राम राज्य को संकल्पित नया साल,स्वतंत्र समय
स्वतंत्र समय राम राज्य को संकल्पित नया साल स्वर्णिम उम्मीदों और आकांक्षाओं से भरपूर है.. अयोध्या में स्थापित […]
स्वतंत्र समय राम राज्य को संकल्पित नया साल स्वर्णिम उम्मीदों और आकांक्षाओं से भरपूर है.. अयोध्या में स्थापित […]
राष्ट्रीय सहारा,हस्तक्षेप बदलती दुनिया में कूटनीति के रास्ते आर्थिक फायदों से तय होते है। 1990 के दशक में वैश्वीकरण के बाद भारत की अर्थव्यवस्था ने नए सोपान तय किये है, इसका असर विश्व स्तर पर बखूबी पड़ा है और इस्लामिक देश भी इससे अछूते नहीं है। इस सबके बीच इस्लामिक देशों की बादशाहत करने का […]
रणकौशल की मिसाल है 1971 का युद्ध नेशनल डिफेंस कॉलेज ऑफ़ पाकिस्तान के जंगी दस्तावेज में भारत पाकिस्तान के बीच 1971 के इस समूचे युद्ध पर कुछ इस तरह लिखा गया है,हिंदुस्तानियों ने पूर्वी पाकिस्तान के खिलाफ हमले का खाका तैयार करने और उसे अंजाम देने में बिलकुल ऐसे पक्के ढंग से बनाया गया […]
राष्ट्रीय सहारा हमास पर पाकिस्तानी रुख उम्माह का उपयोग इस्लामिक जगत में व्यापक एकता के लिए किया जाता है,इसे अरब राष्ट्रवाद भी कह सकते है जो दुनियाभर में फैले इस्लाम के अनुयायियों को आक्रामक रूप से जोड़ता है। हमास इजराइल संघर्ष शुरू होने के बाद से ही पाकिस्तान में इजराइल विरोधी प्रदर्शन बड़े पैमाने […]
नया इंडिया प्रेरणादायक है…स्वयंसेवक मोहन से माननीय मुख्यमंत्री तक का संघर्षशील सफर 1970 के दशक में राष्ट्रीय स्वयं संघ के प्रचारक सालिकराम तोमर का उज्जैन कार्य क्षेत्र हुआ करता था। महाकाल की धार्मिक नगरी के कई परिवारों में उनका खासा सम्मान और प्रभाव था। महाकाल के मंदिर के मुख्य रास्ते पर बुधवरिया बाज़ार है,वहीं पर […]
नवभारत टाइम्स यह दुनिया को चमत्कृत करने और गहरे बदलाव लाने वाली घटना थी जब 2017 में विश्व आर्थिक मंच पर चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पूंजीवाद और व्यापार की जरूरतों पर बल दिया था। इस दौरान उन्होंने दावा किया था की आर्थिक वैश्वीकरण ने वैश्विक विकास को गति दी है और वस्तुओं और पूंजी की […]
राष्ट्रीय सहारा,हस्तक्षेप भरोसा नहीं जगाता,कांग्रेस का हिंदुत्व […]
हस्तक्षेप,राष्ट्रीय सहारा विकसित और विकासशील देशों में नागरिक सुरक्षा पर गहरा अंतर आपदाओं के दौरान नेतृत्व,जवाबदेही और जिम्मेदारी को लेकर दुनियाभर की विभिन्न सरकारों की तुलना में यह तथ्य उभर कर आता है की अपने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर विकसित देश और विकासशील तथा पिछड़े देशों की नीतियों में गहरा अंतर है। विकसित देशों […]
जनसत्ता अब मालदीव से भारत को सुरक्षा चुनौती डेढ़ दशक पहले मालदीव में बहुदलीय लोकतंत्र की स्थापना हुई थी और उसके बाद तत्कालीन राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद ने समुद्र के बढ़ते स्तर और कार्बन उत्सर्जन के बढ़ते खतरों से दुनिया को आगाह करने के लिए समुद्र के तल पर कैबिनेट बैठक आयोजित की थी। […]
संविधान की परवाह किसे है… जब संविधान लिखा जा रहा था उस दौरान देश में कई बड़े सांप्रदायिक दंगे हुए और धार्मिक आधार पर देश का बंटवारा भी हुआ। इसके कारण इन दो देशों के बीच मानव इतिहास का सबसे बड़ा प्रवासी संकट पैदा हुआ,यह बेहद रक्तरंजित,अक्षम्य और अमानवीय था। इसी दौर में भारत में […]