बदल गई नेपाल की राजनीति
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 बदल गई नेपाल की राजनीति

नवभारत

अभिजात्य और कुछ विशिष्ट राजनीतिक दलों तथा उसके सत्तावादी नेताओं से अभिशिप्त रही नेपाल की राजनीति में बालेन शाह के उभार को एक नए दौर की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। नया नेतृत्व देश की आंतरिक राजनीति,व्यवस्थाओं और पड़ोसी देशो से संबंधों को लेकर ज्यादा पारदर्शी और स्पष्ट नजर आ रहा है,इससे नेपाल के भविष्य की नई उम्मीदें जागी है।बालेन शाह तकनीकी विकास से रोजगार पैदा करके देश को गढ़ना चाहते है तथा कर्ज के बोझ तले दबी विकास परियोजनाओं को लेकर वे सहज नहीं है,इसलिए भारत में भी इस परिवर्तन को आशा की दृष्टि से देखा जा रहा है। इसका कारण यह है कि नेपाल में 239 साल पुरानी राजशाही व्यवस्था 2008 में ख़त्म  होने के बाद प्रचंड पहली बार जब 2008 में नेपाल के प्रधानमंत्री बने थे तब उन्होंने पहला विदेशी दौरा चीन का किया था। वहीं 2008 से अब तक किसी भी पार्टी ने पूर्ण बहुमत हासिल करके सरकार नहीं बनाई। लोकतांत्रिक नेपाल की शुरुआत से लेकर जेन जी आंदोलन तक कम्युनिष्ट पार्टी से प्रभावित नेपाल की राजनीति अस्थिरता के साथ चीन से प्रभावित रही। अब बालेन शाह के नेतृत्व में नेपाल में नई समावेशी,स्थिर और संतुलित सरकार भारत के लिए लाभकारी सिद्ध हो सकती है। भारत के साथ ऐतिहासिक संबंध,खुली सीमा,गहरे सांस्कृतिक संबंध,ऊर्जा तथा व्यापार के क्षेत्र में संभावित सहयोग दोनों देशों को स्वाभाविक साझेदार बनाते हैं। वहीं चीन की नीतियां नेपाल के नए नेतृत्व को आशंकित करने वाली है।जाहिर है यदि बालेन शाह दूरदर्शितापूर्ण और संतुलित विदेश नीति के मार्ग पर आगे बढ़ते है तो इससे भारत-नेपाल संबंधों में पहले जैसी ताजगी और गर्माहट आएगी।

 पिछले डेढ़ दशक से ज्यादा समय से नेपाल की समस्या राजनीतिक अस्थिरता रही है। पिछले कई वर्षों में सरकारें बार-बार बदलती रही है,जिससे सामाजिक और आर्थिक नीतियों में निरंतरता नहीं बन पाई। इसका सीधा असर विकास कार्यों पर पड़ा है। देश में गरीबी तेजी से बढ़ी है,उद्योग-धंधे सीमित है,रोजगार के अवसर बेहद कम हैं और बड़ी संख्या में युवा विदेशों में काम करने के लिए मजबूर हैं। देश की अर्थव्यवस्था काफी हद तक विदेशी रोजगार से आने वाले पैसे पर निर्भर है। नेपाल में प्रशासनिक व्यवस्था बेहद लचर है और भ्रष्टाचार से आन जनता बेहाल है। सरकारी योजनाएं अक्सर सही ढंग से लागू नहीं हो पाती,जिससे जनता को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाता। इसके अलावा आधारभूत ढांचे की कमी भी एक बड़ी चुनौती है। सड़क,स्वास्थ्य,शिक्षा और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों मेंबहुत सुधार की आवश्यकता है। हिमालय की तलहटी और पहाड़ों में बसा यह देश  प्राकृतिक आपदाओं से भी प्रभावित रहा है।

पिछले वर्ष नेपाल मेंजेन-जी आंदोलनमुख्य रूप से नई पीढ़ी की निराशा,बेरोज़गारी और भ्रष्ट राजनीतिक व्यवस्था के खिलाफ असंतोष का प्रतीक बनकर उभरा। युवा देश में बदलाव चाहते है और उनकी सबसे बड़ी मांग जवाबदेह राजनीति की रही। युवाओं का कहना था कि पारंपरिक राजनीतिक दल वर्षों से सत्ता में रहते हुए भी देश को स्थिर विकास नहीं दे पाए हैं। इसलिए वे पारदर्शी शासन और भ्रष्टाचार पर सख्त कार्रवाई चाहते है।नेपाल के लाखों युवा रोज़गार के लिए विदेश जाने को मजबूर हैं। आंदोलन में युवाओं ने मांग थी कि सरकार देश के भीतर ही उद्योग,पर्यटन और तकनीकी क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाएं। आंदोलन के दौरान डिजिटल पारदर्शिता,सुशासन और युवा नेतृत्व को राजनीति में अवसर देने की मांग भी जोर से उठी थी। आंदोलन में शामिल युवाओं का कहना था कि देश की नीतियों और निर्णयों में नई पीढ़ी की भागीदारी बढ़नी चाहिए।जेन-जी आंदोलन से यह संदेश मिला कि नेपाल के युवा अब केवल राजनीतिक बदलाव नहीं,बल्कि ईमानदार शासन,आर्थिक अवसर और देश में आधुनिक विकास मॉडल चाहते हैं। इन समस्याओं के बीच नई सरकार से लोगों की उम्मीदें काफी बड़ी हैं। बालेन शाह नेपाल की राजनीति में एक नई उम्मीद और के प्रतीक बनकर उभरे हैं। काठमांडू के मेयर बनने के बाद उन्होंने प्रशासन चलाने का ऐसा तरीका अपनाया है,जो पारंपरिक राजनीतिक शैली से काफी अलग दिखाई देता है। वे तुरंत निर्णय लेने,अनुशासित व्यवस्था,नियमों को सख्ती से लागू करने और सरकारी कामकाज में पारदर्शिता बढ़ाने पर जोर देते है।बालेन शाह की कार्यशैली को व्यावहारिक और परिणाम-केंद्रित माना जाता है। उन्होंने काठमांडू में अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई,शहर की साफ-सफाई और यातायात व्यवस्था सुधारने जैसे मुद्दों पर सक्रिय कदम उठाएं। उनकी एक विशेषता यह भी है कि वे आम लोगों से सीधे संवाद बनाए रखते हैं और कई बार सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी योजनाओं और निर्णयों की जानकारी साझा करते हैं। इससे युवाओं को लगता है कि शासन अधिक खुला और जवाबदेह बन सकता है।नेपाल के युवाओं को उनसे कई बहुत उम्मीदें हैं। वे ओली की भारत विरोधी तथा प्रचंड की चीन परस्त राजनीति से अलग चाहते हैं कि बालेन शाह गैर विवादित रहकर ईमानदार और जवाबदेह प्रशासन की एक नई परंपरा स्थापित करें। युवाओं का यह भी मानना है कि बालेन शाह तकनीकी समझ और आधुनिक सोच के साथ वे शहरी विकास,रोजगार और बेहतर सार्वजनिक सेवाओं के क्षेत्र में ठोस बदलाव ला सकते हैं।नेपाल की नई पीढ़ी बालेन शाह को एक ऐसे नेतृत्व के रूप में देख रही है जो पुरानी राजनीतिक संस्कृति से हटकर साफ-सुथरी राजनीति,प्रभावीप्रशासन और विकासोन्मुख सोच को आगे बढ़ा सकता है।

नेपाल के विकास,व्यापार,ऊर्जा और सामाजिक संबंधों के विस्तार में भारत की भूमिका अहम है। नेपाल के विकास और स्थिरता में भारत की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है।नेपाल की बड़ी मात्रा में व्यापारिक गतिविधियां भारत के साथ होती हैं। नेपाल अपनी मूलभूत आवश्यकताओं,पेट्रोलियम,खाद्यान्न,दवाइयां और अन्य उपभोक्ता सामानका बड़ा हिस्सा भारत से आयात करता है। नेपाल के आधारभूत ढांचे के विकास में भी भारत की भूमिका महत्वपूर्ण है। नेपाल में जलविद्युत की अपार संभावनाएं है और इन परियोजनाओं के विकास में भारत निवेश और तकनीकी सहयोग प्रदान करता है। कई सड़क,पुल और रेल परियोजनाओं में भी भारत की सहायता से काम आगे बढ़ रहा है।सांस्कृतिक और सामाजिक संबंध भी दोनों देशों को करीब लाते हैं। दोनों देशों के लोगों के बीच धार्मिक और पारिवारिक रिश्ते लंबे समय से बने हुए हैं। लाखों नेपाली नागरिक भारत में काम करते हैं और शिक्षा प्राप्त करते हैं,जिससे दोनों देशों के बीच मानवीय संबंध और मजबूत होते है। इसके साथ ही क्षेत्रीय राजनीति और सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी भारत नेपाल के लिए एक महत्वपूर्ण साझेदार है। चीन की बढ़ती महत्वाकांक्षाओं,हिमालयीन  क्षेत्र की स्थिरता और समूचे क्षेत्र के आर्थिक विकास के लिए दोनों देशों का विश्वास और सहयोग जरूरी है।नेपाल के लिए चीन की बढ़ती सक्रियता एक महत्वपूर्ण चुनौती बनती जा रही है। चीन बेल्ट और रोड़ परियोजनाओं में निवेश,आधारभूत  ढांचे और कनेक्टिविटी परियोजनाओं के माध्यम से नेपाल में अपना प्रभाव बढ़ाहै।इससे नेपाल को आर्थिक अवसर तो बढ़े है लेकिन कर्ज़ का दबाव और रणनीतिक निर्भरता बढ़ने का खतरा भी बढ़ा है।नेपाल में लोकतंत्र के आने के बाद से कम्युनिष्ट पार्टी के प्रभाव और चीन की बढ़ती राजनीतिक सक्रियता ने नेपाल की आंतरिक राजनीति को खूब प्रभावित किया है।

अब बालेन शाह के सामने आंतरिक और बाहरी दोनों स्तरों पर कई कठिन चुनौतियां मौजूद होंगी। उन्हें राजनीतिक अस्थिरता,भ्रष्टाचार और कमजोर प्रशासनिक व्यवस्था को सुधारने होगा। वर्षों से चली आ रही सत्ता संघर्ष की राजनीति ने विकास की गति को धीमा किया है।ऐसे में शासन व्यवस्था को पारदर्शी बनाना,युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाना और आर्थिक ढांचे को मजबूत करना उनके लिए बड़ी जिम्मेदारी होगी।नेपाल को संतुलित विदेश नीति पर भी आगे बढना होगा। एक ओर भारत के साथ ऐतिहासिक और गहरे संबंध हैंतो दूसरी ओर चीन भी आर्थिक और रणनीतिक रूप से अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। इन दोनों शक्तियों के बीच संतुलन बनाते हुए नेपाल के राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना आसान नहीं होगा।

बालेन शाह के सामने नेपाल को मजबूत और स्थिर बनाने की बड़ी जिम्मेदारी होगी। इसके लिए उन्हें केवल तात्कालिक फैसलों से आगे बढ़कर दीर्घकालीन नीतियों और योजनाओं पर ध्यान देना होगा। देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने,युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने और आधारभूतढांचे को विकसित करने के लिए ठोस रणनीति बनानी आवश्यक है। इसके साथ ही शिक्षा, ऊर्जा और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में भी दूरगामी सुधार की जरूरत होगी। यदि बालेन शाह स्थिर नीतियों और पारदर्शी प्रशासन पर जोर देते हैंतो नेपाल विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ सकता है।

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