माओवादियों का आखरी दांव
पॉलिटिक्स […]
राष्ट्रीय सहारा चुनाव प्रशासन के लिए नैतिक मानक होना चाहिए,इसे लेकर दुनिया के लगभग सभी लोकतांत्रिक देशों में संस्थाएं काम करती है। कुछ देशों में यह कार्य भारत की तरह संविधानिक संस्था देखती है तो यूके जैसे पुराने और उदार लोकतंत्र,राजनीतिक दलों से यह अपेक्षा करते है कि समावेशी विचारधारा पर किसी प्रकार का मतभेद […]
पॉलिटिक्स लोकतांत्रिक भारत में समानता के मौलिक अधिकार के जरिए सामाजिक न्याय हासिल करने की कोशिशों में जुटे वंचित वर्गों की चुनौतियां कभी भी खत्म होती नहीं दिखाई पड़ती। भारत के राजनीतिक दलों पर हावी सामंती तंत्र बेहद खूबसूरती से इन वंचितों के मतदान के अधिकार का सम्मान करते हुए और उनकी सांविधानिक शक्तियों के […]
जनसत्ता म्यांमार का भू राजनैतिक महत्व भारत को अपने इस दक्षिण पूर्व एशियाई पड़ोसी देश के प्रति अति यथार्थवादी वैदेशिक नीति के संचालन के लिए मजबूर करता है। म्यांमार में लोकतांत्रिक शक्तियों और सेना के बीच सत्ता संघर्ष की दशकों पुरानी जटिल स्थितियों में भी भारत ने बेहद संतुलनकारी नीति को अपनाया है लेकिन […]
राष्ट्रीय सहारा मध्यपूर्व में सत्ता में बने रहने की सनक और सत्ता से उखाड़ फेंकने वालों की कोशिशों के बीच हिंसक प्रतिद्वंदिता का पुराना इतिहास रहा है। अरब कबीलाई संस्कृति को अपनी गौरवशाली परम्परा से जोड़कर देखते है,अत: अधिकांश देश अमीर और शहजादों से अभिशिप्त रहे। वहीं जहां लोकतंत्र की गुंजाईश दिखाई दी,उसे शिया और […]
प्रजातन्त्र मॉस्को के थिएटर पर आईएस के हमलें से 137 लोगों के मारे जाने के बाद रूस में हताशा,निराशा और अजीब खामोशी है। रूसी यह कयास लगा रहे है की पुतिन का जवाब कब और कैसा होगा। रूस का सरकारी मीडिया यूक्रेन की भूमिका को तलाश रहा है जिससे पुतिन के यूक्रेन पर हमलों को […]
राष्ट्रीय सहारा छठी अनुसूची पूर्वोत्तर राज्यों के जनजातीय समुदायों को एक बड़े प्रशासनिक या राजनीतिक ढांचे के भीतर काफी स्वायत्तता देती है। स्वायत्त जिला परिषद या एडीसी का द्वारा संचालित इस निकाय के पास जल,जंगल और जमीन के स्वतः पुलिस और सामाजिक व्यवस्था को बनाएं रखने के लिए सीमित स्तर पर अदालती अधिकार भी होते है। आदिवासियों […]
नवभारत टाइम्स सुन्नी आधुनिकीकरण की ओर सऊदी अरब ..! इतिहास अपनी पहचान को नकार दे इसकी गुंजाइश न के […]
पॉलिटिक्स होली का रंग,टेसूओं के फूल संग…. बस्तर में फूलों के रंगों की होली का जश्न पलाश के फूल के कई नाम हैं। इसे टेसू,ढाक,परसा,केशुक और केसू भी कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि ऋतुराज वसंत की सुंदरता पलाश के बिना पूरी नहीं होती है। पलाश के फूल […]
देश का सबसे खतरनाक संसदीय क्षेत्र है रेड कॉरिडोर का केंद्र….बस्तर फरवरी से मई महीने के बीच नक्सलियों की ओर से टैक्टिकल काउंटर ऑफेंसिव कैंपेन चलाया जाता है। इस कैंपेन के दौरान नक्सली एक्टिव हो जाते हैं और अपनी पूरी ताकत […]