#ब्रह्मदीप अलूने
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  उज्जैन सिंहस्थ 2028-सबसे बड़े धार्मिंक समागम की जोरदार तैयारी

राष्ट्रीय सहारा,हस्तक्षेप भारत की पहचान आध्यात्म,धर्म और संस्कृति है तथा उज्जैन का इसमें विशिष्ट स्थान है। महान सांस्कृतिक परम्पराओं के साथ-साथ उज्जैन की गणना पवित्र सप्तपुरियों में की जाती है। यहां स्थित महाकालेश्वर मंदिर भारत के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है।  सिंहस्थ कुम्भ उज्जैन का महान धार्मिक पर्व है। बारह वर्ष के बाद,जब सूर्य […]

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आशंकित भारत की वैदेशिक नीति में बदलाव की दरकार  

हस्तक्षेप,राष्ट्रीय सहारा  अटल बिहारी वाजपेयी अक्सर कहा करते थे कि दोस्त बदले जा सकते हैं मगर पड़ोसी नहीं। वाजपेयी की कूटनीति सीधी और स्पष्ट  रही और पड़ोसी देशों को लेकर उनमें शक्ति,सामरिक दृष्टिकोण और संवाद की गहरी समझ शामिल थी। वाजपेयी देश की आंतरिक राजनीति की छाया में वैदेशिक नीति को प्रभावित न होने देने […]

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सीरिया किस और जायेगा

राष्ट्रीय सहारा अरब में असद का अर्थ साहस,वीरता और आक्रामकता से लगाया जाता है। लेकिन सीरिया में ऐसा बिल्कुल नहीं है।  यहां के बाशिंदों के लिए बशर अल असद निर्मम और अत्याचारी शासन व्यवस्था  के प्रतीक है। पश्चिम एशिया के  इस ऐतिहासिक देश में लोकतंत्र को कुचल कर ढाई दशकों तक अधिनायकवादी शासन व्यवस्था कायम […]

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 दलित,आदिवासी सांसदों का रिपोर्ट कार्ड

प्रजातन्त्र -6 दिसम्वर-डॉ.आंबेडकर पुण्यतिथि रक्त,जाति,समुदाय और वर्ग की श्रेष्ठता से अभिशिप्त समाज में वंचितों की अस्मिता की रक्षा करने की चुनौती से जूझते बाबा साहब अंबेडकर राजनीतिक और संविधानिक अधिकारों से करोड़ों लोगों का आत्मविश्वास बढ़ाना चाहते थे। बाबा साहब का यह मानना था की  देश की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक संस्थाओं में विशेष अधिकार प्राप्त […]

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युद्धविराम की युद्धनीति

राष्ट्रीय सहारा युद्ध विराम को लेकर यह माना जाता है कि यह शत्रुता को कम करने का प्रयास होता है तथा इससे युद्ध के स्थायी समाधान की तरफ़ बढ़ने का संकेत होता,हालांकि इससे युद्ध की स्थिति खत्म नहीं हो जाती। और फिर जब युद्द विराम इस्राइल और उसके प्रतिद्वंदी देशों के बीच हो तो आशंकाएं […]

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बांग्लादेश की कूटनीति और भारत

जनसत्ता  राजनीतिक बदलाव किसी देश के राजनीतिक निर्णयों,रणनीतियों और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों को किस प्रकार प्रभावित कर सकते है इसका बड़ा  उदाहरण बांग्लादेश है। शेख हसीना की सरकार के तख्तापलट के बाद बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने  देश की वैदेशिक नीति में अभूतपूर्व बदलाव कर पाकिस्तान के साथ सामरिक,राजनीतिक और नागरिक संबंधों को प्राथमिकता से बहाल […]

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अंग्रेजों की भविष्यवाणी को भारत के संविधान ने जब गलत साबित  कर दिया…

संविधान दिवस-26 नवम्बर   जे.ई.वेल्डन कलकत्ता के पूर्व बिशप थे। भारत की आज़ादी के प्रश्न पर 1915 में उन्होने कहा था की,भारत से ब्रिटिश साम्राज्य का अंत एक अकल्पनीय घटना होगी। जैसे ही अंतिम ब्रिटिश सिपाही बंबई या कराची के बंदरगाह से रवाना होगा,हिंदुस्तान परस्पर धार्मिक और नस्लीय समूह के लोगों का अखाड़ा बन जाएगा। […]

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आक्रामक ट्रम्प केबिनेट

राष्ट्रीय सहारा                         ऐतिहासिक राजनीतिक वापसी के बाद आत्मविश्वास से भरे हुए डोनाल्ड ट्रम्प अमेरिकी फर्स्ट की योजना को साकार करने को संकल्पित नजर आ रहे है। ट्रम्प ने जिन सहयोगियों को अपनी केबिनेट का हिस्सा बनाया है,उससे भविष्य के अमेरिका की बदली हुई […]

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सेव अमेरिका से वैश्विक असहमति की आशंका

राष्ट्रीय सहारा,हस्तक्षेप   ट्रंप एक बार फिर अमेरिका का नेतृत्व करने जा रहे है,इस बार उन्होंने अमेरिका फर्स्ट और सेव अमेरिका के साथ आगे बढ़ने का इरादा जाहिर किया है. अमेरिका में आप्रवासन पर बहस दशकों पुरानी है,हालांकि आप्रवासन व्यापक रूप से आर्थिक विकास को बढ़ावा देता है। ट्रम्प ने अमेरिका की विविधता  पर निशाना […]

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आदिवासी अभिवादन में क्यों कहते है राम राम…..

लोकदेश   भारतीय सभ्यता और संस्कृति में वन तप,त्याग,ध्यान,साधना और आध्यात्मिक यात्रा का प्रतीक है। भारत के धार्मिक ग्रंथों में वन का अत्यधिक महत्व है। रामायण में भगवान श्री राम का वनवास एक महत्वपूर्ण घटना है जो हमें जीवन के सिद्धांतों,आदर्शों,मूल्यों,समर्पण,त्याग और धर्म की महत्ता को सिखाती है। इसी तरह वेदों और उपनिषदों में भी वनों […]

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