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  ब्रिक्स में अब पुतिनवाद

राष्ट्रीय सहारा अधिनायकवादी नेताओं की वैश्विक नीतियां उनके शासन के लक्ष्यों से प्रभावित होती हैं। वे अपने लिए रणनीतिक साझेदार ढूँढते हैं और  अक्सर उन देशों के साथ संबंध स्थापित करते हैं जो उनके विरोधियों के खिलाफ खड़े होते हैं। यह स्थिति उन्हें वैश्विक मंच पर अपनी स्थिति को मजबूत करने में मदद करती है। […]

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युद्ध भर नहीं,मानवता के लिए गहरा संकट

राष्ट्रीय सहारा,हस्तक्षेप   युद्ध के उद्देश्य स्पष्ट होना चाहिए लेकिन पश्चिम एशिया में ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। यहां क्षेत्रीय प्रभुत्व,सामरिक प्रतिद्वंदिता,राजनीतिक और आर्थिक हितों की अनुकूलता या प्रतिकूलता अलग अलग तरीके से प्रतिद्वंदिता के कई मोर्चों का निर्माण करती है। यही कारण है की पिछले कई दशकों से पश्चिम एशिया अस्थिरता और संघर्षों से […]

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कहीं बेहतर है गुटनिरपेक्षता

राष्ट्रीय सहारा,हस्तक्षेप                                                       सुरक्षा परिषद में स्थाई सदस्यता को लेकर भारत का मानना है कि उसे दुनिया के सबसे बड़े लोकतान्त्रिक देश होने के नाते वैश्विक मंच पर अपनी आवाज […]

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बापू के देशी विकास पर आधारित मॉडल गांव

हमारे जीवन में संवाद का बड़ा महत्व है। यह व्यक्तिगत,सामाजिक और सामुदायिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बापू पूरे भारत को पैदल ही नाप लिए थे। वे भाषण से ज्यादा संवाद पर भरोसा करते थे। वे मानते थे कि संवाद अच्छे संबंधों के निर्माण में मदद करता है,लोगों के बीच विश्वास और समझ को […]

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विकसित देशों में भी एक साथ चुनाव किसी चुनौती से कम नहीं..

राष्ट्रीय सहारा,हस्तक्षेप चुनावी खर्च को नियंत्रित करने के लिए कई देशों में नियम और कानून होते हैं, जिससे चुनावी प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी बनी रहे। एक देश एक चुनाव की प्रक्रिया को समय,लागत, राजनीतिक स्थिरता,भागीदारी और प्रभावी प्रबंधन की दृष्टि से बेहतर माना जाता है। हालांकि इसे लागू करना आसान नहीं है और विकसित देश […]

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हिज़्बुल्लाह से जंग आसान नहीं

राष्ट्रीय सहारा पश्चिमी एशिया का संकट एक जटिल और दीर्घकालिक समस्या है,जो युद्द भी भयवाहता की आशंका को निरंतर बनाएं रखती है। इसके केंद्र में इज़राइल और फिलिस्तीनियों के बीच भूमि के अधिकार और स्वायत्तता का विवाद की खास भूमिका है और इस्लामिक दुनिया के नेतृत्व की लड़ाई ने इसे बेहद खतरनाक बना दिया है। […]

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 क्वाड देशों में अंतर्विरोध    

जनसत्ता अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में सामूहिक सुरक्षा की अवधारणा एक मजबूत और स्थायी तंत्र है,जो शांति और सुरक्षा को सुनिश्चित करने में मदद करती है। भारत,अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के हिन्द प्रशांत में गहरे आर्थिक और सामरिक हित है जिन्हें चीन से लगातार चुनौती मिल रही है। क्वाड इन चारों देशों का प्रतिनिधित्व करने वाला एक […]

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तबाही की नई तकनीक

राष्ट्रीय सहारा सैटेलाइट तकनीक का उपयोग करके,मोसाद संभावित लक्ष्यों की वास्तविक समय की तस्वीरें प्राप्त करता है,जिससे उन्हें रणनीतिक निर्णय लेने में मदद मिलती है।बड़े डेटा एनालिटिक्स टूल का उपयोग करके,मोसाद व्यापक सूचनाओं को तेजी से इकट्ठा करता है,जिससे पैटर्न और ट्रेंड्स की पहचान करना संभव होता है।मोसाद के एजेंटों के लिए सुरक्षित संचार विधियों […]

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पर्यावरण का विध्वंस कर विनाशकारी विकास की ओर बढ़ती दुनिया

     लोकदेश                विकास के नाम पर बेतहाशा कार्बन के उत्सर्जन से वायुमंडल में लगातार तापमान में वृद्धि हो रही है और इसका असर दुनिया भर में देखा भी जा रहा है । आर्कटिक में एक विशाल बर्फ से ढका महासागर है,इसे दुनिया का सबसे ठंडा क्षेत्र माना […]

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युद्दग्रस्त देश और भारतीय कूटनीति

जनसत्ता किसी भी राष्ट्र के राष्ट्रीय हित परिवर्तनशील हो सकते है,स्वाभाविक रूप से इसका प्रभाव वैदेशिक संबंधों पर भी दिखाई पड़ता है। भारत और रूस के बीच कूटनीतिक और सामरिक संबंधों की प्रतिबद्धता का सुनहरा इतिहास रहा है। रूस के धुर विरोधी देश यूक्रेन में भारत के प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी की यात्रा को संतुलन की […]

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