अमेरिकी कूटनीति की बदलती प्राथमिकताएं
जनसत्ता अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की विदेश नीति में इन दिनों कूटनीति का एक ऐसा विरोधाभास दिखाई दे रहा है, जिसने […]
जनसत्ता अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की विदेश नीति में इन दिनों कूटनीति का एक ऐसा विरोधाभास दिखाई दे रहा है, जिसने […]
नवभारत विदेश नीति का सबसे अहम गुण राष्ट्रीय हितों की रक्षा करते हुए बदलती अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के अनुसार स्वयं को ढालने की क्षमता होना चाहिए। इसे रणनीतिक लचीलापन कहा जा सकता है। बांग्लादेश के संदर्भ में आज भारत की विदेश नीति इसी कसौटी पर खड़ी है। ढाका में राजनीतिक सत्ता के बदलते समीकरणों ने […]
प्रजातंत्र तसलीमा नसरीन का लगभग दो दशक बाद कोलकाता के रवींद्र सदन में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने जा रही है,यह केवल एक साहित्यिक घटनाक्रम नहीं है। तसलीमा नसरीन, दक्षिण एशिया की कट्टरपंथी राजनीति के विरोध में डटकर लिखने वाली ऐसी लेखिका है,जिनका जीवन का संघर्ष अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, धार्मिक कट्टरता, महिला अधिकारों और निर्वासन […]
राष्ट्रवार्ता युद्द विराम या रणनीतिक विराम युद्द विराम की कूटनीति का मार्ग लंबा होता है और अविश्वनीय नेताओं के बूते तो इसे तय नहीं किया जा सकता। ट्रम्प भरोसे काबिल नहीं है,नेतान्याहू बेलगाम है और ईरान में सत्ता की चाभी अब राजनीति और आईआरजीसी के बीच उछाली जा रही है। राजनीतिक इच्छाशक्ति, सैन्य […]
पीपुल्स समाचार विश्व के शीर्ष नेताओं की सुरक्षा से जुड़े हैरतअंगेज़ किस्से दुनिया के सामने आते रहे है। व्लादिमीर पुतिन,अपनी सुरक्षा को लेकर हमेशा बेहद सतर्क रहते है। जासूसी और स्वास्थ्य की गोपनीयता बनाए रखने के लिए उनके अंगरक्षक उनका मल-मूत्र तक एक विशेष सूटकेस में भरकर रूस वापस ले जाते है। इसके साथ […]
नवभारत चीन की राजधानी बीजिंग के केंद्र में स्थित ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल में जब अमेरिकी राष्ट्रगान बजा और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तथा चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग एक साथ मंच पर दिखाई दिए,तो यह दृश्य केवल एक राजनयिक औपचारिकता नहीं था। यह उस वैश्विक शक्ति-संतुलन का प्रतीक था जिसमें दुनिया की दो सबसे […]
सत्ता मेल अविश्वास की कूटनीति देशों को यह याद दिलाती है कि वे केवल अपने हितों पर निर्भर रहें। जब देशों को एक-दूसरे पर भरोसा नहीं होता,तो वे समझौते बहुत सोच-समझकर और स्पष्ट शर्तों के साथ करते है,जिससे भविष्य में धोखा मिलने की संभावना नहीं हो। 50 साल की कट्टर दुश्मनी को भूल कर किसी […]
दैनिक जागरण,राष्ट्रीय कम्युनिस्ट रूस और दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश भारत के आपसी मजबूत सम्बन्ध पश्चिम को हैरान और परेशान करते रहे है,यह समस्या दशकों पुरानी है। रूस के साथ सामरिक और आर्थिक संबंध मजबूत रहने से भारत पूंजीवादी दुनिया की महत्वाकांक्षी नीतियों के शिकंजे […]
राष्ट्रीय सहारा,हस्तक्षेप अंतरराष्ट्रीय राजनीति में दो धारी कूटनीति एक अत्यंत व्यावहारिक और प्रभावी उपकरण माना जाता है। विशेषकर तब जब कोई देश अपने हितों को बहुपक्षीय रूप से सुरक्षित करना चाहता है। यह नीति न केवल रणनीतिक लाभ दे सकती है,बल्कि विश्व मंच पर एक देश की स्थिति को भी मजबूत भी कर सकती है। […]
राष्ट्रीय सहारा,हस्तक्षेप लिथुआनिया यूरोप महाद्वीप के उत्तरी भाग में बाल्टिक सागर के किनारे स्थित एक देश है। यह तीन बाल्टिक देशों में से सबसे बड़ा है। भारत पूर्वी यूरोप में महत्त्वपूर्ण औद्योगिक क्षेत्रों के प्रवेश द्वार के रूप में लिथुआनिया की रणनीतिक स्थिति का लाभ उठाने की कूटनीतिक कोशिशें लगातार कर रहा है। भक्ति और […]