मुक्त व्यापार और भारत के अन्तर्विरोध
जनसत्ता […]
politics यह गांधी का अंतिम आमरण अनशन था,जो 13 जनवरी 1948 को प्रारम्भ हुआ था। हमेशा की तरह उनका शरीर इस बार भूख और प्यास का संकट झेलने को तैयार नहीं था। इस कारण महज 48 घंटे में ही उनके शरीर ने जवाब दे दिया। गांधी जी के मूत्र में एसीटोन और एसेटिक अम्ल के […]
सुबह सवेरे बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना ने कुछ वर्षों पहले कहा था कि महात्मा गांधी उनके पिता शेख मुजीबुर रहमान के आदर्श थे और वे भी उस मार्ग पर चलना पसंद करती हैं। ऐसा कहकर शेख हसीना ने बांग्लादेश की राष्ट्रीय चेतना और उसकी ऐतिहासिक दिशा का एक बड़ा राजनीतिक संकेत दिया था। […]
politics दुनिया का यह बेहिसाब बदलावों का दौर है,विकास के सपने है और इंसान की की बुद्धि से आगे निकलने की उम्मीदें भी बढ़ी है। तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता को इंसानी सोच से भी आगे बताकर भविष्य को अभूतपूर्व उजाले का रूप दिया जा रहा है। प्रगति की यह भाषा आकर्षक है और भरोसा […]
नवभारत इतिहास गवाह है कि तानाशाहों को जनता कभी माफ़ नहीं करती। तानाशाही भय,दमन,हिंसा और जनता का उत्पीड़न करके खुद को सुरक्षित बनाने की कोशिश करती रहती।ईरान की धार्मिक तानाशाही इस लिहाज़ से और भी खतरनाक रही है,क्योंकि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामनेई ने सत्ता को ईश्वर और धर्म के नाम पर वैध […]
जनसत्ता मेक्सिको,मध्य अमेरिका,कैरिबियन और दक्षिण अमेरिका के कई देशों तक फैला हुआ लैटिन अमेरिका संयुक्त राष्ट्र अमेरिका से भौगोलिक रूप से जुड़ा हुआ है, इसकी स्थिरता और सुरक्षा अमेरिका के राष्ट्रीय हितों से जुड़ी है। यह अमेरिकी कंपनियों के लिए एक बड़ा बाजार है और विदेशी निवेश का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है। लैटिन अमेरिका के […]
सुबह सवेरे स्वामी विवेकानन्द ने बहुत पहले यह समझ लिया था कि देशों के बीच संबंध केवल सरकारों से नहीं बल्कि जनता से जनता के बीच बनते हैं। यही पब्लिक टू पब्लिक डिप्लोमेसी का मूल भाव है। 1893 में शिकागो के विश्व धर्म संसद में उनका ऐतिहासिक संबोधन किसी राजनयिक मिशन का हिस्सा नहीं था,फिर […]
नवभारत बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के धार्मिक स्थलों पर हमले,सामाजिक और राजनीतिक दबाव तथा कट्टरपंथी संगठनों की सक्रियता ने इस भय को और गहरा किया है की यह देश पूर्ण इस्लामवाद की और तेजी से बढ़ रहा है। यदि कट्टरपंथी सोच को लगातार राजनीतिक संरक्षण मिलता है तो स्थिति और संवेदनशील हो सकती है।बांग्लादेश में अगले […]
नवभारत बांग्लादेश में राजनीतिक विभाजन गहरा है,कट्टरवादियों ने वैधानिक व्यवस्था को ध्वस्त कर दिया है,अल्पसंख्यक बूरी तरह डरे हुए है। शेख हसीना के कार्यकाल में पुलिस और प्रशासन के दुरूपयोग से जो इन संस्थाओं की छवि खराब हुई है उससे प्रशासनिक व्यवस्थाएं अस्त व्यस्त हो गई है। छात्रों के गुस्से को शांत करने वाली कोई […]
जनसत्ता एक सफल डिजिटल मुद्रा प्रणाली के लिए तकनीकी नवाचार,आर्थिक स्थिरता और नियामक ढांचा होना आवश्यक है। इंटरनेट पहुंच के साथ व्यापक स्तर पर अपनाने के लिए लोगों में डिजिटल साक्षरता भी आवश्यक है। क्रिप्टोकरेंसी की सफलता के लिए इसे स्थानीय जरूरतों के अनुरूप होना चाहिए,तकनीकी रूप से सुलभ होना चाहिए और एक सहायक कानूनी […]