#भारत
article

बांग्लादेश की कूटनीति और भारत

जनसत्ता  राजनीतिक बदलाव किसी देश के राजनीतिक निर्णयों,रणनीतियों और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों को किस प्रकार प्रभावित कर सकते है इसका बड़ा  उदाहरण बांग्लादेश है। शेख हसीना की सरकार के तख्तापलट के बाद बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने  देश की वैदेशिक नीति में अभूतपूर्व बदलाव कर पाकिस्तान के साथ सामरिक,राजनीतिक और नागरिक संबंधों को प्राथमिकता से बहाल […]

Read More
article

अंग्रेजों की भविष्यवाणी को भारत के संविधान ने जब गलत साबित  कर दिया…

संविधान दिवस-26 नवम्बर   जे.ई.वेल्डन कलकत्ता के पूर्व बिशप थे। भारत की आज़ादी के प्रश्न पर 1915 में उन्होने कहा था की,भारत से ब्रिटिश साम्राज्य का अंत एक अकल्पनीय घटना होगी। जैसे ही अंतिम ब्रिटिश सिपाही बंबई या कराची के बंदरगाह से रवाना होगा,हिंदुस्तान परस्पर धार्मिक और नस्लीय समूह के लोगों का अखाड़ा बन जाएगा। […]

Read More
article

भारत चीन संबंधों का भविष्य

जनसत्ता  भारत और चीन के बीच सैन्य गतिरोध एक संवेदनशील मुद्दा है।  दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक,आर्थिक और राजनीतिक संबंध हैं,वहीं सीमा विवाद और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा ने इन संबंधों को प्रभावित किया है। दोनों देशों में वार्ता के माध्यम से सीमा मुद्दों को सुलझाने की कोशिशें कई बार हुई है लेकिन ऐतिहासिक कारण और अलग […]

Read More
article

  ब्रिक्स में अब पुतिनवाद

राष्ट्रीय सहारा अधिनायकवादी नेताओं की वैश्विक नीतियां उनके शासन के लक्ष्यों से प्रभावित होती हैं। वे अपने लिए रणनीतिक साझेदार ढूँढते हैं और  अक्सर उन देशों के साथ संबंध स्थापित करते हैं जो उनके विरोधियों के खिलाफ खड़े होते हैं। यह स्थिति उन्हें वैश्विक मंच पर अपनी स्थिति को मजबूत करने में मदद करती है। […]

Read More
article

कहीं बेहतर है गुटनिरपेक्षता

राष्ट्रीय सहारा,हस्तक्षेप                                                       सुरक्षा परिषद में स्थाई सदस्यता को लेकर भारत का मानना है कि उसे दुनिया के सबसे बड़े लोकतान्त्रिक देश होने के नाते वैश्विक मंच पर अपनी आवाज […]

Read More
article

विकसित देशों में भी एक साथ चुनाव किसी चुनौती से कम नहीं..

राष्ट्रीय सहारा,हस्तक्षेप चुनावी खर्च को नियंत्रित करने के लिए कई देशों में नियम और कानून होते हैं, जिससे चुनावी प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी बनी रहे। एक देश एक चुनाव की प्रक्रिया को समय,लागत, राजनीतिक स्थिरता,भागीदारी और प्रभावी प्रबंधन की दृष्टि से बेहतर माना जाता है। हालांकि इसे लागू करना आसान नहीं है और विकसित देश […]

Read More
article

 क्वाड देशों में अंतर्विरोध    

जनसत्ता अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में सामूहिक सुरक्षा की अवधारणा एक मजबूत और स्थायी तंत्र है,जो शांति और सुरक्षा को सुनिश्चित करने में मदद करती है। भारत,अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के हिन्द प्रशांत में गहरे आर्थिक और सामरिक हित है जिन्हें चीन से लगातार चुनौती मिल रही है। क्वाड इन चारों देशों का प्रतिनिधित्व करने वाला एक […]

Read More
article

युद्दग्रस्त देश और भारतीय कूटनीति

जनसत्ता किसी भी राष्ट्र के राष्ट्रीय हित परिवर्तनशील हो सकते है,स्वाभाविक रूप से इसका प्रभाव वैदेशिक संबंधों पर भी दिखाई पड़ता है। भारत और रूस के बीच कूटनीतिक और सामरिक संबंधों की प्रतिबद्धता का सुनहरा इतिहास रहा है। रूस के धुर विरोधी देश यूक्रेन में भारत के प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी की यात्रा को संतुलन की […]

Read More
article

विकसित देशों में महिला सुरक्षा को लेकर नागरिक भागीदारी पर जोर

राष्ट्रीय सहारा,हस्तक्षेप किताबों में लिखे कानून और उनके क्रियान्वयन के प्रति जागरूकता तथा प्रतिबद्धता किसी नागरिक समाज के अलग अलग गुण है। विकसित तथा पिछड़े समाज में यह अंतर बड़ा गहरा है जो लैंगिक असमानता और महिलाओं के प्रति हिंसा के रूप में सामने आता है। महिलाओं के खिलाफ हिंसा हर देश,संस्कृति और समुदाय में […]

Read More
article

 विकसित बांग्लादेश का सपना और भारत की चुनौती

जनसत्ता बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने वैदेशिक संबंधों को लेकर बेहद यथार्थवादी दृष्टिकोण अपना रखा है जिसके अंतर्गत यह  माना जाता है की विदेश नीति संबंधी निर्णय राष्ट्रीय हित के आधार पर लिए जाना चाहिए न कि नैतिक सिद्धांतों और भावनात्मक मान्यताओं के आधार पर। दरअसल भारत की कूटनीतिक,सैन्य और आर्थिक मदद से अस्तित्व […]

Read More