विदेश नीति को विवेकानन्द की पब्लिक डिप्लोमेसी से सीखने की जरूरत
सुबह सवेरे स्वामी विवेकानन्द ने बहुत पहले यह समझ लिया था कि देशों के बीच संबंध केवल सरकारों से नहीं बल्कि जनता से जनता के बीच बनते हैं। यही पब्लिक टू पब्लिक डिप्लोमेसी का मूल भाव है। 1893 में शिकागो के विश्व धर्म संसद में उनका ऐतिहासिक संबोधन किसी राजनयिक मिशन का हिस्सा नहीं था,फिर […]
