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साझेदारों की सत्तावादी सनक का संकट

राष्ट्रीय सहारा,हस्तक्षेप   यूनाइटेड किंगडम में गॉड सेव द किंग या गॉड सेव द क्वीन को 1745 में राष्ट्रगान के रूप में अपनाया गया था और यह आज तक ऐसा ही है। इसे दुनिया का पहला राष्ट्रगान माना जाता है। गॉड सेव द क्वीन अर्थात् हे ईश्वर,हमारी रानी को रक्षा करो है। भगवान हमारे दयालु […]

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तालिबान के प्रति बदलता रुख

जनसत्ता  रणनीति की दृष्टि से जो नीति उपयुक्त हो,वहीं नीति सर्वोत्तम होगी। अन्तर्राष्ट्रीय राजनीति में यथार्थवाद का सिद्धांत सबसे प्रभावकारी माना जाता है तथा तालिबान की बढ़ती वैश्विक स्वीकार्यता में ताकतवर देशों का यथार्थवादी दृष्टिकोण साफ दिखाई दे रहा है। हाल ही में तालिबान के महत्वपूर्ण नेता और आतंकी सिराजुद्दीन हक़्क़ानी ने अपने शिष्टमंडल के […]

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article भारत मे आतंकवाद

देश की खिलाफत,अरुंधती रॉय

राष्ट्रीय सहारा                वे माओवादी हिंसा को दरकिनार करके इसे गरीब आदिवासियों का विद्रोह  कहती है। करीब डेढ़ दशक पहले उन्होंने रेड कॉरिडोर के केंद्र माने जाने वाले बस्तर की गुपचुप यात्रा की और दंडकारण्य में माओवादियों के साथ काफी वक्त बिताया। वे माओवादियों को भाई,साथी या कॉमरेड कहकर लाल सलाम कहने में फक्र महसूस किया […]

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पाक और इजराइल से संबंधों पर असर

राष्ट्रीय सहारा,हस्तक्षेप  ख्यात दार्शनिक जीन रोस्टैंड ने एक बार कहा था कि एक विवाहित जोड़ा तब उपयुक्त होता है जब दोनों एक ही समय में बहस की आवश्यकता महसूस करते हैं। भारत की नई सरकार के महत्वपूर्ण भागीदार नीतीश कुमार और चन्द्रबाबू नायडू विवाह की रस्मों को तो निभा गए लेकिन इसके बाद के सफर […]

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आपराधिक न्यायालय की फजीहत

प्रजातंत्र रोमन देवी जस्टीशिया,आंखों पर पट्टी बंधी न्याय की देवी के रूप में न्यायालयों में प्रतीक के तौर पर नजर आती है। उनके एक हाथ में तराजू और दूसरे में तलवार होती है। आंखों पर पट्टी न्याय की निष्पक्षता का प्रतीक है। तराजू न्याय के संतुलन का प्रतीक है। यदि दूसरे शब्दों में कहें तो […]

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पश्चिम में दंड नहीं पुनर्वास पर बल

राष्ट्रीय सहारा,हस्तक्षेप  दंड के औचित्य और उद्देश्य को पश्चिम और शेष दुनिया में गहरा वैचारिक और वैधानिक अंतर है। आमतौर पर यह देखा गया है कि विकासशील और पिछड़े देशों में न्याय की अवधारणा और नीतियां प्रतिशोध पर आधारित कड़ी होती है और इसे लोकप्रिय भी माना जाता है। प्रतिशोधात्मक न्याय आपराधिक न्याय की एक […]

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संकट में फिलिस्तीन राष्ट्र का सपना

जनसत्ता क्षेत्र विस्तारवाद का अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में बहुत महत्व रहा है। राजनीतिक सत्ताएं इसे सैन्यवादी विचारधारा से पोषित करती है जिसके अनुसार  यह माना जाता है कि शक्ति से ही शान्ति आती है। मध्यपूर्व में इस्राइल विस्तारवाद की रणनीति को आत्मसात कर चूका है वहीं फिलिस्तीन की विभाजित सत्ताओं पर हावी हमास शक्ति और आक्रमण को […]

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इंटरनेशनल कोर्ट का संकट

राष्ट्रीय सहारा                                                                                                              […]

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यहूदी इतने आक्रामक क्यों है…?

पॉलिटिक्स     इजराइल को न तो पश्चिम पर भरोसा है,न  अमेरिका पर और न ही अरबों पर। दरअसल यहूदियों को खत्म करने की कोशिशों में सब शामिल रहे है। यहीं कारण है कि यहूदी अपना रास्ता खुद चुनते है  फिर चाहे उन्हें  इसकी कोई भी कीमत अदा करना पड़े, लेकिन वे अपनी मंजिल तक पहुँच […]

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क्रूर इब्राहिम रईसी का अंत

  नवभारत टाइम्स इतिहास कभी किसी को माफ नहीं करता और कम से कम ईरान के मरहूम  राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी को तो कभी भी नहीं जिन्होनें अपने  जीवनकाल में हिजाब पहनों नहीं तो हम तुम्हारे सिर पर मुक्का मारेंगे,मुसलमान हो या मार्क्सवादी,राजनीतिक विरोधियों का अंत ईश्वरीय इच्छा है जैसे नारे गढ़े और कानून का बेजा […]

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