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 बदल गई नेपाल की राजनीति

नवभारत अभिजात्य और कुछ विशिष्ट राजनीतिक दलों तथा उसके सत्तावादी नेताओं से अभिशिप्त रही नेपाल की राजनीति में बालेन शाह के उभार को एक नए दौर की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। नया नेतृत्व देश की आंतरिक राजनीति,व्यवस्थाओं और पड़ोसी देशो से संबंधों को लेकर ज्यादा पारदर्शी और स्पष्ट नजर आ रहा […]

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मध्यप्रदेश को संवारती नौ प्रेरणाएं

politicsvala महिला दिवस के अवसर पर पॉलिटिक्सवाला का यह विशेष अंक मातृशक्ति को समर्पित है। भारतीय संस्कृति में नारी को सृजन, शक्ति और संवेदना का प्रतीक माना गया है। इसी भावना को ध्यान में रखते हुए हमने इस अंक में मध्यप्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य कर रही नौ प्रेरणादायी महिलाओं को स्थान दिया […]

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इजराइल के खिलाफ कभी नहीं जाएंगे पुतिन

नवभारत ईरान पर अमेरिका और इजराइल के भीषण हमलों को रोकने की क्षमता यदि दुनिया में किसी देश के पास है तो वह रूस है। ईरान और रूस के गहरे रणनीतिक संबंध भी है तथा दोनों देश अमेरिका के प्रतिद्वंदी भी है। रूस यदि अपनी किसी परमाणु पनडुब्बी या नौसैनिक शक्ति को ईरान की रक्षा […]

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भारत से पाकिस्तान तक बलात्कारियों पर रहम 

नवभारत  नैतिक शुद्धता पर आधारित न्याय व्यवस्था जब बलात्कार से पीड़ित,सहमी और अंदर से टूटी हुई आत्मा की आवाज को सुनने से इंकार कर दे,तब महिलाओं को कहां जाना चाहिए। यह प्रश्न भारत और पाकिस्तान की करोड़ों महिलाओं को परेशान कर रहा है। दरअसल भारत और पाकिस्तान की अदालतों के हाल के समय में कुछ […]

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बांग्ला अस्मिता के सामने फिर हार गया पाकिस्तान

नवभारत बांग्लादेश के आम चुनावों के परिणामों को लेकर एक बार फिर यह साफ हो गया है कि देश की जनता ने अपनी बांग्ला अस्मिता,भाषायी गौरव और मुक्ति संग्राम की विरासत को प्राथमिकता दी है। 1971 में बांग्लादेश का जन्म ही सांस्कृतिक पहचान और लोकतांत्रिक आकांक्षाओं की रक्षा के लिए हुआ था। ऐसे में बीएनपी […]

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हिटलर की प्रेमिका और मौत तक साझेदारी

 सुबह सवेरे प्रेम सचमुच कमाल होता है,उसकी अभिव्यक्ति,भावनाएं और समर्पण इंसान को असाधारण बना देते हैं। लेकिन यदि प्रेम,किसी तानाशाह से हो जाएं तो वह गहरी दुविधा पैदा करता है। एक ओर निजी संबंध की कोमलता होती है,तो दूसरी ओर उस व्यक्ति के कठोर और अमानवीय कर्मों की कठोर सच्चाई। प्रेम कभी-कभी इंसान को अंधा […]

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बहुलतावादी बांग्लादेश की मतपेटी में इस्लामवाद

politicsvala दो साल पहले तक धर्मनिरपेक्षता और बहुलवाद की पहचान से दुनिया में झंडा बुलन्द करने वाले बांग्लादेश में हरे झंडे,पाकिस्तान से दोस्ती,भारत का विरोध,हिन्दुओं पर अत्याचार और शरिया कानून को लागू करने के मुद्दें आम चुनाव में हावी है।कट्टरपंथी जमातों से अभिशिप्त इस आम चुनाव से बांग्लादेश के भविष्य का फैसला होगा। शेख हसीना […]

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मुक्त व्यापार और भारत के अन्तर्विरोध

जनसत्ता                                                                                                               […]

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article गांधी है तो भारत है

यह बात और है कि गांधी मरते ही नहीं है…

 politics यह गांधी का अंतिम आमरण अनशन था,जो 13 जनवरी 1948 को प्रारम्भ हुआ था।  हमेशा की तरह उनका शरीर इस बार भूख और प्यास का संकट झेलने को तैयार नहीं था। इस कारण महज 48 घंटे में ही उनके शरीर ने जवाब दे दिया। गांधी जी के मूत्र में एसीटोन और एसेटिक अम्ल के […]

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article गांधी है तो भारत है

बांग्लादेश ने गांधी को नहीं माना तो वह टूट जाएगा

सुबह सवेरे बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना ने कुछ वर्षों पहले कहा था कि महात्मा गांधी उनके पिता शेख मुजीबुर रहमान के आदर्श थे और वे भी उस मार्ग पर चलना पसंद करती हैं। ऐसा कहकर शेख हसीना ने बांग्लादेश की राष्ट्रीय चेतना और उसकी ऐतिहासिक दिशा का एक बड़ा राजनीतिक संकेत दिया था। […]

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