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भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौता

जनसत्ता विकसित देशों को लेकर एक आमतौर पर यह राय है की लोग विकासशील और पिछड़े देशों से आयात किए गए सामान को ऊंचे दाम में ख़ुशी ख़ुशी खरीद लेते है। इसका कारण विकसित देशों के लोगों की आय की उच्चता को माना जाता है। इन देशों में प्रवासी और आप्रवासियों के प्रति  व्यवहार बेहतर […]

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यूरोप और अमेरिकी एकता भारत के हित में

स्वदेश  अब  ट्रम्प यथार्थवाद की उस सच्चाई को स्वीकारने के बहुत करीब नजर आ रहे है जिसके अंतर्गत अमेरिका और  रूस के बीच शक्ति संतुलन की प्रतिस्पर्धा में बढ़त हासिल करने के लिए अमेरिका को यूरोप की जरूरत है। अमेरिका विश्व की सबसे बड़ी सैन्य,आर्थिक और तकनीकी शक्ति है लेकिन आज की बहुध्रुवीय  वैश्विक व्यवस्था […]

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अमेरिका और यूरोप पर भारत को नहीं है भरोसा

  नवभारत टाइम्स                            अन्तर्राष्ट्रीय राजनीति में बलपूर्वक कूटनीति एक आकर्षक रणनीति है। यह पारंपरिक सैन्य बल का उपयोग किए बिना राजनीतिक लागतों के साथ राजनीतिक उद्देश्यों को प्राप्त करने की संभावना प्रदान करती है। नाटो के महासचिव मार्क रुट ने रूस के बहाने भारत और ब्राज़ील को धमकाने की जो कोशिशें की है,उसमें नाटो […]

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ईरान की मिसाइलों ने हिला दी महाशक्तियों की नींव

जनसत्ता  सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्य और परमाणु शक्ति संपन्न देश अमेरिका,रूस,चीन,ब्रिटेन और फ़्रांस भी विश्वासपूर्वक यह दावा नहीं कर सकते की उनकी वायु सुरक्षा प्रणाली अभेद्य है। दरअसल ईरान इजराइल युद्द भले ही फ़िलहाल रुक गया हो लेकिन ईरान की मिसाइलों ने इजराइल के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले मिसाइल डिफेन्स सिस्टम में […]

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ट्रम्प के सामने बेबस यूरोप

नवभारत नियम आधारित व्यवस्था पर यूरोप का भरोसा है लेकिन ट्रम्प का नहीं। मानवाधिकार और लोकतंत्र की रक्षा के लिए यूरोप सजग है लेकिन ट्रम्प नहीं। पुतिन के आक्रमक साम्यवाद से यूरोप चिंतित है लेकिन ट्रम्प नहीं। सामरिक मदद देकर यूक्रेन को मजबूत रखने के लिए यूरोप प्रयत्नशील है लेकिन ट्रम्प नहीं। नियन्त्रण और संतुलन […]

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खत्म हो गया गुप्त कूटनीति का युग

प्रजातंत्र इतिहास के अलग-अलग कालखंडों में दुनिया के कई ताक़तवर देशों को चुनौती देने वाले उस्मानिया सल्तनत का साम्राज्य का दायरा करीब पचास लाख वर्ग किलोमीटर तक पहुंच गया था। उस्मानिया सल्तनत  का विस्तार मिस्र,ग्रीस,हंगरी,जॉर्डन,लेबनान,इसराइल,फलस्तीन,रोमानिया,सीरिया,सऊदी अरब और उत्तरी अफ्रीका  तक  था।अल्बानिया,साइप्रस,इराक़,सर्बिया,क़तर और यमन भी उस्मानिया सल्तनत  का हिस्सा थे। फ्रांसीसी राजनयिक फ्रंकोईस जॉर जिस पिकाट […]

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 जमात-ए-इस्लामी की गिरफ्त में बांग्लादेश

हरिभूमि   भाषा,सांस्कृतिक अधिकार,धर्मनिरपेक्षता,शिक्षा,मानवाधिकार और लोकतंत्र की बुनियाद पर टिके बांग्लादेश का भविष्य कट्टरपंथ के अंधेरे में घिरता हुआ दिखाई दे रहा है। भारत के पड़ोस में स्थित यह देश अब कट्टरपंथी  संगठन जमात-ए-इस्लामी की पूरी गिरफ्त में आ चूका है। जमात-ए-इस्लामी राजनीतिक दल से कहीं ज्यादा इस्लामिक मूल्यों पर आधारित एक वैचारिक संगठन है […]

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खुद की कूटनीति को नकारने का जोखिम….

राष्ट्रीय सहारा,हस्तक्षेप अंतरराष्ट्रीय राजनीति में दो धारी कूटनीति एक अत्यंत व्यावहारिक और प्रभावी उपकरण माना जाता है। विशेषकर तब जब कोई देश अपने हितों को बहुपक्षीय रूप से सुरक्षित करना चाहता है। यह नीति न केवल रणनीतिक लाभ दे सकती है,बल्कि विश्व मंच पर एक देश की स्थिति को भी मजबूत भी कर सकती है। […]

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ट्रम्प का श्वेत वर्चस्ववाद,दक्षिण अफ्रीका और वैश्विक संकट

बंसल डिजीटल नस्लवाद,भेदभाव और विभाजन की अवधारणा पर आधारित श्वेत वर्चस्ववाद के इस सदी में कमजोर पड़ने के दावों को झूठलाने के लिए कोई अमेरिकी राष्ट्रपति इतना बेताब हो सकता है,इसकी कल्पना शायद ही किसी ने की होगी। व्हाइट हाउस में ट्रम्प ने अपने समक्ष राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा के सामने जब दक्षिणी अफ़्रीका में गोरों […]

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रणनीतिक निवेश मध्यपूर्व

राष्ट्रीय सहारा  मध्यपूर्व का रणनीतिक और आर्थिक महत्व अत्यधिक महत्वपूर्ण रहा है और यह समूचा क्षेत्र वैश्विक राजनीति,अर्थव्यवस्था और रणनीतिक दृष्टि से बेहद खास माना जाता है। इस क्षेत्र का विशेष महत्व कई पहलुओं से जुड़ा हुआ है,जिनमें भूगोल,ऊर्जा संसाधन,ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत और वैश्विक राजनीति में इसकी स्थिति शामिल है।ट्रंप की अपने दूसरे कार्यकाल की पहली बड़ी यात्रा में […]

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