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पाक और इजराइल से संबंधों पर असर

राष्ट्रीय सहारा,हस्तक्षेप  ख्यात दार्शनिक जीन रोस्टैंड ने एक बार कहा था कि एक विवाहित जोड़ा तब उपयुक्त होता है जब दोनों एक ही समय में बहस की आवश्यकता महसूस करते हैं। भारत की नई सरकार के महत्वपूर्ण भागीदार नीतीश कुमार और चन्द्रबाबू नायडू विवाह की रस्मों को तो निभा गए लेकिन इसके बाद के सफर […]

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आपराधिक न्यायालय की फजीहत

प्रजातंत्र रोमन देवी जस्टीशिया,आंखों पर पट्टी बंधी न्याय की देवी के रूप में न्यायालयों में प्रतीक के तौर पर नजर आती है। उनके एक हाथ में तराजू और दूसरे में तलवार होती है। आंखों पर पट्टी न्याय की निष्पक्षता का प्रतीक है। तराजू न्याय के संतुलन का प्रतीक है। यदि दूसरे शब्दों में कहें तो […]

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पश्चिम में दंड नहीं पुनर्वास पर बल

राष्ट्रीय सहारा,हस्तक्षेप  दंड के औचित्य और उद्देश्य को पश्चिम और शेष दुनिया में गहरा वैचारिक और वैधानिक अंतर है। आमतौर पर यह देखा गया है कि विकासशील और पिछड़े देशों में न्याय की अवधारणा और नीतियां प्रतिशोध पर आधारित कड़ी होती है और इसे लोकप्रिय भी माना जाता है। प्रतिशोधात्मक न्याय आपराधिक न्याय की एक […]

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संकट में फिलिस्तीन राष्ट्र का सपना

जनसत्ता क्षेत्र विस्तारवाद का अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में बहुत महत्व रहा है। राजनीतिक सत्ताएं इसे सैन्यवादी विचारधारा से पोषित करती है जिसके अनुसार  यह माना जाता है कि शक्ति से ही शान्ति आती है। मध्यपूर्व में इस्राइल विस्तारवाद की रणनीति को आत्मसात कर चूका है वहीं फिलिस्तीन की विभाजित सत्ताओं पर हावी हमास शक्ति और आक्रमण को […]

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इंटरनेशनल कोर्ट का संकट

राष्ट्रीय सहारा                                                                                                              […]

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यहूदी इतने आक्रामक क्यों है…?

पॉलिटिक्स     इजराइल को न तो पश्चिम पर भरोसा है,न  अमेरिका पर और न ही अरबों पर। दरअसल यहूदियों को खत्म करने की कोशिशों में सब शामिल रहे है। यहीं कारण है कि यहूदी अपना रास्ता खुद चुनते है  फिर चाहे उन्हें  इसकी कोई भी कीमत अदा करना पड़े, लेकिन वे अपनी मंजिल तक पहुँच […]

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क्रूर इब्राहिम रईसी का अंत

  नवभारत टाइम्स इतिहास कभी किसी को माफ नहीं करता और कम से कम ईरान के मरहूम  राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी को तो कभी भी नहीं जिन्होनें अपने  जीवनकाल में हिजाब पहनों नहीं तो हम तुम्हारे सिर पर मुक्का मारेंगे,मुसलमान हो या मार्क्सवादी,राजनीतिक विरोधियों का अंत ईश्वरीय इच्छा है जैसे नारे गढ़े और कानून का बेजा […]

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 भ्रामक विज्ञापनों पर विकसित देश सख्त और पिछड़े पस्त  

राष्ट्रीय सहारा,हस्तक्षेप तकनीकी प्रगति और प्रचार के नए साधनों ने विज्ञापन परिदृश्य को पूरी तरह से बदल दिया है। जैसे जैसे विपणन और विज्ञापन अधिक परिष्कृत होते जा रहे हैं,दुनिया भर के कई कानून निर्माताओं ने महसूस किया है कि उन्हें उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए नियम जोड़ने की जरूरत है।  दुनिया के कई देशों […]

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भारत ईरान संबंधों का भविष्य

जनसत्ता ईरान,यूरेशिया और हिन्द महासागर के मध्य एक प्राकृतिक प्रवेश द्वार है,जिससें भारत रूस और यूरोप के बाजारों तक आसानी से पहुंच सकता है। एशिया महाद्वीप की दो महाशक्तियां भारत और चीन की सामरिक प्रतिस्पर्धा समुद्री परिवहन और पारगमन की रणनीति पर देखी जा सकती है। चीन की पर्ल ऑफ स्प्रिंग के जाल को भेदने […]

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भारत कैसे बना धार्मिक अल्पसंख्यकों का सुरक्षित ठिकाना…

वेबदुनिया  पाकिस्तान की आर्थिक राजधानी कराची में पिछले साल मार्च में एक अल्पसंख्यक अधिकार मार्च निकाला गया। देश के कई इलाकों से हजारों अल्पसंख्यक और हाशिये पर पड़े लोग इस मार्च में सम्मिलित हुए। उनके हाथों में बैनर थे जिसमें वे सरकार से मांग कर रहे थे कि  धार्मिक अल्पसंख्यकों के सामने आने वाले गंभीर […]

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