#ब्रह्मदीप अलूने
article भारत मे आतंकवाद

कट्टरपंथियों की वापसी

राष्ट्रीय सहारा                                                                                          बंगलादेश में राजनीति बंद,विरोध,गरीबी और आतंकवाद से बाहर निकलकर […]

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फिलिस्तीन में गृहयुद्द का खतरा

राष्ट्रीय सहारा एक प्रतिरोध संगठन,एक धार्मिक आंदोलन और एक शासक दल के नेता के रूप में इस्माइल हानिया,हमास में सर्व स्वीकार्य थे और उनकी मौत के बाद फिलिस्तीन में राजनीतिक एकता की संभावनाएं खत्म हो गई है।हानिया न केवल गजा में बल्कि तुर्की,ईरान और क़तर में भी फिलिस्तीन का राजनीतिक प्रतिनिधित्व करते हुए नजर आते […]

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 विकसित बांग्लादेश का सपना और भारत की चुनौती

जनसत्ता बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने वैदेशिक संबंधों को लेकर बेहद यथार्थवादी दृष्टिकोण अपना रखा है जिसके अंतर्गत यह  माना जाता है की विदेश नीति संबंधी निर्णय राष्ट्रीय हित के आधार पर लिए जाना चाहिए न कि नैतिक सिद्धांतों और भावनात्मक मान्यताओं के आधार पर। दरअसल भारत की कूटनीतिक,सैन्य और आर्थिक मदद से अस्तित्व […]

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ओली की सत्ता

राष्ट्रीय सहारा  नेपाल के प्रधानमंत्री ओली ने सार्वजनिक रूप से कई बार कहा है कि ईश्वर का अस्तित्व नहीं है और अगर कभी कोई ईश्वर रहा है तो वो सिर्फ कार्ल मार्क्स थे। 2018 में प्रधानमंत्री बनते ही ओली ने वह सब कुछ किया जिसकी इस धार्मिक और सनातन परम्परा में विश्वास करने वाले देश […]

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साझेदारों की सत्तावादी सनक का संकट

राष्ट्रीय सहारा,हस्तक्षेप   यूनाइटेड किंगडम में गॉड सेव द किंग या गॉड सेव द क्वीन को 1745 में राष्ट्रगान के रूप में अपनाया गया था और यह आज तक ऐसा ही है। इसे दुनिया का पहला राष्ट्रगान माना जाता है। गॉड सेव द क्वीन अर्थात् हे ईश्वर,हमारी रानी को रक्षा करो है। भगवान हमारे दयालु […]

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तालिबान के प्रति बदलता रुख

जनसत्ता  रणनीति की दृष्टि से जो नीति उपयुक्त हो,वहीं नीति सर्वोत्तम होगी। अन्तर्राष्ट्रीय राजनीति में यथार्थवाद का सिद्धांत सबसे प्रभावकारी माना जाता है तथा तालिबान की बढ़ती वैश्विक स्वीकार्यता में ताकतवर देशों का यथार्थवादी दृष्टिकोण साफ दिखाई दे रहा है। हाल ही में तालिबान के महत्वपूर्ण नेता और आतंकी सिराजुद्दीन हक़्क़ानी ने अपने शिष्टमंडल के […]

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article भारत मे आतंकवाद

देश की खिलाफत,अरुंधती रॉय

राष्ट्रीय सहारा                वे माओवादी हिंसा को दरकिनार करके इसे गरीब आदिवासियों का विद्रोह  कहती है। करीब डेढ़ दशक पहले उन्होंने रेड कॉरिडोर के केंद्र माने जाने वाले बस्तर की गुपचुप यात्रा की और दंडकारण्य में माओवादियों के साथ काफी वक्त बिताया। वे माओवादियों को भाई,साथी या कॉमरेड कहकर लाल सलाम कहने में फक्र महसूस किया […]

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आपराधिक न्यायालय की फजीहत

प्रजातंत्र रोमन देवी जस्टीशिया,आंखों पर पट्टी बंधी न्याय की देवी के रूप में न्यायालयों में प्रतीक के तौर पर नजर आती है। उनके एक हाथ में तराजू और दूसरे में तलवार होती है। आंखों पर पट्टी न्याय की निष्पक्षता का प्रतीक है। तराजू न्याय के संतुलन का प्रतीक है। यदि दूसरे शब्दों में कहें तो […]

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पश्चिम में दंड नहीं पुनर्वास पर बल

राष्ट्रीय सहारा,हस्तक्षेप  दंड के औचित्य और उद्देश्य को पश्चिम और शेष दुनिया में गहरा वैचारिक और वैधानिक अंतर है। आमतौर पर यह देखा गया है कि विकासशील और पिछड़े देशों में न्याय की अवधारणा और नीतियां प्रतिशोध पर आधारित कड़ी होती है और इसे लोकप्रिय भी माना जाता है। प्रतिशोधात्मक न्याय आपराधिक न्याय की एक […]

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संकट में फिलिस्तीन राष्ट्र का सपना

जनसत्ता क्षेत्र विस्तारवाद का अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में बहुत महत्व रहा है। राजनीतिक सत्ताएं इसे सैन्यवादी विचारधारा से पोषित करती है जिसके अनुसार  यह माना जाता है कि शक्ति से ही शान्ति आती है। मध्यपूर्व में इस्राइल विस्तारवाद की रणनीति को आत्मसात कर चूका है वहीं फिलिस्तीन की विभाजित सत्ताओं पर हावी हमास शक्ति और आक्रमण को […]

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