युद्द विराम या रणनीतिक विराम
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युद्द विराम या रणनीतिक विराम

        राष्ट्रवार्ता              

युद्द विराम या रणनीतिक विराम

 युद्द विराम की कूटनीति का मार्ग लंबा होता है और अविश्वनीय नेताओं के बूते तो इसे तय नहीं किया जा सकता। ट्रम्प भरोसे काबिल नहीं है,नेतान्याहू बेलगाम है और ईरान में सत्ता की चाभी अब राजनीति और आईआरजीसी के बीच उछाली जा रही है। राजनीतिक इच्छाशक्ति, सैन्य संयम और परस्पर विश्वास बहाली की चुनौतियों के बीच  मध्य-पूर्व का इतिहास बताता है कि जब मूल विवादों का समाधान नहीं होता, तब युद्धविराम अक्सर स्थायी शांति नहीं, बल्कि अगले टकराव से पहले का एक रणनीतिक विराम बनकर रह जाता है।
अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम लागू हो जाने के बावजूद दोनों देशों के बीच अनेक महत्वपूर्ण मुद्दों पर मतभेद बने हुए है।  कई जटिल बिंदुओं पर सहमति बनाना आसान नहीं है। इज़राइल ने अपने सुरक्षा हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का संकेत दिया है। यदि भविष्य में हिज़्बुल्ला, हमास या हूती की ओर से इज़राइल पर कोई बड़ा हमला होता है और इज़राइल उसके लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराता है, तो सैन्य तनाव दोबारा बढ़ सकता है। अमेरिकी घरेलू राजनीति में भी ईरान नीति को लेकर घरें मतभेद है। ऐसे में यदि लंबित मुद्दों पर वार्ता विफल रहती है या क्षेत्र में कोई नई सैन्य घटना होती है, तो अमेरिका और ईरान के बीच तनाव पुनः बढ़ सकता है। ईरान पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद अमेरिका के कई पारंपरिक सहयोगी देशों, खासकर यूरोप के कुछ देशों ने खुलकर चिंता व्यक्त की और तनाव कम करने की आवश्यकता पर जोर दिया था। ऐसे में युद्धविराम की पहल को अमेरिका की उस कोशिश के रूप में भी देखा जा सकता है, जिसके माध्यम से वह अपने सहयोगियों का विश्वास पुनः मजबूत करना चाहता है और यह संदेश देना चाहता है कि उसकी प्राथमिकता केवल सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि कूटनीतिक समाधान भी है।

दूसरी ओर सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन और कतर लंबे समय तक चलने वाले युद्ध से आर्थिक और सामरिक दोनों स्तरों पर प्रभावित हो रहे थे। क्षेत्रीय अस्थिरता का सीधा प्रभाव ऊर्जा आपूर्ति, निवेश और समुद्री व्यापार पर पड़ रहा था। युद्धविराम से इन देशों को अपनी सुरक्षा रणनीतियों की समीक्षा और क्षेत्रीय संतुलन की नई संभावनाओं पर काम करने का अवसर मिल सकता है। इसी प्रकार, इज़राइल के लिए भी यह विराम सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हो सकता है। यदि भविष्य में किसी नए संघर्ष की आशंका बनी रहती है, तो वह अपनी वायु एवं मिसाइल रक्षा प्रणाली को और मजबूत करने, सैन्य संसाधनों के पुनर्गठन तथा कूटनीतिक तैयारी के लिए इस समय का उपयोग कर सकता है।
वैश्विक स्तर पर सबसे महत्वपूर्ण पक्ष हार्मुज़ जलडमरूमध्य है, जिससे होकर विश्व के समुद्री तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा गुजरता है। युद्धविराम ने फिलहाल इस मार्ग पर तत्काल संकट की आशंका को कम किया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को कुछ राहत मिली है। इसे अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने की दिशा में एक सीमित लेकिन महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा सकता है। इस साल नवम्बर में अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी को कांग्रेस के दोनों सदनों में बहुमत बचाने के लिए कड़ी चुनौती का सामना करना है।  वहीं इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतान्याहू को इस वर्ष के अंत में होने वाले चुनावों में अपनी साख और सत्ता बचानी है। घरेलू मोर्चे पर भारी आलोचना झेल रहे नेतान्याहू को जीतने के लिए एक मजबूत सुरक्षा छवि की आवश्यकता है। यदि युद्धविराम अगले कुछ महीनों तक कायम रहता है, तो इसका सबसे बड़ा राजनीतिक लाभ अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प को मिल सकता है। उनके लिए यह संदेश देना आसान होगा कि उन्होंने एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध को नियंत्रित किया और अमेरिकी हितों की रक्षा भी की। इससे आगामी चुनावों में उनकी राजनीतिक स्थिति मजबूत हो सकती है। दूसरी ओर, बेंजामिन नेतन्याहू के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा लंबे समय से घरेलू राजनीति का सबसे प्रभावी आधार रहा है। ईरान के साथ सैन्य टकराव के  दौरान वहां के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मृत्यु  को नेतन्याहू,इज़राइल की  सैन्य या रणनीतिक सफलता से जोड़कर प्रस्तुत कर तथा उसे अपनी सुरक्षा नीति की बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश करने का प्रयास कर सकते है। हार्मुज़ जलडमरूमध्य से विश्व के तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा गुजरता है।यहां  अस्थिरता बढ़ने से तेल की कीमतों में तेज उछाल  का असर विश्व अर्थव्यवस्था और विभिन्न देशों की घरेलू राजनीति पर पड़ रहा था। कई देशों में आगामी चुनावों को देखते हुए अमेरिका सहित अनेक सरकारें ऊर्जा संकट और महंगाई से बचना चाहेंगी। इसलिए युद्धविराम से अंतरराष्ट्रीय बाजारों को राहत मिली है और देशों को अपने ऊर्जा भंडार मजबूत करने का समय भी मिला है।
ईरान का परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय शक्ति-संतुलन,  ट्रम्प की राजनीति, सहयोगी देशों की प्राथमिकताएं, वैश्विक ऊर्जा बाजार की स्थिरता, इज़राइल की सुरक्षा रणनीति और ईरान के प्रभाव को सीमित करने की इच्छा रखने वाले खाड़ी देशों के हित, ऐसे जटिल  प्रश्न है जिनका समाधान केवल युद्धविराम से संभव नहीं है। इसलिए यह संघर्ष भले ही फिलहाल थम गया हो, लेकिन इसके मूल कारण अभी भी मौजूद हैं। यही कारण है कि मध्य-पूर्व में स्थायी शांति की राह अत्यंत कठिन और अनिश्चित दिखाई देती है। बहरहाल इस युद्धविराम को स्थायी समाधान के बजाय एक रणनीतिक अंतराल के रूप में देखना अधिक यथार्थवादी होगा।

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