#ब्रह्मदीप अलूने
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वैश्विक व्यवस्थाओं में वक्फ

राष्ट्रीय सहारा,हस्तक्षेप   तेरहवीं शताब्दी में एक विद्वान हुआ करते थे मार्को लोम्बार्डो।  उन्होंने धर्म और राजनीति के संबंधों पर एक दिलचस्प बात कहीं थी,जो अब भी कहावतों में सुनाई पड़ती है।  मार्को लोम्बार्डो ने कहा था,रोम में दो सूर्य हुआ करते थे,एक दुनिया का मार्ग दिखाता था और दूसरा ईश्वर का मार्ग।  लेकिन समय […]

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  बिम्सटेक अब सार्क का विकल्प

             राष्ट्रीय सहारा                                      शक्ति संतुलन अंतरराष्ट्रीय संबंधों को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण राजनीतिक सिद्धांत है,जिसका उद्देश्य विभिन्न देशों या शक्ति समूहों के बीच एक ऐसा संतुलन बनाना है,जिससे कोई भी एक देश या समूह अत्यधिक शक्तिशाली न हो और दूसरे […]

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सकते में सर्वसत्तावाद

 राष्ट्रीय सहारा,हस्तक्षेप  जब सरकार,विरोधी आवाज़ों को दबाती है तो यह अधिनायकवाद की ओर एक कदम होता है। दुनिया के कई देशों में ऐसी अधिनायकवादी और सर्व सत्तावादी सरकारों को व्यापक जनविरोध का सामना करना पड़ रहा है जिन्होंने लोकतांत्रिक तरीके से सत्ता में आने के बाद भी व्यक्तिगत स्वतंत्रता तथा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को प्रभावित […]

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मप्र में दक्षिण भारतीय भाषाओं में शिक्षा 

राष्ट्रीय सहारा    मध्य प्रदेश सरकार ने उच्च शिक्षा नीति में एक बड़ा बदलाव करते हुए कई दक्षिण भारतीय भाषाओं को राज्य शिक्षा की मुख्य धारा में शामिल कर बेहद सकारात्मक संदेश दिया है। अब राज्य के कॉलेजों में हिंदी,अंग्रेजी,संस्कृत और उर्दू के अलावा,बंगाली,मराठी,तेलुगु,तमिल,गुजराती और पंजाबी जैसी भारतीय भाषाओं में भी शिक्षा दी जाएगी। इस […]

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नेपाल भी सैन्य शासन की ओर बढ़ रहा है….

वेबदुनिया  सिंहासन खाली करो,हमारे राजा आ रहे है,राजा आओ देश बचाओं जैसे नारों के साथ काठमांडू में आगे बढती हुई भीड़ नेपाल में एक बार फिर राजतन्त्र की वापसी की मांग को लेकर हिंसक प्रदर्शन कर रही है। 28 मई 2008 में नेपाल में 240 सालों से चली आ रही राजशाही ख़त्म हुई थी,लेकिन डेढ़ […]

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सैन्य शासन की आशंका 

राष्ट्रीय सहारा  बांग्लादेश में लाखों मजदूर सड़कों पर है। ये मजदूर गारमेंट फैक्ट्रियों के बंद होने से परेशान हैं। जो फैक्ट्रियां चल रही हैं,वहां काम करने वाले मजदूरों को वेतन नहीं मिल रहा है। मजदूरों के लगातार विरोध प्रदर्शन के कारण कई फैक्ट्रियां बंद हो गई हैं। निवेशक  बांग्लादेश छोड़कर जा रहे है जबकि मजदूर कारखाने को […]

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जल रहा है सीरिया

राष्ट्रीय सहारा  राजनीतिक अस्थिरता,धार्मिक हिंसा,चरमपंथ,आतंकवाद और विदेशी हस्तक्षेप सीरिया की मुख्य समस्या रही है और ऐसा लगता है की असद के पतन के बाद भी मध्यपूर्व  के इस देश में शांति लौटती हुई दिखाई नहीं दे रही है। असद के समर्थकों को मोहम्मद अल-जुलानी पर भरोसा नहीं है और उनकी आशंका सच भी साबित हुई […]

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 सीरिया में गृहयुद्द की आशंका

 जनसत्ता                अल-क़ायदा और इस्लामिक स्टेट की छाया में रहने वाले सीरिया के सत्तारूढ़ संगठन हयात तहरीर अल-शाम या एचटीएस की पृष्ठभूमि को लेकर कई सवाल खड़े हुए थे कि उसके नेतृत्व में सीरिया का भविष्य क्या होगा। एचटीएस के नेता अबू मोहम्मद अल जुलानी अपनी छवि को जिहादी लड़ाके से बदल कर आधुनिक और […]

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बलूचिस्तान में ध्वस्त हो गया जिन्ना का धर्म आधारित राष्ट्रवाद

वेबदुनिया पाकिस्तान में करीब 97 फीसदी मुसलमान है लेकिन उनमें धार्मिक पहचान से ज्यादा सांस्कृतिक पहचान के भाव है और पाकिस्तान के हुक्मरान इस  खूबी को देश के लिए सबसे बड़ा संकट समझते रहे है। सांस्कृतिक पहचान व्यापक होती है और इसमें भाषा,संगीत,कला,परंपराएं,रीति-रिवाज आदि शामिल होते हैं। जबकि धार्मिक पहचान विशेष रूप से धार्मिक विश्वासों […]

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आज़ाद बलूचिस्तान की आग

राष्ट्रीय सहारा  भारतीय सांस्कृतिक एकता की जादुई हकीकत को नजरअंदाज कर,इस्लामिक राष्ट्रवाद की कपोल कल्पित अवधारणा के बूते भाषा,क्षेत्र,जातीय और सांस्कृतिक विविधता के खत्म होने तथा एकरूपता में बंधने की मोहम्मद अली जिन्ना की सोच को पश्तूनों ने शुरूआती दौर में ही गलत ठहरा दिया था। 1971 में पृथक बांग्लादेश ने उसे आइना दिखाया और […]

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