#जनसत्ता
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दिल्ली का निमंत्रण और ढाका का संशय         

जनसत्ता अविश्वास की कूटनीति के बूते पड़ोसियों से अच्छे संबंध कायम नहीं किए जा सकते। तारिक रहमान की भारत नीति को लेकर सबसे बड़ी चिंता यही है कि वे नई दिल्ली को एक संभावित साझेदार से अधिक एक संशय की दृष्टि से देख रहे हैं। बांग्लादेश से सकारात्मक संबंधों की राजनयिक कोशिशों की दिशा में […]

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तुर्की,पाकिस्तान,सऊदी अरब-तीन देश, तीन स्वार्थ, एक गठबंधन  

   जनसत्ता  बहुस्तरीय गठबंधन अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को प्रभावित करने की क्षमता तो रखते है,लेकिन उनका प्रभाव तभी दीर्घकालीन होता है,जब उनके पीछे साझा रणनीतिक दृष्टि,पारदर्शिता,प्रतिबद्धता और स्थायी हित हो। केवल तात्कालिक स्वार्थों पर आधारित गठबंधन अक्सर बदलती परिस्थितियों के साथ कमजोर पड़ जाते है। मक्का में तुर्की, पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हुआ  संयुक्त […]

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अशांत पाकिस्तान में भारत के लिए अवसर 

   जनसत्ता पाकिस्तान की राजनीति में सैन्य वर्चस्व ने लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर किया है, आर्थिक सुधारों को बाधित किया है तथा कट्टरपंथी संगठनों के प्रति दोहरी नीति को जन्म दिया है। इसके कारण पाकिस्तान आज राजनीतिक अस्थिरता, आर्थिक संकट और आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहा है। यह स्थिति भारत के लिए अनेक […]

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हिन्द-प्रशांत में भारत के लिए नए अवसर

जनसत्ता  रणनीतिक अवधारणाएं दीर्घकालीन राष्ट्रीय हितों और व्यापक भू-राजनीतिक दृष्टि पर आधारित होती हैं। हिन्द-प्रशांत की अवधारणा भी ऐसी ही एक रणनीतिक पहल थी,जिसने चीन के बढ़ते समुद्री प्रभाव को नियंत्रित और संतुलन  कायम करने के लिए अमेरिका,भारत,जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे समान हितों वाले देशों को लामबंद किया था। अब राष्ट्रपति ट्रम्प की नीतियों ने […]

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अमेरिका का विकल्प और दुनिया

जनसत्ता विश्व राजनीति में शक्ति का परिवर्तन अचानक नहीं होता। वह धीरे-धीरे विश्वास,आर्थिक प्रभाव और कूटनीतिक अवसरों के माध्यम से विकसित होता है। चीन की यात्रा पर पहले ट्रम्प और उसके बाद पुतिन का पहुंचना केवल औपचारिक कूटनीतिक घटनाएं नहीं थीं। शी जिनपिंग के साथ उनकी मुलाकातों और उसके बाद हुई घोषणाओं ने दुनिया को […]

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मध्य पूर्व में यूएई का भू-रणनीतिक दांव

जनसत्ता  अंतरराष्ट्रीय संबंधों की वास्तविकता यह है की यहां न तो कोई स्थाई दोस्त होता है,न स्थाई दुश्मन होता है और न ही कोई स्थाई गठबंधन होता है। राष्ट्रीय हितों  के संवर्धन के लिए समय,परिस्थिति और रणनीतिक लाभ के अनुसार दोस्त और दुश्मन बदलते रहते हैं। तेल की दुनिया के दो मजबूत साथी माने जाने वाले सऊदी […]

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मध्यपूर्व को चाहिए मजबूत मध्यस्थ

    जनसत्ता                                               किसी भी जटिल अंतर्राष्ट्रीय विवाद के समाधान के लिए पहले विश्वास निर्माण आवश्यक है,तभी सार्थक और स्थायी समाधान संभव हो सकता है। इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच हुई बातचीत की असफलता का एक प्रमुख कारण यह था कि दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद गहरे अविश्वास को दूर […]

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मध्यपूर्व से उभरता नया शक्ति संतुलन

जनसत्ता                   किसी क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति,प्राकृतिक संसाधन,समुद्री मार्ग,पर्वत,रेगिस्तान और सीमाएं यह तय करती है कि वहां की राजनीति,सुरक्षा नीति और कूटनीति किस दिशा में विकसित होगी। दक्षिण-पश्चिम एशिया,दक्षिण-पूर्वी यूरोप और उत्तर-पूर्वी अफ्रीका तक विस्तारित मध्यपूर्व की कोई स्पष्ट और सर्वमान्य भौगोलिक सीमा नहीं है। यही कारण […]

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मुक्त व्यापार और भारत के अन्तर्विरोध

जनसत्ता                                                                                                               […]

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लैटिन अमेरिका का भविष्य

जनसत्ता  मेक्सिको,मध्य अमेरिका,कैरिबियन और दक्षिण अमेरिका के कई देशों तक फैला हुआ लैटिन अमेरिका संयुक्त राष्ट्र अमेरिका से भौगोलिक रूप से जुड़ा हुआ है, इसकी स्थिरता और सुरक्षा अमेरिका के राष्ट्रीय हितों से जुड़ी है। यह अमेरिकी कंपनियों के लिए एक बड़ा बाजार है और विदेशी निवेश का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है। लैटिन अमेरिका के […]

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