महात्मा गांधी के देश से दुनिया सांस्कृतिक सद्भाव सीखेंगी
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सुबह सवेरे .. भारत की आज़ादी का इतिहास संघर्षों की कई अनकही कथाओं से भरा पड़ा है, पर यहां समन्वय और साझेदारियों की यादगार और निर्णायक मिसालें भी है। दरअसल भारत की एकता और अखंडता को कायम रखने के लिए डॉ.अंबेडकर और महात्मा गांधी के बीच जो समन्वय और साझेदारी हुई वह […]
जब बापू ने कहा,जैसा राम नचाता है,वैसा नाचता हूं…! बापू को गांव की संस्कृति से बहुत प्यार था,इसीलिए वे सेवाग्राम में आकर रहने लगे। उन्होंने शहर वासियों को गांव में आकर रहने और वहां का जीवन अपनाने की सलाह दी। एक बार शहर के लोगों का एक समूह बापू से मिलने सेवाग्राम आया […]
राष्ट्रीय सहारा,हस्तक्षेप पेंशन-जिंदगी के साथ भी,जिंदगी के बाद भी दुनिया में कामकाजी बुजुर्गों का ख्याल,भारत में युवा बेहाल बुजुर्गों का दीर्घायु होना समाज पर बोझ है या फायदा,यह इस चुनौती के लिए निपटने की तैयारियों पर निर्भर करता है। 2019 में जापान में हुई जी-20 बैठक में बुढ़ापे को चर्चा की प्राथमिकता सूची में रखा […]
जिन्होंने राम के चरित्र पर मानस बनाया…! अठारह सौ उनहत्तर में अंग्रेजों द्वारा स्थापित इलाहबाद उच्च न्यायालय को भारत की सबसे पुरानी अदालतों में शुमार किया जाता है। उन्नीस सौ दस में न्यायालय के सामने रामलीला के आयोजन को लेकर एक मुकदमा आया। छन्नू दत्त व्यास बनाम बाबु नंदन मिश्र के केस पर फैसला देते […]
पॉलिटिक्स राम और मैहर ईश्वर किसी को कभी अकेला नहीं छोड़ता,शिद्दत से चाहो तो… मैहर कहती है जैसे पुरुष के लिए स्त्री है वैसे ही ट्रांस वुमन के लिए भगवान ने ट्रांस मेन बनाया है। दिल्ली की शामें तो रंगीन होती ही है। कहते है दिल्ली दिलवालों की है और जिंदगी की अनन्त संभावनाओं को […]
पाकिस्तान के संस्थापक जिन्ना तपेदिक जैसी घातक बीमारी से मरे तो राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जीवनपर्यन्त स्वस्थ रहे। 30 जनवरी 1948 को शरीर पर कई गोलियों से अविचलित गांधी हे राम कहकर दुनिया से बिदा हुए। जिन्ना की मौत के समय पाकिस्तान स्थित फ़्रांसिसी दूतावास में कॉकटेल पार्टी हो रही थी। उस पार्टी में लियाक़त अली ख़ान शामिल थे जो […]
जनता के अधिकारों की मांग के लिए सोलह साल तक अनशन पर रहने वाली मणिपुर की इरोम शर्मिला 2017 में हुए विधानसभा चुनावों में महज 90 वोट हासिल कर सकी थी। उनसे ज्यादा वोट नोटा को मिले। इरोम ने पूर्वोत्तर के कुछ राज्यों में सशस्त्र बल विशेषाधिकार अधिनियम के ख़िलाफ़ सोलह साल तक भूख हड़ताल की थी। इरोम […]
राष्ट्रीय शक्ति को मूल रूप से सैनिक शक्ति समझने की मध्ययुगीन और प्राचीन अवधारणा को पीछे छोड़कर दुनिया के अधिकांश देश भूगोल,प्राकृतिक साधन,औद्योगिक क्षमता,जनसंख्या,राष्ट्रीय चरित्र,राष्ट्रीय मनोबल,कूटनीति और सरकार की नीति के नूतन और दीर्घकालीन उपायों के आधार पर आगे बढ़ रहे है। वहीं इस्लामिक गणराज्य पाकिस्तान की सरकारों की नीतियां सैन्य प्रभावों से […]
सोवियत नेता निकिता ख्रुश्चेव 1960 के दशक में भारत के बहुत अच्छे दोस्त थे और उस समय सोवियत संघ और चीन के बीच सीमा पर गहरा तनाव था ।इन परिस्थितियों में भी 1962 में चीन ने जब भारत पर हमला किया तो उसे रोकने के लिए जो सामरिक दबाव बनाया गया था,वह अमेरिका का था और […]