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भारत चीन संबंधों का भविष्य

जनसत्ता  भारत और चीन के बीच सैन्य गतिरोध एक संवेदनशील मुद्दा है।  दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक,आर्थिक और राजनीतिक संबंध हैं,वहीं सीमा विवाद और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा ने इन संबंधों को प्रभावित किया है। दोनों देशों में वार्ता के माध्यम से सीमा मुद्दों को सुलझाने की कोशिशें कई बार हुई है लेकिन ऐतिहासिक कारण और अलग […]

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  ब्रिक्स में अब पुतिनवाद

राष्ट्रीय सहारा अधिनायकवादी नेताओं की वैश्विक नीतियां उनके शासन के लक्ष्यों से प्रभावित होती हैं। वे अपने लिए रणनीतिक साझेदार ढूँढते हैं और  अक्सर उन देशों के साथ संबंध स्थापित करते हैं जो उनके विरोधियों के खिलाफ खड़े होते हैं। यह स्थिति उन्हें वैश्विक मंच पर अपनी स्थिति को मजबूत करने में मदद करती है। […]

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कहीं बेहतर है गुटनिरपेक्षता

राष्ट्रीय सहारा,हस्तक्षेप                                                       सुरक्षा परिषद में स्थाई सदस्यता को लेकर भारत का मानना है कि उसे दुनिया के सबसे बड़े लोकतान्त्रिक देश होने के नाते वैश्विक मंच पर अपनी आवाज […]

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विकसित देशों में भी एक साथ चुनाव किसी चुनौती से कम नहीं..

राष्ट्रीय सहारा,हस्तक्षेप चुनावी खर्च को नियंत्रित करने के लिए कई देशों में नियम और कानून होते हैं, जिससे चुनावी प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी बनी रहे। एक देश एक चुनाव की प्रक्रिया को समय,लागत, राजनीतिक स्थिरता,भागीदारी और प्रभावी प्रबंधन की दृष्टि से बेहतर माना जाता है। हालांकि इसे लागू करना आसान नहीं है और विकसित देश […]

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 क्वाड देशों में अंतर्विरोध    

जनसत्ता अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में सामूहिक सुरक्षा की अवधारणा एक मजबूत और स्थायी तंत्र है,जो शांति और सुरक्षा को सुनिश्चित करने में मदद करती है। भारत,अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के हिन्द प्रशांत में गहरे आर्थिक और सामरिक हित है जिन्हें चीन से लगातार चुनौती मिल रही है। क्वाड इन चारों देशों का प्रतिनिधित्व करने वाला एक […]

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युद्दग्रस्त देश और भारतीय कूटनीति

जनसत्ता किसी भी राष्ट्र के राष्ट्रीय हित परिवर्तनशील हो सकते है,स्वाभाविक रूप से इसका प्रभाव वैदेशिक संबंधों पर भी दिखाई पड़ता है। भारत और रूस के बीच कूटनीतिक और सामरिक संबंधों की प्रतिबद्धता का सुनहरा इतिहास रहा है। रूस के धुर विरोधी देश यूक्रेन में भारत के प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी की यात्रा को संतुलन की […]

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विकसित देशों में महिला सुरक्षा को लेकर नागरिक भागीदारी पर जोर

राष्ट्रीय सहारा,हस्तक्षेप किताबों में लिखे कानून और उनके क्रियान्वयन के प्रति जागरूकता तथा प्रतिबद्धता किसी नागरिक समाज के अलग अलग गुण है। विकसित तथा पिछड़े समाज में यह अंतर बड़ा गहरा है जो लैंगिक असमानता और महिलाओं के प्रति हिंसा के रूप में सामने आता है। महिलाओं के खिलाफ हिंसा हर देश,संस्कृति और समुदाय में […]

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 विकसित बांग्लादेश का सपना और भारत की चुनौती

जनसत्ता बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने वैदेशिक संबंधों को लेकर बेहद यथार्थवादी दृष्टिकोण अपना रखा है जिसके अंतर्गत यह  माना जाता है की विदेश नीति संबंधी निर्णय राष्ट्रीय हित के आधार पर लिए जाना चाहिए न कि नैतिक सिद्धांतों और भावनात्मक मान्यताओं के आधार पर। दरअसल भारत की कूटनीतिक,सैन्य और आर्थिक मदद से अस्तित्व […]

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तालिबान के प्रति बदलता रुख

जनसत्ता  रणनीति की दृष्टि से जो नीति उपयुक्त हो,वहीं नीति सर्वोत्तम होगी। अन्तर्राष्ट्रीय राजनीति में यथार्थवाद का सिद्धांत सबसे प्रभावकारी माना जाता है तथा तालिबान की बढ़ती वैश्विक स्वीकार्यता में ताकतवर देशों का यथार्थवादी दृष्टिकोण साफ दिखाई दे रहा है। हाल ही में तालिबान के महत्वपूर्ण नेता और आतंकी सिराजुद्दीन हक़्क़ानी ने अपने शिष्टमंडल के […]

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भारत ईरान संबंधों का भविष्य

जनसत्ता ईरान,यूरेशिया और हिन्द महासागर के मध्य एक प्राकृतिक प्रवेश द्वार है,जिससें भारत रूस और यूरोप के बाजारों तक आसानी से पहुंच सकता है। एशिया महाद्वीप की दो महाशक्तियां भारत और चीन की सामरिक प्रतिस्पर्धा समुद्री परिवहन और पारगमन की रणनीति पर देखी जा सकती है। चीन की पर्ल ऑफ स्प्रिंग के जाल को भेदने […]

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