अपमान पर अभिव्यक्ति की गांधीय संकल्पना
सुबह सवेरे बापू हिन्दुस्तान की महान परम्परा के यकीनी तौर पर नुमाइंदे थे,यह परम्परा थी,संन्यास की और त्याग की। गुलामों के प्रति बर्बरता,अन्याय,शोषण और अत्याचारों में रमे पश्चिमी समाज के लिए गांधी एक कौतुहल थे। लोग गांधी से मिलना तो चाहते थे लेकिन उन्हें अपमानित करके वे भारतीय समाज का आत्मविश्वास तोड़ने का कोई मौका […]
