूटान का एक पार्श्व भाग है जो हिमालय की चोटियों के साथ लगभग 890 […]

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