भारत के बिना पाकिस्तान-ईरान कॉरिडोर का भविष्य खतरें में
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 भारत के बिना पाकिस्तान-ईरान कॉरिडोर का भविष्य खतरें में

नवभारत टाइम्स

ईरान अमेरिका युद्द में पाकिस्तान और चीन उन अवसरों की तलाश में है,जिससे परिस्थितियों का फायदा उठाया जा सके। अब पाकिस्तान ने ईरान के लिए ट्रेड रूट खोलने का ऐलान किया है,इसमें तफ्तान नामक स्थान खूब चर्चा में है।  तफ्तान,ईरान और पाकिस्तान की सीमा पर,पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के चगाई जिले में स्थित एक महत्वपूर्ण सीमावर्ती शहर है। यह पाकिस्तान से ईरान में प्रवेश करने का मुख्य जमीनी रास्ता है जो दोनों देशों के बीच माल ढुलाई और व्यापार के लिए एक प्रमुख मार्ग है। पाकिस्तान से ईरान,इराक और सीरिया जाने वाले ज़ायरीन और आम यात्री मुख्य रूप से इसी मार्ग का उपयोग करते हैं। यह पाकिस्तान के क्वेटा शहर से सड़क और रेलवे के माध्यम से जुड़ा हुआ है।

यह तो तफ्तान की वर्तमान पहचान है लेकिन उसकी ऐतिहासिक पहचान भारत से जुडी हुई है,यदि पाकिस्तान तफ्तान के कॉरिडोर को खोलकर आर्थिक और सांस्कृतिक लाभ लेना चाहता है तो उसका ख्वाब भारत के बिना कभी पूरा नहीं हो सकता । दरअसल तफ्तान ऐतिहासिक लंदन-क्वेटा-दिल्ली सड़क मार्ग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।1950 से 1970 के दशक तक जब ईरान और अफगानिस्तान में शांति थी तब यह मार्ग यूरोप से भारत को जोड़ने वाला सडक मार्ग के रूप में बहुत लोकप्रिय था जिसे हिप्पी ट्रेल  कहा जाता था। यात्री यूरोप से चलकर तुर्की,ईरान  और तफ्तान के रास्ते होते हुए पाकिस्तान में क्वेटा,फिर लाहौर और अंत में भारत में दिल्ली या उससे आगे तक जाते थे। भारत में हिप्पी मूवमेंट का प्रभाव इस दौरान खूब देखने को मिला जब पश्चिमी युवा आध्यात्मिक खोज और स्वतंत्र जीवनशैली की तलाश में भारत आयें और गोवा,ऋषिकेश और वाराणसी  जैसे स्थान इनके प्रमुख केंद्र बने। इसका सबसे बड़ा प्रभाव भारतीय योग,ध्यान और आध्यात्मिक परंपराओं के वैश्वीकरण के रूप में सामने आया। ऋषिकेश विश्व स्तर पर योग नगरी के रूप में प्रसिद्ध हुआ। पर्यटन उद्योग को भी बढ़ावा मिला और गोवा में विदेशी पर्यटकों की संख्या तेजी से बढ़ी। संगीत और कला के क्षेत्र में भी परिवर्तन आया।  रवि शंकर जैसे कलाकारों ने भारतीय संगीत को वैश्विक पहचान दिलाई। फैशन और जीवनशैली में पश्चिमी शैली,ढीले कपड़े और प्रकृति के प्रति झुकाव बढ़ा। हिप्पी संस्कृति ने भारत को वैश्विक आध्यात्मिक केंद्र के रूप में स्थापित किया और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को मजबूत किया। बाद में ईरान की इस्लामिक क्रांति और अफगानिस्तान में अशांति से यह सड़क मार्ग लगभग बंद हो गया।

अब पाकिस्तान ईरान के लिए तफ्तान का मार्ग खोलकर यूरोप तक सड़क मार्ग से व्यापार करने का ख्वाब देख रहा है और इसके पीछे चीन की बड़ी महत्वकांक्षी बेल्ट और परियोजना है।  तफ्तान का आर्थिक,रणनीतिक और ऐतिहासिक महत्व अत्यंत व्यापक है। आर्थिक दृष्टि से तफ्तान पाकिस्तान–ईरान के बीच प्रमुख स्थलीय व्यापारिक द्वार है। यहां से खाद्य पदार्थ,पेट्रोलियम उत्पाद,निर्माण सामग्री और दैनिक उपयोग की वस्तुओं का आयात-निर्यात होता है। ईरान से सस्ती ऊर्जा आपूर्ति की संभावनाओं के कारण यह क्षेत्र ऊर्जा सहयोग के लिए भी महत्वपूर्ण बनता जा रहा है। भविष्य में गैस पाइपलाइन और व्यापारिक कॉरिडोर विकसित होने पर इसका महत्व और बढ़ सकता है। रणनीतिक दृष्टि से तफ्तान अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र में स्थित है। यह इलाका लंबे समय से तस्करी, अवैध आवागमन और विद्रोही गतिविधियों से प्रभावित रहा है,इसलिए सीमा प्रबंधन,सुरक्षा बलों की तैनाती और निगरानी के लिहाज से इसका महत्व बहुत अधिक है। यह पाकिस्तान को ईरान और आगे पश्चिम एशिया से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण संपर्क बिंदु है,जिससे क्षेत्रीय कूटनीति और सामरिक संतुलन प्रभावित होता है। ऐतिहासिक रूप से तफ्तान प्राचीन व्यापार मार्गों का हिस्सा रहा है,जो दक्षिण एशिया को मध्य एशिया और पश्चिम एशिया से जोड़ते थे। यह मार्ग सांस्कृतिक आदान-प्रदान,यात्राओं और व्यापार का प्रमुख केंद्र रहा है। आधुनिक काल में भी यह स्थान पुराने सिल्क रूट की परंपरा को आगे बढ़ाता हुआ दिखाई देता है। इस प्रकार,तफ्तान आर्थिक गतिविधियों,सुरक्षा रणनीति और ऐतिहासिक संपर्क का संगम है। तफ्तान का महत्व  चीन के लिए क्षेत्रीय संपर्क,ऊर्जा सुरक्षा और भू-राजनीति के संदर्भ में अत्यंत  महत्वपूर्ण है।

चीन,पाकिस्तान के साथ अपने बड़े आर्थिक प्रोजेक्ट चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारा  के माध्यम से जुड़ा हुआ है। तफ्तान को इस कॉरिडोर से प्रभावी रूप से  जोड़ने से चीन को ईरान और आगे पश्चिम एशिया तक स्थलीय पहुंच मिल सकती है। चीन की अर्थव्यवस्था तेल और गैस आयात पर निर्भर है। ईरान जैसे ऊर्जा-संपन्न देश तक तफ्तान के माध्यम से पहुंच चीन को वैकल्पिक आपूर्ति मार्ग दे सकती है,जिससे मलक्का जलडमरूमध्य जैसे समुद्री मार्गों पर उसकी निर्भरता कम हो सकती है। इस प्रकार,तफ्तान चीन के लिए एक संभावित गेटवे है,जो उसे ऊर्जा,व्यापार और रणनीतिक विस्तार के नए अवसर प्रदान कर सकता है।

वहीं तफ्तान ऐतिहासिक रूप से हिप्पी ट्रेल और उससे पहले के व्यापारिक मार्गों का हिस्सा रहा है। यह दक्षिण एशिया,मध्य एशिया और यूरोप को जोड़ने वाला एक अहम स्थल था। इसलिए इसका महत्व सिर्फ एक सड़क बनने से नहीं,बल्कि बड़े भू-राजनीतिक और आर्थिक नेटवर्क से तय होता है। भारत एक बहुत बड़ा बाजार,सांस्कृतिक केंद्र और ऐतिहासिक गंतव्य है,इससे जुड़ने पर किसी भी कॉरिडोर की उपयोगिता बढ़ती है। भारत सदियों से आध्यात्मिक पर्यटन का केंद्र रहा है तथा बौद्ध, हिंदू, सूफी परम्पराओं से यह जुड़ी हैं। यूरोप और मध्य एशिया के लोग ऐतिहासिक रूप से भारत की ओर आकर्षित रहे है,भारत के जुड़ने से कॉरिडोर अधिक प्रभावी और व्यापक बन सकता है।

भारत  करीब दो सौ बत्तीस बिलियन अमेरिकी डॉलर के योगदान के साथ आठवीं सबसे बड़ी पर्यटन अर्थव्यवस्था है। 2024 में, भारत ने पर्यटन से लगभग अठाईस अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा अर्जित की थी।  बयालीस यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों के साथ, भारत विश्व में शीर्ष पर है। वाराणसी, जयपुर, हम्पी और खजुराहो जैसे शहर लाखों पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। भारत हिंदू तीर्थस्थलों, बोधगया और  सारनाथ जैसे बौद्ध स्थलों स्वर्ण मंदिर जैसे पवित्र सिख स्थल और इस्लामी धरोहर स्थलों अजमेर शरीफ का घर है। भारत सस्ती और उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा प्रक्रियाओं के लिए वैश्विक केंद्र के रूप में उभर रहा है। 2022 में, मेडिकल टूरिज्म ने  छह अरब डॉलर उत्पन्न किए, जिसमें अफ्रीका, मध्य पूर्व और दक्षिण एशिया से बड़ी संख्या में मरीज आए। भारत में आध्यात्मिक पर्यटन के क्षेत्र में विकास के चलते 2030 तक एक करोड़ से अधिक लोगों को अस्थायी और स्थायी रोजगार प्राप्त होगा। अनुमान है कि 2028 तक इस उद्योग का मूल्य लगभग  उनसठ  अरब अमेरिकी डॉलर होगा। ये उत्साहवर्धक आंकड़े भारतीय पर्यटन उद्योग के उज्ज्वल भविष्य और इसकी अपार संभावनाओं को दर्शाते हैं। भारत एक बड़ा उपभोक्ता बाजार है। यदि वह  बीआरआई का हिस्सा बनता है, तो चीन की कंपनियों को निवेश, निर्माण,ऊर्जा और व्यापार के क्षेत्र में बड़े अवसर मिल सकते हैं। इससे चीन की आर्थिक वृद्धि को भी सहारा मिलता है। आर्थिक लाभ, रणनीतिक विस्तार, वैश्विक छवि और क्षेत्रीय प्रभाव बढ़ाने के लिए चीन,भारत को  बीआरआई प्रोजेक्ट में शामिल करना चाहता है।

यदि भारत, तफ्तान से होकर जाने वाले पाकिस्तान के प्रस्तावित कॉरिडोर में शामिल हो जाएं तो यूरोप से आने वाले लाखों तीर्थयात्री तथा पर्यटक तथा मध्यपूर्व के लाखों जायरीन,इस मार्ग से ही भारत आने लगेंगे। ऐसे में पाकिस्तान को इसका गहरा आर्थिक लाभ हो सकता था। लेकिन भारत तो इसमें शामिल है नहीं,ऐसे में चीन और पाकिस्तान,तफ्तान से होकर ईरान के रास्ते जिस आध्यात्मिक पर्यटन और आर्थिक फायदें का ख्वाब देख रहे है,उसका भविष्य भारत के बिना अधर में ही नजर आता है। 

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