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ईयू में चीन की घुसपैठ

राष्ट्रीय सहारा  मध्य और दक्षिणपूर्व यूरोप के चौराहे पर स्थित सर्बिया में हजारों लोगों ने चीन और सर्बिया के झंडे हाथों में लिए शी जिनपिंग का जिस गर्मजोशी से स्वागत  किया है उसने यह संदेश दिया है कि चीन को रोकने की अमेरिकी कोशिशें नाकाफी साबित हो रही है और यह नई विश्व व्यवस्था में […]

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ईरान और चीन के अवैध व्यापार का खुफिया समुद्री मार्ग

नवभारत टाइम्स वैश्विक व्यापार को संचालित करने में जल क्षेत्र की बड़ी भूमिका है,अंतर्राष्ट्रीय शिपिंग उद्योग के जरिए लगभग 90 फीसदी परिवहन होता है। दुनिया भर में फैले समुद्री मार्गों का संचालन अंतर्राष्ट्रीय कानूनों के तहत किया जाता है लेकिन अब चीन ने खुफिया रास्ते ढूंढकर दुनिया के सामने चुनौतियां बढ़ा दी है। ईरान वर्तमान में वैश्विक वित्तीय और […]

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भारत विरोध पर मुहर

राष्ट्रीय सहारा हिन्द महासागर में शक्ति संतुलन बनाएं रखने के लिए बीजिंग और नई दिल्ली दोनों मालदीव को अपने प्रभाव क्षेत्र में रखने के लिए कृतसंकल्पित रहे है। इसका असर मालदीव की घरेलू राजनीति पर भी देखने को मिल रहा है। भारतीय उपमहाद्वीप के दक्षिण पश्चिम में स्थित इस द्वीपीय देश में मुइज्जू के राजनीतिक […]

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article भारत मे आतंकवाद

माओवादियों का आखरी दांव

   पॉलिटिक्स                                                                                                                 […]

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पश्चिम में आचार संहिता

राष्ट्रीय सहारा चुनाव प्रशासन के लिए नैतिक मानक होना चाहिए,इसे लेकर दुनिया के लगभग सभी लोकतांत्रिक देशों में संस्थाएं काम करती है। कुछ देशों में यह कार्य भारत की तरह संविधानिक संस्था देखती है तो यूके जैसे पुराने और उदार लोकतंत्र,राजनीतिक दलों से यह अपेक्षा करते है कि समावेशी विचारधारा पर किसी प्रकार का मतभेद […]

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दिशाहीन दलित राजनीति

पॉलिटिक्स  लोकतांत्रिक भारत में समानता के मौलिक अधिकार के जरिए सामाजिक न्याय हासिल करने की कोशिशों में जुटे वंचित वर्गों की चुनौतियां कभी भी खत्म होती नहीं दिखाई पड़ती। भारत के राजनीतिक दलों पर हावी सामंती तंत्र बेहद खूबसूरती से इन वंचितों के मतदान के अधिकार का सम्मान करते हुए और उनकी सांविधानिक शक्तियों के […]

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अस्थिर म्यांमार और भारत की मुश्किलें

जनसत्ता                   म्यांमार का भू राजनैतिक महत्व भारत को अपने इस दक्षिण पूर्व एशियाई पड़ोसी देश के प्रति अति यथार्थवादी वैदेशिक नीति के संचालन के लिए मजबूर करता है। म्यांमार में  लोकतांत्रिक शक्तियों और सेना के बीच सत्ता संघर्ष की दशकों पुरानी जटिल स्थितियों में भी भारत ने बेहद संतुलनकारी नीति को अपनाया है लेकिन […]

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सत्ता की आत्मघाती सनक 

राष्ट्रीय सहारा मध्यपूर्व में सत्ता में बने रहने की सनक और सत्ता से उखाड़ फेंकने वालों की कोशिशों के बीच हिंसक प्रतिद्वंदिता का पुराना इतिहास रहा है। अरब कबीलाई संस्कृति को अपनी गौरवशाली परम्परा से जोड़कर देखते है,अत: अधिकांश देश अमीर और शहजादों से अभिशिप्त रहे। वहीं जहां लोकतंत्र की गुंजाईश दिखाई दी,उसे शिया और […]

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स्टालिन से आगे निकलने को बेताब पुतिन

प्रजातन्त्र                 मॉस्को के थिएटर पर आईएस के हमलें से 137  लोगों के मारे जाने के बाद रूस में हताशा,निराशा और अजीब खामोशी है।  रूसी यह कयास लगा रहे है की पुतिन का जवाब कब और कैसा होगा। रूस का सरकारी मीडिया यूक्रेन की भूमिका को तलाश रहा है जिससे पुतिन के यूक्रेन पर हमलों को […]

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लद्दाख और छठी अनुसूची

राष्ट्रीय सहारा छठी अनुसूची पूर्वोत्तर राज्यों के जनजातीय समुदायों को एक बड़े प्रशासनिक या राजनीतिक ढांचे के भीतर काफी स्वायत्तता देती है। स्वायत्त जिला परिषद  या एडीसी  का  द्वारा संचालित इस निकाय के पास  जल,जंगल और जमीन के स्वतः पुलिस और सामाजिक व्यवस्था को बनाएं रखने के लिए सीमित स्तर पर अदालती अधिकार भी होते है। आदिवासियों […]

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