#ब्रह्मदीप अलूने
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ब्रिक्स में अब चीनी बादशाहत,राष्ट्रीय सहारा

राष्ट्रीय सहारा नए सदस्य देशों के शामिल होने से निश्चित ही ब्रिक्स मजबूत होगा। लेकिन  इसका सबसे ज्यादा फायदा चीन को रणनीतिक रूप से तथा उसकी मुद्रा युआन को होने वाला है।                         चीनी बाज़ार पहले से ही अच्छी तरह से स्थापित है और […]

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 विकसित देशों में राजधानी का प्रशासन

राष्ट्रीय सहारा,हस्तक्षेप   स्थानीय,क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर राजधानी का प्रमुख स्थान होता है।  राष्ट्रीय राजधानी की उपयोगिता और महत्ता की दृष्टि से तथा इसके सफल संचालन और प्रबंधन के लिए विभिन्न निकायों  के बीच वैधानिक शक्ति का समन्वय अपरिहार्य माना जाता है। विकसित देशों मे स्थित बर्लिन,कैनबरा,वाशिंगटन डीसी,लंदन या पेरिस का प्रबंधन और प्रशासन […]

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article book गांधी है तो भारत है

जब राजद्रोह राष्ट्रभक्ति की जरूरत बन जाएं … !

सुबह सवेरे    सरकार के प्रति अच्छी राय रखने वाले विचारों को ही केवल अस्तित्व में या सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होना चाहिये,क्योंकि गलत राय सरकार और राजशाही दोनों के लिये नकारात्मक प्रभाव उत्पन्न कर सकती थी। यह विचार सत्रहवीं सदी मे ब्रिटेन मे राजशाही को मजबूत बनाएं रखने के लिए कानून के रूप मे […]

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नेपाल में चीन का प्रभाव

दैनिक जागरण                                                                       ग्लोबल सिक्योरिटी इनिशिएटिव या जीएसआई,एशिया के सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने की चीन की नई रणनीतिक पहल है। […]

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article book भारत मे आतंकवाद

वैदेशिक नीति में विरोधाभास

राष्ट्रीय सहारा  शांति संरक्षण कूटनीति का उद्देश्य है जबकि युद्द कूटनीति का अंत। यदि कोई राष्ट्र कूटनीति को प्रयोग में नहीं लाना चाहता तो राष्ट्रीय हितों की अभिवृद्धि के लिए उसके पास युद्द के अतिरिक्त और कोई विकल्प नहीं बचता। पाकिस्तान की भारत के प्रति युद्धक नीति कई दशकों चली आ रही है,वहीं एक लोकतांत्रिक […]

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म्यांमार के सामरिक संकेत

जनसत्ता   भारत के पड़ोसी देशों के बंदरगाहों में चीन का निवेश हिंद महासागर के क्षेत्र में समुद्री ऊर्जा के रास्तों पर नियंत्रण करने और दक्षिण एशिया के देशों में बंदरगाहों को विकसित करके अपनी ताक़त का विस्तार करने की उसकी योजना का एक हिस्सा है। चीन के नौसैनिक,उन समुद्री ठिकानों पर अन्य देशों के […]

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 मजदूरों के मूल मुद्दों से दूर मजदूर यूनियनें  

सुबह सवेरे   भारत की आज़ादी के आंदोलन में मराठी मानुष की पहचान बने और बाद में  देश के रेल मंत्री बने सदाशिव कानोजी पाटिल को मुम्बई का बेताज बादशाह कहा जाता था। लगातार चार बार सांसद चुने जाने वाले पाटिल से जब एक पत्रकार ने पूछा की क्या उन्हें कोई चुनाव में हरा सकता […]

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बातें कम स्कैम ज्यादा

स्वतंत्र समय,#नीरज बधवार,जिनके व्यंग्य अच्छों अच्छों की शामत ला देते है…!                                                                     कहते हो व्यंग्य में तत्कालीन व्यवस्था का उपहास उड़ाया जाता […]

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वैश्विक राजनीतिक व्यवस्थाएं,सामाजिक प्रतिष्ठा से अभिशिप्त है

राष्ट्रीय सहारा,हस्तक्षेप दुनियाभर की आधुनिकीकृत शासन व्यवस्थाओं में भी सामाजिक,सांस्कृतिक और आर्थिक तौर से तमाम तबक़ों में खाई साफ़ तौर पर दिखती है। इसका असर देश के राजनीतिक जीवन और व्यवस्थाओं को खासा प्रभावित करता है। इस बात को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि आप,लंदन में रहते हैं या दिल्ली,बीजिंग,मास्को या  न्यूयॉर्क में।  आप […]

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  परम योगी परशुराम,जिन्हें पृथ्वी पर कोई लोभित नहीं कर पाया…

सुबह सवेरे भगवान परशुराम युगों युगों से एकाकी नायक है तभी तो वे राम के काल में भी थे और कृष्ण के काल में भी उनके होने की चर्चा होती है। वे  चिरंजीवी है और इसीलिए यह शाश्वत सत्य है कि कल्प के अंत तक वे धरती पर ही तपस्यारत रहेंगे। परशुराम सम्पूर्णता का नाम […]

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